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देशभर के 47,328 गांव 'आदर्श ग्राम' के रूप में चयनित, 3.28 लाख से अधिक विकास कार्यों की पहचान; 47.59 लाख लोगों को मिला लाभ
अनुसूचित जाति (एससी) समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) का दायरा लगातार बढ़ रहा है। योजना के 'आदर्श ग्राम' घटक के तहत अब तक देशभर के 47,328 गांवों का चयन किया जा चुका है। इन चयनित गांवों में तेलंगाना के 435 गांव भी शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, आजीविका, स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। यह जानकारी केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने राज्यसभा में सांसद अनिल कुमार यादव मंडाडी के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से चलाई जा रही केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है। इसके 'आदर्श ग्राम' घटक के माध्यम से ऐसे गांवों का चयन किया जाता है जहां अनुसूचित जाति की आबादी अधिक है और जहां विकास संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा सके। योजना का उद्देश्य केवल नई परियोजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं का समन्वित उपयोग (Convergence) करते हुए गांवों में विकास की कमियों को दूर करना है। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
10 क्षेत्रों के 50 सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर काम
सरकार के अनुसार, प्रत्येक चयनित गांव में विकास कार्य शुरू करने से पहले विस्तृत 'नीड असेसमेंट सर्वे' (Need Assessment Survey) कराया जाता है। इस सर्वेक्षण के माध्यम से गांव की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाता है और यह देखा जाता है कि किन क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी है। योजना के तहत 10 प्रमुख क्षेत्रों में 50 सामाजिक-आर्थिक संकेतकों की निगरानी की जाती है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, सड़क, बिजली, आवास, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और अन्य बुनियादी सेवाएं शामिल हैं। यदि किसी सुविधा की कमी सामने आती है, तो उसे संबंधित केंद्रीय या राज्य सरकार की योजना के माध्यम से पूरा किया जाता है। जिन जरूरतों को अन्य योजनाओं से पूरा नहीं किया जा सकता, उन्हें PM-AJAY के तहत वित्तीय सहायता देकर पूरा किया जाता है।
देशभर में 3.28 लाख से अधिक विकास कार्यों की पहचान
राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, योजना के तहत देशभर में अब तक 3,28,131 विकास कार्यों की पहचान की जा चुकी है। इन विकास कार्यों में सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था, स्कूलों का उन्नयन, सामुदायिक भवन, स्वच्छता सुविधाएं, बिजली, सार्वजनिक अवसंरचना और अन्य आवश्यक परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें से अब तक 46,642 विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जिससे 47,59,399 लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इसके अलावा, योजना के तहत कुल 1,10,51,213 संभावित लाभार्थियों की पहचान की गई है, जिन्हें विभिन्न विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाना है।
शिक्षा क्षेत्र पर विशेष जोर
योजना में शिक्षा को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि अनुसूचित जाति समुदायों के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसी उद्देश्य से चयनित गांवों में स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, छात्रों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने तथा शिक्षा से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
तेलंगाना में 435 गांव योजना में शामिल
राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, तेलंगाना के 435 गांवों का चयन 'आदर्श ग्राम' घटक के तहत किया गया है। शिक्षा क्षेत्र में राज्य में 3,529 लाभार्थियों की पहचान की गई है, जिनमें से अब तक 472 लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल चुका है। सरकार का कहना है कि जैसे-जैसे विकास कार्य पूरे होंगे, लाभार्थियों की संख्या में भी वृद्धि होगी।
डिजिटल निगरानी से बढ़ी पारदर्शिता
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सभी विकास कार्यों की प्रगति PMAGY पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट की जाती है। इस डिजिटल निगरानी प्रणाली के माध्यम से केंद्र सरकार प्रत्येक चयनित गांव में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करती है और जहां आवश्यक होता है, वहां अतिरिक्त सहायता या दिशा-निर्देश भी जारी किए जाते हैं।
थर्ड-पार्टी ऑडिट पर सरकार का जवाब
राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल योजना के तहत अलग से थर्ड-पार्टी ऑडिट का प्रावधान नहीं है। हालांकि, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 'आदर्श ग्राम' घोषित किए गए गांवों द्वारा किए गए स्व-घोषणा (Self Declaration) का सत्यापन करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है, वहां निर्धारित सामाजिक-आर्थिक मानकों की वास्तविक पूर्ति हुई है।
समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि PM-AJAY के तहत केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं का प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाता है, तो यह योजना अनुसूचित जाति समुदायों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार ला सकती है। योजना केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना भी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जाति समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने और सामाजिक असमानताओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
