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LLM छात्र को डिग्री न मिलने पर विवाद, राज्यपाल से लगाई न्याय की गुहार, विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप l

बरेली स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के एलएलएम अंतिम वर्ष के छात्र पवन कुमार ने डिग्री जारी न होने के मामले में राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाई है। लखनऊ पहुंचकर उन्होंने मुलाकात का प्रयास किया और विश्वविद्यालय प्रशासन व एक प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाए। छात्र का कहना है कि प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने के बावजूद उनके परिणाम में “RD Disciplinary Enquiry” दर्ज होने के कारण डिग्री रोकी गई है। उन्होंने जातिगत और मानसिक उत्पीड़न, गलत अंक देने और शिकायतों पर कार्रवाई न होने का भी आरोप लगाया है।

Kashish Rai03 अग. 2026, 06:40 PM IST
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LLM छात्र को डिग्री न मिलने पर विवाद, राज्यपाल से लगाई न्याय की गुहार, विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप l

उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के विधि विभाग से एलएलएम अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र पवन कुमार का मामला इन दिनों चर्चा में है। छात्र ने आरोप लगाया है कि प्रथम श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण होने के बावजूद उनकी डिग्री जारी नहीं की जा रही है, जिसके चलते उनका शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य प्रभावित हो रहा है।

सोमवार को पवन कुमार लखनऊ पहुंचे और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी समस्या रखने का प्रयास किया। हालांकि, मुलाकात संभव नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखी और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ-साथ विधि विभाग की एक प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाए।


पवन कुमार के अनुसार, उन्होंने पहले भी अपनी समस्या को सार्वजनिक किया था, लेकिन अब तक उनकी डिग्री जारी नहीं की गई। उनका आरोप है कि विभाग की एक शिक्षिका ने उनके साथ जातिगत टिप्पणी की, मानसिक उत्पीड़न किया और अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने यह भी कहा कि आंतरिक परीक्षा में उन्हें जानबूझकर बहुत कम अंक दिए गए, जिससे उनके परिणाम को प्रभावित किया जा सके।

छात्र ने बताया कि एलएलएम अंतिम वर्ष में प्रथम श्रेणी से पास होने के बावजूद विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणाम में “RD Disciplinary Enquiry” दर्ज कर दिया गया है। इसी कारण उनकी डिग्री रोक दी गई है। उनका कहना है कि इस स्थिति के चलते वे उच्च शिक्षा में प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने और नौकरी के अवसरों से वंचित हो रहे हैं।


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और न ही किसी जांच की पारदर्शी रिपोर्ट सामने आई। इससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। पवन कुमार ने राज्यपाल से अपील की है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें अंकपत्र, परीक्षा परिणाम और पूर्व में की गई शिकायतों की प्रतियां शामिल हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर वे निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। यह मामला शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष मूल्यांकन और छात्रों के अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और छात्र को न्याय मिल पाता है या नहीं।