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हिंदू राष्ट्र की मांग और आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रस्ताव, अखंड भारत सेवा दल ने सरकार से की अपील l

लखनऊ में आयोजित एक प्रेसवार्ता में अखंड भारत सेवा दल ने केंद्र और राज्य सरकार से भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने पर विचार करने की मांग उठाई। संगठन ने साथ ही मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर इसे आर्थिक आधार पर लागू करने की भी अपील की। संगठन के नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, सामाजिक समरसता और समान अवसर सुनिश्चित करना है। उन्होंने सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सनातन बोर्ड के गठन और गौ सेवा को प्राथमिकता देने की भी मांग की।

Kashish Rai03 अग. 2026, 06:42 PM IST
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हिंदू राष्ट्र की मांग और आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रस्ताव, अखंड भारत सेवा दल ने सरकार से की अपील l

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यूपी प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान अखंड भारत सेवा दल ने कई महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर अपनी मांगें सरकार के सामने रखीं। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मृत्युंजय पाठक प्रवल ने देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और सनातन मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए इस दिशा में विचार किया जाना आवश्यक है।


उन्होंने कहा कि भारत के समग्र विकास और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए वर्तमान आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। संगठन का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव कर आरक्षण को केवल आर्थिक आधार पर लागू किया जाना चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर हर वर्ग के लोगों को समान अवसर मिल सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो वर्तमान आरक्षण व्यवस्था को समाप्त कर नई नीति बनाई जाए, जो अधिक समावेशी और न्यायसंगत हो। प्रेसवार्ता में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सूरजपाल सिंह चौहान ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि सनातन परंपराओं के संरक्षण और सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘सनातन बोर्ड’ का गठन किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इससे धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को संगठित रूप से बढ़ावा मिलेगा और परंपराओं का संरक्षण बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।


उन्होंने सरकार से गौ सेवा, गौ सुरक्षा और गौ संवर्धन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की भी अपील की। उनके अनुसार, भारतीय संस्कृति और परंपराओं में गौ का विशेष महत्व है, इसलिए इसके संरक्षण के लिए ठोस नीतियां बनाई जानी चाहिए। संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कार, आध्यात्मिक परंपराओं और सनातन जीवन मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विशेष योजनाएं शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए प्रभावी कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया जा सके।


प्रेसवार्ता के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि संगठन की सभी मांगें लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में हैं। उन्होंने सरकार से इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की और विश्वास जताया कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे। यह प्रेसवार्ता एक बार फिर उन मुद्दों को केंद्र में लाती है, जो देश की सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक पहचान और नीतिगत ढांचे से जुड़े हुए हैं। आने वाले समय में इन मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित निर्णय पर सभी की नजरें रहेंगी।