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केंद्र ने शुरू की देश के सर्वोच्च वन अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया, IFS अधिकारियों से मांगे आवेदन
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने Director General of Forests एवं Special Secretary (DGF&SS) पद पर नियुक्ति के लिए भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह नियुक्ति वर्ष 2026 की रिक्ति के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति योजना के तहत की जाएगी। आवेदन करने वाले अधिकारियों के लिए कम से कम 30 वर्ष की सेवा, निर्धारित वरिष्ठता और अन्य पात्रता शर्तें अनिवार्य हैं। मंत्रालय ने आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तय की है। यह पद देश की वन नीति, जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों के क्रियान्वयन में सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों में से एक माना जाता है।
Anshuman Mishra03 अग. 2026, 07:03 PM IST

-नई दिल्ली: भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने देश के सर्वोच्च वन प्रशासनिक पद Director General of Forests एवं Special Secretary (DGF&SS) पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा प्रशासनिक प्रमुखों को आधिकारिक सर्कुलर जारी कर पात्र एवं इच्छुक भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service-IFS) अधिकारियों के नामांकन आमंत्रित किए हैं। यह नियुक्ति केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Staffing Scheme) के तहत वर्ष 2026 की रिक्ति के लिए की जाएगी।
Director General of Forests देश के वन प्रशासन का सर्वोच्च पद माना जाता है। यह अधिकारी न केवल राष्ट्रीय वन नीति के क्रियान्वयन की निगरानी करता है बल्कि जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी रणनीतियों, वन संरक्षण कानूनों के अनुपालन और राज्यों के साथ समन्वय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही पद भारत की वन नीति को वैश्विक पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं जैसे जलवायु परिवर्तन, कार्बन उत्सर्जन में कमी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जोड़ने का कार्य करता है।
मंत्रालय द्वारा जारी पात्रता मानदंडों के अनुसार इस पद के लिए वही भारतीय वन सेवा अधिकारी आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने 1 जनवरी 2026 तक कम से कम 30 वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो। इसके अलावा संबंधित बैच का कम से कम एक अधिकारी HAG+ वेतन स्तर पर दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुका हो। आवेदन करने वाले अधिकारी की सेवानिवृत्ति में कम से कम एक वर्ष शेष होना भी अनिवार्य है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस पद के लिए किसी प्रकार की "कूलिंग ऑफ" अवधि लागू नहीं होगी।
सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि यदि किसी अधिकारी का चयन होने के बाद वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति स्वीकार नहीं करता है तो उसे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से पांच वर्षों के लिए वंचित किया जा सकता है। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन के साथ राज्य सरकार की सहमति, विजिलेंस क्लियरेंस, सत्यापित APAR, अद्यतन Executive Record Sheet तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज़ जमा करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय सीमा के बाद या अधूरे आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि देश के पर्यावरणीय भविष्य से भी जुड़ी हुई है। भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने, वन क्षेत्र बढ़ाने, कार्बन सिंक विकसित करने और जैव विविधता संरक्षण के लिए कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इन लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में Director General of Forests की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत आज कई बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें जंगलों पर बढ़ता विकास का दबाव, वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच बढ़ते संघर्ष, जंगलों में आग की घटनाएं, अवैध कटाई, भूमि क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाला प्रभाव प्रमुख हैं। ऐसे समय में अनुभवी नेतृत्व से वन प्रबंधन की दिशा और प्रभावशीलता दोनों मजबूत हो सकती हैं।
यदि योग्य और अनुभवी अधिकारी इस पद पर नियुक्त होता है तो इसके कई व्यापक लाभ हो सकते हैं। वन संरक्षण योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय, वनाधारित समुदायों के हितों की रक्षा, जलवायु परिवर्तन से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्रगति तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने में इस पद की अहम भूमिका होगी।
भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहां जैव विविधता अत्यंत समृद्ध है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग एक-चौथाई हिस्सा वन एवं वृक्ष आच्छादन के अंतर्गत आता है और करोड़ों लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वनों पर निर्भर है। ऐसे में Director General of Forests जैसे शीर्ष पद पर सक्षम नेतृत्व का चयन केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि देश की पर्यावरणीय सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
