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शांति पाठ के बीच घर लौटा ‘मरा हुआ’ पति, औरैया में चौंकाने वाला मामला l
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जहां एक व्यक्ति को मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद वह जिंदा घर लौट आया। शांति पाठ के दौरान उसके अचानक सामने आने से परिवार और गांव वाले स्तब्ध रह गए। अब पुलिस उस अज्ञात शव की पहचान में जुटी है, जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के अजीतमल कोतवाली क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया, बल्कि पुलिस को भी उलझन में डाल दिया है। यहां एक व्यक्ति को मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद वही व्यक्ति जिंदा अपने घर लौट आया। मामला सैदपुर अड्डा गांव का है, जहां रहने वाले कमल सिंह रैदास करीब डेढ़ साल से घर से बाहर थे। परिवार के अनुसार, वह पहले पंजाब में नौकरी करने गए थे, इसके बाद ट्रक पर हेल्पर के रूप में काम किया और फिर ग्वालियर में प्लंबर का काम करने लगे। इस दौरान उनका परिवार से संपर्क सीमित था।
18 जुलाई को नेशनल हाईवे के किनारे एक अज्ञात शव मिला था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसकी पहचान कराने की कोशिश की। 20 जुलाई को कमल के बड़े भाई दशरथ सिंह ने उस शव की पहचान अपने छोटे भाई कमल के रूप में कर दी। पहचान के आधार पर पुलिस ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया। 21 जुलाई को परिवार ने पूरे रीति-रिवाज के साथ कमल सिंह का अंतिम संस्कार भी कर दिया। घर में शोक का माहौल था और परिजन उन्हें खोने का दुख मना रहे थे। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक महत्वपूर्ण बात सामने आई—कमल की पत्नी सुनीता को यह भरोसा था कि उसका पति जिंदा है।
सुनीता के पास एक ऐसा फोन नंबर था, जिससे कमल उससे संपर्क करता था। उसने उसी नंबर पर कॉल करने की कोशिश की। जब संपर्क हुआ, तो दूसरी तरफ से खुद कमल सिंह की आवाज आई। यह सुनकर सुनीता हैरान रह गई और उसने तुरंत कमल को घर लौटने के लिए कहा। 25 जुलाई को जब कमल सिंह अपने गांव सैदपुर अड्डा पहुंचे, तब उनके घर में शांति पाठ चल रहा था। जैसे ही वह घर के अंदर पहुंचे, उन्हें सामने देखकर परिवार के लोगों और गांव वालों के होश उड़ गए। जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार कुछ दिन पहले किया गया था, वही जिंदा उनके सामने खड़ा था।
यह घटना गांव में चर्चा का विषय बन गई और तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पुलिस भी मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि 18 जुलाई को मिले अज्ञात शव की पहचान कमल के भाई ने की थी। उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की गई थी। लेकिन अब जब कमल जिंदा लौट आया है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर किसका था।
पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अज्ञात शव की असली पहचान क्या है, पहचान में गलती कैसे हुई, और किन परिस्थितियों में यह भ्रम पैदा हुआ—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यह घटना न केवल पहचान प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि बिना पुख्ता सबूत के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना कितना खतरनाक हो सकता है।
