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हमीरपुर में बीमा के लिए पत्नी की हत्या: 44 लाख के लालच में पति ने रची साजिश, 48 घंटे में खुला राज l
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में 32 वर्षीय रीता की मौत को पहले सड़क हादसा माना गया, लेकिन 48 घंटे के भीतर पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि 44 लाख रुपये के जीवन बीमा के लिए रची गई सुनियोजित हत्या थी। आरोप है कि पति अमर सिंह ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। आर्थिक तंगी और भारी कर्ज के चलते आरोपियों ने बीमा राशि हासिल करने के लिए इस साजिश को रचा। तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

हमीरपुर जिले के ललपुरा क्षेत्र में सामने आया यह मामला एक साधारण सड़क हादसे से शुरू होकर एक खौफनाक साजिश में बदल गया। 29 जुलाई की रात पौधिया गांव के पास खेतों से लौट रहे किसानों ने सड़क किनारे एक महिला का शव पड़ा देखा। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने शुरुआती जांच में इसे सड़क दुर्घटना मानते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआत में घटनास्थल की स्थिति, सड़क किनारे शव का मिलना और बाहरी तौर पर कोई स्पष्ट हिंसा के संकेत न दिखने के कारण मामला एक्सीडेंट की दिशा में ही बढ़ा। लेकिन कुछ ही घंटों में एक छोटा सा सुराग—बैंक खाते से जुड़ी एक पर्ची—ने इस केस को नई दिशा दे दी। इसी के आधार पर मृतका की पहचान 32 वर्षीय रीता के रूप में हुई।
परिजनों को सूचना दी गई और पति अमर सिंह भी मौके पर पहुंचा। उसने शव की पहचान की और पूरे घटनाक्रम में खुद को एक दुखी और बेबस पति के रूप में प्रस्तुत करता रहा। हालांकि पुलिस को घटनास्थल से मिले कुछ संकेत और परिस्थितियां सामान्य नहीं लगीं। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सर्विलांस का सहारा लिया गया।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, शक गहराता गया और 48 घंटे के भीतर यह साफ हो गया कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या है। पुलिस के मुताबिक, इस हत्या के पीछे खुद मृतका का पति अमर सिंह ही मास्टरमाइंड निकला। जांच में खुलासा हुआ कि अमर सिंह ने अपने तीन साथियों—अमित गुप्ता उर्फ राम, पुष्पेंद्र सोनी उर्फ साहिल और अभय सिंह उर्फ गोलू—के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। चारों आरोपियों ने मिलकर पहले से योजना बनाई थी कि रीता की हत्या कर इसे सड़क दुर्घटना का रूप दिया जाएगा, ताकि किसी को शक न हो और आसानी से बीमा की रकम हासिल की जा सके।
पुलिस के अनुसार, रीता और अमर सिंह ने करीब ढाई साल पहले लव मैरिज की थी। यह रीता की दूसरी और अमर सिंह की तीसरी शादी थी। दोनों की मुलाकात कानपुर में हुई थी, जहां से उनके रिश्ते की शुरुआत हुई। शादी के बाद कुछ समय तक सब सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे आर्थिक समस्याएं बढ़ने लगीं। आरोपियों पर भारी कर्ज था और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। इसी दौरान रीता के नाम पर 44 लाख रुपये का जीवन बीमा कराया गया। पुलिस का मानना है कि यहीं से हत्या की साजिश ने आकार लेना शुरू किया। आरोपियों ने योजना बनाई कि रीता की हत्या कर उसे हादसा दिखाया जाएगा और बीमा कंपनी से पूरी रकम वसूल ली जाएगी।
घटना वाली रात अमर सिंह अपनी पत्नी को किसी बहाने से उस स्थान पर लेकर गया, जहां उसके साथी पहले से मौजूद थे। वहां मिलकर उन्होंने रीता की हत्या कर दी और शव को सड़क किनारे इस तरह छोड़ दिया कि यह एक सामान्य सड़क दुर्घटना लगे। हत्या के बाद अपने ऊपर शक न आने देने के लिए अमर सिंह ने चालाकी से अगला कदम उठाया। उसने खुद ही पत्नी के लापता होने की सूचना पुलिस को दी। बाद में जब अज्ञात महिला का शव मिलने की खबर सामने आई, तो वह पहचान करने के लिए भी पहुंचा, ताकि खुद को संदेह से दूर रख सके। लेकिन पुलिस की तकनीकी जांच और गहन पूछताछ ने उसकी पूरी योजना को नाकाम कर दिया। मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों ने आरोपियों की गतिविधियों का पूरा सच सामने ला दिया।
हमीरपुर के अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार ने बताया कि आरोपियों पर भारी कर्ज था और बीमा की रकम हासिल करने के लिए ही इस वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से हत्या में इस्तेमाल की गई कार और एक सिम कार्ड भी बरामद किया है। फिलहाल सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है और मामले की जांच जारी है। यह घटना न सिर्फ एक जघन्य अपराध को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि लालच और आर्थिक दबाव किस तरह इंसान को रिश्तों की सारी सीमाएं पार करने पर मजबूर कर सकता है।
