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UKSSSC पेपर लीक घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, हाकम सिंह रावत की ₹63.30 लाख की संपत्ति अटैच l

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) पेपर लीक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी हाकम सिंह रावत की ₹63.30 लाख की चल और अचल संपत्तियों को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने 2016 और 2021 की VDO/VPDO भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक कर उम्मीदवारों से भारी रकम वसूली थी। इस अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए बैंक खातों में नकदी जमा कराई गई और आयकर रिटर्न में फर्जी कृषि आय दर्शाई गई। ED की जांच, SIT की चार्जशीट और कई ठिकानों पर छापेमारी में इस संगठित घोटाले के ठोस सबूत मिले हैं।

Kashish Rai03 अग. 2026, 07:11 PM IST
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UKSSSC पेपर लीक घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, हाकम सिंह रावत की ₹63.30 लाख की संपत्ति अटैच l

उत्तराखंड के चर्चित UKSSSC पेपर लीक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। ED के देहरादून सब-जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत मुख्य आरोपी हाकम सिंह रावत की कुल ₹63.30 लाख की संपत्तियों को अटैच (जब्त) कर लिया है। इन संपत्तियों में चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्तियां शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर अवैध कमाई से खरीदा गया था।


यह मामला वर्ष 2021 में आयोजित स्नातकोत्तर स्तरीय VDO/VPDO परीक्षा के पेपर लीक और इससे पहले वर्ष 2016 की इसी भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ है। ED ने अपनी जांच की शुरुआत रायपुर पुलिस स्टेशन और विजिलेंस विभाग में दर्ज FIR के आधार पर की थी, जिसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में यह सामने आया कि हाकम सिंह रावत ने परीक्षा आयोजित करने वाली प्रिंटिंग एजेंसी M/s RMS टेक्नो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों, कुछ सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया था। इस गिरोह का मुख्य काम गोपनीय प्रश्नपत्रों को परीक्षा से पहले ही लीक करना और इच्छुक उम्मीदवारों को मोटी रकम लेकर उपलब्ध कराना था।


ED के मुताबिक, इस पूरे रैकेट के जरिए हाकम सिंह रावत ने करीब ₹95 लाख की अवैध कमाई की। इस पैसे को वैध दिखाने के लिए आरोपी ने अपने बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा कराया। जब ED ने उसके आयकर रिटर्न (ITR) की जांच की, तो पाया गया कि उसने इस रकम को ‘कृषि आय’ के रूप में दर्शाया था। हालांकि, उसकी वास्तविक कृषि गतिविधियों और आय में भारी अंतर पाया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह एक फर्जी कवर था। जांच में यह भी सामने आया कि इस अवैध कमाई से आरोपी ने कई संपत्तियां खरीदी थीं। इन्हीं संपत्तियों को अब ED ने जब्त कर लिया है। उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा दाखिल चार्जशीट, 14 ठिकानों पर की गई छापेमारी और बैंकिंग लेन-देन की गहन जांच से आरोपी की संलिप्तता पूरी तरह साबित हो चुकी है।


छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों को कई अहम सबूत भी मिले थे, जिनमें डिजिटल डिवाइस, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और बड़ी मात्रा में नकदी शामिल थी। इन सबूतों ने यह साबित किया कि यह कोई छोटा-मोटा घोटाला नहीं, बल्कि एक संगठित और सुनियोजित आपराधिक नेटवर्क था। ED इससे पहले देहरादून की विशेष PMLA अदालत में RMS टेक्नो सॉल्यूशंस के कर्मचारियों, बिचौलियों और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दर्ज कर चुकी है। मामले की जांच अभी भी जारी है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।


इस पूरे घोटाले ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर उन हजारों योग्य उम्मीदवारों के भविष्य पर इसका नकारात्मक असर पड़ा है, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी थी। सरकार और जांच एजेंसियों के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और दोषियों को सख्त सजा मिल सके।