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जोधपुर में वक्फ रिकॉर्ड पर बड़ा बवाल! जजों के सरकारी बंगले से मंदिरों तक की एंट्री पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

क्या सरकारी जजों के बंगले, मंदिर, स्कूल, कॉलेज और नगर निगम की जमीनें भी वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज हो सकती हैं? जोधपुर से सामने आए ऐसे दावों ने राजस्थान में बड़ा कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। मामला मीडिया रिपोर्ट के जरिए हाईकोर्ट तक पहुंचा तो अदालत ने बिना किसी याचिका का इंतजार किए स्वयं संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका (PIL) में बदल दिया और पूरे मामले की न्यायिक जांच शुरू कर दी।

Sonali04 अग. 2026, 06:30 PM IST
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जोधपुर में वक्फ रिकॉर्ड पर बड़ा बवाल! जजों के सरकारी बंगले से मंदिरों तक की एंट्री पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

पूरा मामला जोधपुर में वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को लेकर सामने आए एक विवाद से जुड़ा है। 27 जुलाई 2026 को दैनिक भास्कर के जोधपुर संस्करण में प्रकाशित एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया कि शहर की कई सरकारी, सार्वजनिक, धार्मिक, शैक्षणिक और निजी संपत्तियां राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ के रिकॉर्ड, वक्फ गजट तथा UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज हैं, जबकि राजस्व अभिलेख (Revenue Records) इन संपत्तियों की अलग कानूनी स्थिति दर्शाते हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि न्यायाधीशों के आधिकारिक सरकारी बंगले, गीता भवन, कई मंदिर, सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज, नगर निगम की भूमि, आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां तथा कुछ खसरा नंबर (482, 485 और 490) भी वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज दिखाई दे रहे हैं। इन दावों के सामने आने के बाद मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।

मीडिया रिपोर्ट को गंभीर मानते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना किसी याचिका का इंतजार किए स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लिया और मामले को जनहित याचिका (PIL) के रूप में पंजीकृत करने का आदेश दिया।


हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान क्यों लिया?

4 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कई बड़ी संपत्तियां वक्फ गजट और UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज हैं, जबकि राजस्व रिकॉर्ड अलग स्थिति दर्शाते हैं।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि सार्वजनिक, संस्थागत, धार्मिक, न्यायिक, आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के संबंध में ऐसे विरोधाभास मौजूद हैं, तो यह केवल जमीन का विवाद नहीं बल्कि सार्वजनिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता, वक्फ संपत्तियों के वैध प्रशासन और वक्फ गजट एवं UMEED पोर्टल पर प्रविष्टियां दर्ज करने की प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए व्यापक जनहित को देखते हुए इस मामले की न्यायिक जांच आवश्यक है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उसने यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि संबंधित संपत्तियां अवैध रूप से वक्फ संपत्ति घोषित की गई हैं। अभी केवल रिकॉर्ड की सत्यता और प्रविष्टियों की वैधानिक प्रक्रिया की जांच की जाएगी।


किन संपत्तियों की जांच होगी?

अदालत के समक्ष रखी गई सामग्री के अनुसार जांच के दायरे में शामिल संपत्तियों में—

  • न्यायाधीशों के आधिकारिक सरकारी बंगले

  • गीता भवन

  • कई मंदिर

  • सरकारी एवं निजी स्कूल

  • कॉलेज

  • नगर निगम की भूमि

  • आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां

  • खसरा संख्या 482, 485 और 490

शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि मामला केवल जजों के सरकारी बंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सार्वजनिक, संस्थागत, धार्मिक, आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां भी शामिल हैं। यही कारण है कि अदालत ने इसे व्यापक जनहित का विषय माना।


अदालत ने दिए ये बड़े आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने जांच पूरी होने तक कई महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए—

  • विवादित संपत्तियों पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखी जाएगी।

  • किसी भी संपत्ति का नामांतरण (Mutation) नहीं किया जाएगा।

  • बिक्री, हस्तांतरण, लीज या लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।

  • कोई नया निर्माण या ध्वस्तीकरण नहीं होगा।

  • किसी भी प्रकार से संपत्ति की कानूनी या भौतिक स्थिति नहीं बदली जाएगी।


जिला कलेक्टर और वक्फ बोर्ड को क्या निर्देश मिले?

हाईकोर्ट ने जोधपुर जिला कलेक्टर को निर्देश दिया है कि सभी विवादित खसरा नंबरों का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जाए। प्रत्येक स्थल की वर्तमान स्थिति, उपयोग, फोटोग्राफ और GPS निर्देशांक सहित विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अदालत में पेश की जाए। साथ ही संबंधित सभी राजस्व रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के भी आदेश दिए गए हैं।

इसके अलावा राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को निर्देश दिया गया है कि वे उन सभी मूल रिकॉर्ड, अधिसूचनाओं, सर्वे रिपोर्ट, फाइलों और दस्तावेजों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें जिनके आधार पर संबंधित संपत्तियों को वक्फ गजट में शामिल किया गया और बाद में UMEED पोर्टल पर अपलोड किया गया।

 कानूनी रिपोर्टों से क्या सामने आया?

अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से राजस्व रिकॉर्ड और वक्फ रिकॉर्ड के बीच प्रथम दृष्टया विरोधाभास दिखाई देता है। यदि यह सही पाया जाता है तो इससे सार्वजनिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता, वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

Bar & Bench सहित अन्य कानूनी रिपोर्टों में भी बताया गया है कि अदालत ने इस मामले को केवल निजी भूमि विवाद नहीं माना, बल्कि सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया। अदालत का उद्देश्य फिलहाल किसी पक्ष के दावे को सही या गलत ठहराना नहीं, बल्कि यह पता लगाना है कि संबंधित प्रविष्टियां किस कानूनी प्रक्रिया और किस आधार पर की गईं।


कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

भूमि और वक्फ मामलों के जानकारों के अनुसार, किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज करने के लिए वक्फ कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया, सर्वे, अधिसूचना और वैधानिक आधार आवश्यक होता है। यदि राजस्व रिकॉर्ड और वक्फ रिकॉर्ड में विरोधाभास सामने आता है तो न्यायालय संबंधित रिकॉर्ड, सर्वे रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की जांच कर सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान मामले में अदालत ने अभी किसी भी पक्ष के दावे को सही या गलत नहीं माना है। जांच पूरी होने और सभी रिकॉर्ड अदालत के सामने आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकलेगा।


यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल जोधपुर तक सीमित नहीं रह सकता। यदि जांच में रिकॉर्ड संबंधी अनियमितताएं सामने आती हैं तो राजस्थान में वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड, वक्फ गजट, UMEED पोर्टल और राजस्व अभिलेखों की प्रविष्टियों की व्यापक जांच का रास्ता खुल सकता है। वहीं यदि वक्फ बोर्ड अपने रिकॉर्ड का वैधानिक आधार प्रस्तुत कर देता है तो अदालत उसी के आधार पर आगे निर्णय करेगी।

इस कारण यह मामला राज्य में वक्फ संपत्तियों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक माना जा रहा है।


अभी क्या स्थिति है?

मामला फिलहाल प्रारंभिक जांच के चरण में है। हाईकोर्ट ने किसी भी संपत्ति के स्वामित्व या वक्फ दर्जे पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ से विस्तृत रिकॉर्ड और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।

मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी। इसके बाद अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड, प्रशासन की रिपोर्ट और वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।

केस का नाम

Suo Motu: In Re Illegal Registration of Municipal Properties (including Judges' Bungalows, Geeta Bhawan, Schools, Colleges & Temples as well as Khasra Nos. 482/485/490) as Waqf Assets in Jodhpur