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आयुष ढांचे को मिली बड़ी मजबूती, 12 साल में राज्यों को ₹6,406 करोड़ से अधिक की सहायता

देश में आयुष चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को लगातार वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। आयुष मंत्रालय ने राज्यसभा में जानकारी दी कि सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय होने के कारण नए आयुष संस्थानों, एकीकृत आयुष अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य ढांचों की स्थापना की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। हालांकि केंद्र सरकार राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के माध्यम से राज्यों को वित्तीय सहयोग प्रदान कर रही है, ताकि देशभर में आयुष सेवाओं की पहुंच को मजबूत किया जा सके।

Vindhya Dubey04 अग. 2026, 06:42 PM IST
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आयुष ढांचे को मिली बड़ी मजबूती, 12 साल में राज्यों को ₹6,406 करोड़ से अधिक की सहायता

आयुष मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय आयुष मिशन एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी सहित आयुष प्रणालियों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। मंत्रालय ने बताया कि जिन राज्यों में सरकारी क्षेत्र में आयुष शिक्षण संस्थानों की उपलब्धता कम है, वहां नए आयुष कॉलेज स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा 50, 30 और 10 बिस्तरों वाले एकीकृत आयुष अस्पतालों की स्थापना, पुराने सरकारी आयुष अस्पतालों के उन्नयन और आयुष डिस्पेंसरी के निर्माण एवं सुधार के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

किन-किन कार्यों के लिए दी जा रही मदद?

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत राज्यों को कई प्रकार की गतिविधियों के लिए सहायता मिल सकती है। इनमें नए आयुष कॉलेजों की स्थापना, एकीकृत आयुष अस्पतालों का निर्माण, पुराने सरकारी आयुष अस्पतालों का आधुनिकीकरण, पंचायत और सरकारी सहायता प्राप्त आयुष डिस्पेंसरी का उन्नयन, किराए या जर्जर भवनों में चल रही डिस्पेंसरी के लिए नए भवनों का निर्माण, ऐसे क्षेत्रों में नई आयुष डिस्पेंसरी स्थापित करना जहां आयुष सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) को संचालित करना शामिल है। राज्य सरकारें अपनी वार्षिक कार्ययोजना (State Annual Action Plan-SAAP) के माध्यम से प्रस्ताव भेजकर इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकती हैं।

2014 से 2026 तक ₹6,406.99 करोड़ जारी

आयुष मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल ₹6,40,699.24 लाख यानी लगभग ₹6,406.99 करोड़ की राशि जारी की गई है। यह राशि आयुष बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, अस्पतालों और डिस्पेंसरी के निर्माण तथा अन्य स्वीकृत गतिविधियों के लिए दी गई है।

उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक सहायता

जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक ₹1,06,421.56 लाख यानी लगभग ₹1,064.22 करोड़ की सहायता मिली है। इसके बाद राजस्थान को ₹51,051.27 लाख और मध्य प्रदेश को ₹47,884.45 लाख जारी किए गए हैं। केरल को ₹40,420.12 लाख, तमिलनाडु को ₹30,890.64 लाख, कर्नाटक को ₹28,942.03 लाख और जम्मू-कश्मीर को ₹28,857.50 लाख की सहायता प्राप्त हुई है।

ओडिशा को मिले ₹119.42 करोड़

पूर्वी भारत में आयुष ढांचे को मजबूत करने के संबंध में पूछे गए प्रश्न के जवाब में मंत्रालय ने बताया कि ओडिशा को वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान ₹11,941.69 लाख यानी लगभग ₹119.42 करोड़ की वित्तीय सहायता जारी की गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ओडिशा सहित सभी राज्य राष्ट्रीय आयुष मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार उपयुक्त प्रस्ताव भेजकर अतिरिक्त सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल को भी बड़ी राशि

महाराष्ट्र को इस अवधि में ₹15,379.97 लाख यानी लगभग ₹153.80 करोड़ की सहायता मिली है। गुजरात को ₹18,770.77 लाख और पश्चिम बंगाल को ₹19,736.14 लाख जारी किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश को ₹21,112.90 लाख, उत्तराखंड को ₹22,814.64 लाख और असम को ₹26,133.90 लाख की सहायता प्रदान की गई है।

पूर्वोत्तर राज्यों पर भी विशेष ध्यान

मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि पूर्वोत्तर राज्यों में आयुष सेवाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अरुणाचल प्रदेश को ₹9,890.96 लाख, मणिपुर को ₹9,742.60 लाख, नागालैंड को ₹10,053.31 लाख, मेघालय को ₹8,753.69 लाख और मिजोरम को ₹7,520.62 लाख की सहायता जारी की गई है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी योजना का हिस्सा

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) को भी महत्वपूर्ण घटक बनाया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य आयुष सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ जोड़ा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि लोगों को उनके घर के पास ही निवारक, उपचारात्मक और पुनर्वास संबंधी समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

राज्य सरकारों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण

आयुष मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नए आयुष संस्थानों और अस्पतालों की स्थापना का निर्णय संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। केंद्र सरकार केवल वित्तीय और नीतिगत सहयोग प्रदान करती है। इसलिए किसी भी राज्य में नए आयुष कॉलेज, अस्पताल या डिस्पेंसरी की स्थापना के लिए राज्य सरकारों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत भेजना होता है।

आयुष क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा निवेश

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक दशक में आयुष क्षेत्र में सरकारी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आयुष कॉलेजों, अस्पतालों, अनुसंधान संस्थानों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष सेवाओं के विस्तार से पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को नई मजबूती मिली है। सरकार का फोकस अब केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली के माध्यम से निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने पर भी है। इससे जीवनशैली संबंधी बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पूर्वी भारत में आयुष विस्तार की संभावनाएं

ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में आयुष सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि यदि राज्य सरकारें उपयुक्त परियोजनाएं प्रस्तुत करती हैं तो राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत नए आयुष कॉलेज, अस्पताल और डिस्पेंसरी स्थापित करने के लिए अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। इस पहल से न केवल आयुष चिकित्सा सेवाओं का विस्तार होगा, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में लोगों को सस्ती और पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध हो सकेंगी।