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वधावन पोर्ट बनेगा भारत का नया ट्रेड हब, 298 MMTPA क्षमता से बढ़ेगा EXIM व्यापार

महाराष्ट्र के पालघर जिले में विकसित किया जा रहा वधावन पोर्ट भारत की सबसे बड़ी समुद्री अवसंरचना परियोजनाओं में से एक बनने जा रहा है। 76,220 करोड़ रुपये की लागत वाली इस ग्रीनफील्ड डीप-ड्राफ्ट परियोजना की वार्षिक कार्गो क्षमता 298 मिलियन मीट्रिक टन होगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत के निर्यात-आयात व्यापार को गति मिलेगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर निर्भरता घटेगी और महाराष्ट्र सहित पूरे देश में रोजगार एवं औद्योगिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

Anshuman Mishra04 अग. 2026, 06:44 PM IST
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वधावन पोर्ट बनेगा भारत का नया ट्रेड हब, 298 MMTPA क्षमता से बढ़ेगा EXIM व्यापार
भारत सरकार देश की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के पालघर जिले में विकसित किया जा रहा वधावन पोर्ट भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बंदरगाह परियोजनाओं में से एक बनकर उभर रहा है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार यह एक ऑल-वेदर ग्रीनफील्ड डीप-ड्राफ्ट मेजर पोर्ट होगा, जिसे भविष्य में भारत के समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है। 

केंद्र सरकार ने 19 जून 2024 को इस परियोजना को मंजूरी दी थी, जिसकी अनुमानित लागत 76,220 करोड़ रुपये है। परियोजना पूरी होने के बाद इसकी वार्षिक कार्गो हैंडलिंग क्षमता लगभग 298 मिलियन मीट्रिक टन (MMTPA) होगी, जो इसे भारत के सबसे बड़े और आधुनिक बंदरगाहों में शामिल करेगी। 

सरकार के अनुसार भारत के पश्चिमी तट पर कार्गो और कंटेनर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में बढ़ती मांग को देखते हुए एक ऐसे गहरे समुद्री बंदरगाह की आवश्यकता महसूस की गई जो बड़े अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सीधे संभाल सके। वर्तमान में कई बड़े कंटेनर जहाजों को विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों, विशेष रूप से कोलंबो, सिंगापुर और अन्य अंतरराष्ट्रीय हब का सहारा लेना पड़ता है। वधावन पोर्ट इस निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

परियोजना के तहत केवल बंदरगाह का निर्माण ही नहीं, बल्कि उसे विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी से जोड़ने की भी योजना बनाई गई है। इसके लिए 10.14 किलोमीटर लंबा ब्रेकवॉटर, समुद्री भूमि पुनर्भरण (रिक्लेमेशन), 32.74 किलोमीटर लंबी समर्पित सड़क, 22.22 किलोमीटर लंबी समर्पित रेल लाइन, जल आपूर्ति और बिजली अवसंरचना जैसी कई परियोजनाएं शामिल हैं। 

महाराष्ट्र में बंदरगाह अवसंरचना को मजबूत करने के लिए सरकार अन्य परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। इनमें मुंबई इंटरनेशनल क्रूज़ टर्मिनल का आधुनिकीकरण, पिर पाऊ केमिकल बर्थ, फिश जेट्टी, समुद्री तेल टर्मिनल में ऑटोमेशन सिस्टम तथा विभिन्न जेट्टियों तक सड़क संपर्क जैसी योजनाएं शामिल हैं। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन प्रयासों से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) की क्षमता बढ़कर 175.87 MMTPA और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी की क्षमता 88.66 MMTPA तक पहुंच चुकी है। वहीं महाराष्ट्र के अन्य गैर-प्रमुख बंदरगाहों की संयुक्त क्षमता 130.75 MMTPA हो गई है। 

वधावन पोर्ट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
यह परियोजना केवल एक नया बंदरगाह नहीं है, बल्कि भारत की समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डीप-ड्राफ्ट पोर्ट होने के कारण यहां दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज सीधे आ सकेंगे। इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी, समय की बचत होगी और भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी।

यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और समुद्री क्षेत्र के आधुनिकीकरण जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लक्ष्यों को भी मजबूती देगी। बेहतर सड़क और रेल संपर्क से देश के औद्योगिक क्षेत्रों तक सामान की तेज आवाजाही संभव होगी, जिससे सप्लाई चेन अधिक कुशल बनेगी।

रोजगार और उद्योगों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इतनी बड़ी आधारभूत परियोजना के निर्माण और संचालन से हजारों प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। निर्माण, इंजीनियरिंग, परिवहन, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स, शिपिंग, कस्टम सेवाओं और पोर्ट आधारित उद्योगों में बड़े पैमाने पर रोजगार बढ़ सकता है।

पालघर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास तेज होगा। नए लॉजिस्टिक्स पार्क, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और विनिर्माण इकाइयों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

भारत की अर्थव्यवस्था को क्या होगा लाभ?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनना है तो विश्वस्तरीय बंदरगाहों का विकास बेहद आवश्यक है। वधावन पोर्ट के संचालन से निर्यात-आयात प्रक्रिया अधिक तेज और किफायती होगी। इससे विदेशी निवेश आकर्षित होगा, तटीय शिपिंग को बढ़ावा मिलेगा और भारत की वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।

सरकार का भी कहना है कि यह परियोजना भारत के EXIM (Export-Import) व्यापार को मजबूत करेगी, लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाएगी, विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर निर्भरता कम करेगी, पोर्ट आधारित उद्योगों को बढ़ावा देगी और बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगी। 

कुल मिलाकर वधावन पोर्ट परियोजना केवल महाराष्ट्र के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था, वैश्विक व्यापार, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए एक परिवर्तनकारी कदम मानी जा रही है। यदि यह परियोजना निर्धारित समय और क्षमता के अनुसार पूरी होती है, तो भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत कर सकेगा।