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ग्रामीण स्वच्छता को नई रफ्तार, सरकार ने राज्यसभा में पेश किए SBM-G Phase II के आंकड़े

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-II के तहत पिछले पांच वर्षों में देशभर में 1.47 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए गए हैं। योजना के अंतर्गत पात्र ग्रामीण परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। सरकार का कहना है कि मिशन का उद्देश्य केवल शौचालय बनाना नहीं, बल्कि गांवों को ODF Plus बनाते हुए ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है। आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में सबसे अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है।

Anshuman Mishra04 अग. 2026, 06:44 PM IST
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ग्रामीण स्वच्छता को नई रफ्तार, सरकार ने राज्यसभा में पेश किए SBM-G Phase II के आंकड़े
नई दिल्ली: देश में ग्रामीण स्वच्छता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-II के तहत पिछले पांच वर्षों में 1 करोड़ 47 लाख से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (Individual Household Latrines - IHHL) का निर्माण किया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने राज्यसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से लागू की जा रही है। योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराती है, जबकि शौचालयों के निर्माण और अन्य स्वच्छता परियोजनाओं का क्रियान्वयन संबंधित राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। 

सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच देशभर में कुल 1,47,11,845 व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए गए। इनमें सबसे अधिक निर्माण उत्तर प्रदेश में हुआ, जहां पांच वर्षों में लगभग 49 लाख शौचालय बनाए गए। इसके बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का स्थान रहा। 

क्या है स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-II?
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का दूसरा चरण केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य गांवों को "ओपन डिफिकेशन फ्री प्लस" (ODF Plus) बनाना है। इसके अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक कचरे का निस्तारण, सामुदायिक स्वच्छता परिसर, ग्रे वाटर मैनेजमेंट और गांवों में स्थायी स्वच्छता व्यवस्था विकसित करना शामिल है। इस चरण का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पहले बनाए गए शौचालयों का नियमित उपयोग हो और गांवों में स्वच्छता की व्यवस्था लंबे समय तक बनी रहे। 

पात्र परिवारों को कितनी सहायता मिलती है?
योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय के निर्माण के लिए अधिकतम 12,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है। इस सहायता में हाथ धोने और सफाई के लिए पानी की व्यवस्था भी शामिल होती है। 

किन परिवारों को मिलती है प्राथमिकता?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सबसे पहले गरीबी रेखा से नीचे (BPL) रहने वाले परिवारों को लाभ दिया जाता है। इसके बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजन, भूमिहीन मजदूर, छोटे एवं सीमांत किसान तथा महिला मुखिया वाले परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त वृद्धावस्था पेंशनधारकों, विधवा पेंशनधारकों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, ट्रांसजेंडर समुदाय तथा बालिका कल्याण योजनाओं से जुड़े परिवारों को भी प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है। 

फंड कैसे जारी किए जाते हैं?
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-II के अंतर्गत केंद्र सरकार किसी विशेष परियोजना या केवल शौचालय निर्माण के लिए अलग-अलग धनराशि जारी नहीं करती। राज्यों को उनकी वार्षिक कार्ययोजना (Annual Implementation Plan), पूर्व प्रदर्शन और उपलब्ध बजट के आधार पर राशि आवंटित की जाती है। राज्य अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार शौचालय, सामुदायिक स्वच्छता परिसर और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन जैसी परियोजनाओं पर खर्च कर सकते हैं। 

आंकड़े क्या बताते हैं?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में पूरे देश में लगभग 39 लाख शौचालय बनाए गए, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे अधिक वार्षिक निर्माण रहा। वहीं 2025-26 में लगभग 26.66 लाख शौचालयों का निर्माण दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और ओडिशा लगातार उन राज्यों में शामिल रहे जहां सबसे अधिक निर्माण हुआ। 

यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है?
ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों की उपलब्धता केवल स्वच्छता का विषय नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों के पोषण और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ी हुई है। खुले में शौच से होने वाले जल प्रदूषण, डायरिया, हैजा, टाइफाइड और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा कम होता है। महिलाओं और किशोरियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक स्वच्छता सुविधाएं मिलती हैं। स्कूलों में स्वच्छता सुविधाएं बेहतर होने से बालिकाओं की शिक्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से गांवों में कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण संभव होता है, जिससे जल स्रोतों का संरक्षण, स्वच्छ वातावरण और बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित होता है। यही कारण है कि स्वच्छ भारत मिशन अब केवल शौचालय निर्माण का अभियान न होकर ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने का व्यापक कार्यक्रम बन चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्यों द्वारा शौचालयों के नियमित उपयोग, रखरखाव और अपशिष्ट प्रबंधन पर समान रूप से ध्यान दिया गया तो यह योजना ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य व्यय कम करने, स्वच्छ पर्यावरण बनाने और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सरकार ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-II की प्रगति की लगातार निगरानी SBM(G) इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (IMIS) के माध्यम से की जा रही है और सभी राज्यों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर योजना के कार्यान्वयन का मूल्यांकन किया जाता है।