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आयुष्मान भारत योजना से घटा इलाज का खर्च, 12.69 करोड़ अस्पताल भर्ती का आंकड़ा पार
देश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। योजना के तहत 30 जून 2026 तक 12.69 करोड़ कैशलेस अस्पताल भर्ती (Hospital Admissions) को मंजूरी दी जा चुकी है, जिन पर कुल 1.92 लाख करोड़ रुपये का खर्च हुआ है। सरकार का कहना है कि इस योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को महंगे इलाज का आर्थिक बोझ उठाने से बचाया है और देश में स्वास्थ्य पर जेब से होने वाले खर्च (Out-of-Pocket Expenditure) में उल्लेखनीय कमी आई है।

राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए बताया कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आज दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गुणवत्तापूर्ण और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है ताकि इलाज के अभाव में किसी की जान न जाए और बीमारी के कारण कोई परिवार आर्थिक संकट में न फंस जाए।
क्या है आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना?
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) की शुरुआत देश के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए की गई थी। योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाता है। यह सुविधा माध्यमिक (Secondary Care) और तृतीयक (Tertiary Care) स्तर के अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने के लिए उपलब्ध है। वर्तमान में यह योजना देश के लगभग 12 करोड़ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को कवर करती है, जो भारत की कुल आबादी के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। योजना के अंतर्गत लाभार्थी देशभर में सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में बिना नकद भुगतान किए इलाज करा सकते हैं।
लगातार बढ़ाया गया योजना का दायरा
सरकार ने समय-समय पर इस योजना का विस्तार कर अधिक लोगों को इसके दायरे में शामिल किया है। मार्च 2024 में योजना का विस्तार करते हुए लगभग 37 लाख परिवारों को शामिल किया गया, जिनमें आशा (ASHA) कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी सहायिकाएं शामिल हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इन फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने का उद्देश्य उनके सामाजिक सुरक्षा दायरे को मजबूत करना था। इसके बाद अक्टूबर 2024 में एक और बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, उनकी आय या सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, योजना में शामिल करने की घोषणा की। इस निर्णय से लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों और 4.5 करोड़ परिवारों को लाभ मिलने लगा।
12.69 करोड़ लोगों को मिला कैशलेस इलाज
30 जून 2026 तक योजना के अंतर्गत कुल 12.69 करोड़ अस्पताल भर्ती को मंजूरी दी जा चुकी है। इन सभी उपचारों पर कुल 1.92 लाख करोड़ रुपये का व्यय हुआ है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि लाखों ऐसे परिवारों की कहानी है जिन्हें कैंसर, हृदय रोग, किडनी की बीमारी, दुर्घटना, प्रसूति सेवाओं, सर्जरी और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अपनी जमा-पूंजी खर्च नहीं करनी पड़ी। सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि देश में सार्वजनिक वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की पहुंच तेजी से बढ़ी है और लोगों का भरोसा भी इन योजनाओं पर मजबूत हुआ है।
37 हजार से अधिक अस्पताल जुड़े
योजना के सफल क्रियान्वयन में अस्पतालों के व्यापक नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान में देशभर के 37,413 सरकारी और निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से जुड़े हुए हैं। इस नेटवर्क के माध्यम से लाभार्थियों को अपने राज्य के साथ-साथ कई अन्य राज्यों में भी पोर्टेबिलिटी सुविधा के जरिए इलाज मिल सकता है। यानी यदि कोई पात्र व्यक्ति अपने गृह राज्य से बाहर है, तब भी सूचीबद्ध अस्पताल में कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकता है।
जेब से होने वाला स्वास्थ्य खर्च तेजी से घटा
सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान (National Health Accounts Estimates) 2022-23 का हवाला देते हुए बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों की जेब से होने वाला खर्च लगातार कम हुआ है। वर्ष 2014-15 में कुल स्वास्थ्य व्यय का 62.6 प्रतिशत हिस्सा लोगों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ता था। यह अनुपात वर्ष 2022-23 में घटकर 43.4 प्रतिशत रह गया है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ाए गए निवेश, सरकारी अस्पतालों की क्षमता में सुधार और आयुष्मान भारत जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं ने लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है।
गरीब परिवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
भारत में गंभीर बीमारियों का इलाज अक्सर लाखों रुपये का खर्च मांगता है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने इलाज छोड़ने, कर्ज लेने या संपत्ति बेचने जैसी परिस्थितियां पैदा हो जाती थीं। आयुष्मान भारत योजना ने इस स्थिति में बड़ा बदलाव लाया है। पात्र परिवारों को इलाज के समय अस्पताल में नकद भुगतान नहीं करना पड़ता। इससे न केवल इलाज समय पर शुरू हो जाता है बल्कि परिवार आर्थिक रूप से भी सुरक्षित रहता है। विशेष रूप से कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोसर्जरी, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, नवजात शिशु उपचार, डायलिसिस और अन्य जटिल उपचारों में इस योजना का लाभ लाखों मरीजों को मिल रहा है।
प्रमुख आंकड़े
- 12 करोड़ आर्थिक रूप से कमजोर परिवार योजना के दायरे में
- प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर
- 30 जून 2026 तक 12.69 करोड़ अस्पताल भर्ती
- कुल उपचार मूल्य: 1.92 लाख करोड़ रुपये
- 37,413 सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पताल
- 37 लाख आशा एवं आंगनवाड़ी परिवार मार्च 2024 में शामिल
- 70 वर्ष से अधिक आयु के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक योजना में शामिल
- स्वास्थ्य पर जेब से होने वाला खर्च 62.6% (2014-15) से घटकर 43.4% (2022-23)
डिजिटल व्यवस्था से बढ़ी पारदर्शिता
योजना के संचालन में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है। लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड, अस्पतालों की ऑनलाइन सूची, उपचार की मंजूरी, क्लेम प्रोसेसिंग और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से संचालित होती हैं। इससे फर्जी दावों पर नियंत्रण, उपचार की निगरानी और लाभार्थियों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली है। सरकार का लक्ष्य योजना के दायरे का और विस्तार करना, अस्पतालों की संख्या बढ़ाना तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसके साथ ही डिजिटल हेल्थ मिशन, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और अन्य स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक एकीकृत तथा प्रभावी बनाने पर भी काम किया जा रहा है।
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने स्वास्थ्य बीमा को केवल एक सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि करोड़ों भारतीय परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनाया है। 12.69 करोड़ कैशलेस अस्पताल भर्ती और 1.92 लाख करोड़ रुपये के उपचार इस बात का प्रमाण हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य निवेश का सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। यदि आने वाले वर्षों में योजना का विस्तार और प्रभावी क्रियान्वयन इसी गति से जारी रहता है, तो भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
