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सरकार ने डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को दी नई रफ्तार, 36 हजार से अधिक नई डेयरी समितियां और 21 हजार रोजगार के अवसर

केंद्र सरकार ने डेयरी विकास, पशुधन अवसंरचना, नस्ल सुधार और पशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत 36,611 नई डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया गया है, जबकि 168 लाख लीटर प्रतिदिन की दूध शीतकरण क्षमता विकसित की गई है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत 17.27 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान, आधुनिक IVF लैब और नस्ल सुधार कार्यक्रमों से करोड़ों किसानों को लाभ मिला है। वहीं राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत 4,291 परियोजनाओं को मंजूरी देकर लगभग 21 हजार प्रत्यक्ष रोजगार और 91 हजार किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार ने पशु रोग नियंत्रण और राष्ट्रीय स्तर पर आपदा तैयारी को भी मजबूत किया है, जिससे डेयरी क्षेत्र अधिक सुरक्षित, आधुनिक और लाभकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Anshuman Mishra04 अग. 2026, 07:04 PM IST
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सरकार ने डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को दी नई रफ्तार, 36 हजार से अधिक नई डेयरी समितियां और 21 हजार रोजगार के अवसर

नई दिल्ली, 4 अगस्त 2026: भारत के डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को आत्मनिर्भर, आधुनिक और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। लोकसभा में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने जानकारी दी कि सरकार डेयरी अवसंरचना, पशुधन नस्ल सुधार, ग्रामीण उद्यमिता और पशु रोग नियंत्रण पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार का उद्देश्य केवल दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि, पशुओं की बेहतर सेहत और पूरे डेयरी क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि दूध खरीद मूल्य (Procurement Price) डेयरी सहकारी समितियां और निजी डेयरियां बाजार की स्थिति के अनुसार तय करती हैं। सरकार के अनुसार अब तक ऐसा कोई आधिकारिक मामला सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि किसानों को खुदरा और खरीद मूल्य के अंतर के कारण उचित भुगतान नहीं मिल रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में दूध मूल्य निर्धारण को और अधिक पारदर्शी बनाने तथा किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग और बेहतर बाजार व्यवस्था की आवश्यकता बनी रहेगी।

राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (National Programme for Dairy Development - NPDD) के तहत जून 2026 तक देशभर में 36,611 नई डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया गया है, जबकि 34,557 गांव स्तर की डेयरी समितियों को मजबूत बनाया गया है। इसके अलावा लगभग 168 लाख लीटर प्रतिदिन की दूध शीतकरण क्षमता विकसित की गई है तथा 76,748 दूध गुणवत्ता परीक्षण उपकरण वितरित किए गए हैं। इससे किसानों का दूध सुरक्षित रहेगा, गुणवत्ता बेहतर होगी और उपभोक्ताओं तक अधिक स्वच्छ दूध पहुंच सकेगा।

सरकार ने पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (Animal Husbandry Infrastructure Development Fund - AHIDF) के माध्यम से 418 लाख लीटर प्रतिदिन की दूध प्रसंस्करण एवं वैल्यू एडिशन क्षमता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसका अर्थ है कि भविष्य में अधिक मात्रा में दूध से पनीर, घी, दही, मक्खन और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे, जिससे किसानों और डेयरी उद्योग दोनों की आय बढ़ने की संभावना है।

देशी नस्लों के संरक्षण और दूध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय गोकुल मिशन (Rashtriya Gokul Mission) के तहत बड़े स्तर पर नस्ल सुधार का कार्य जारी है। पिछले पांच वर्षों में 17.27 करोड़ से अधिक कृत्रिम गर्भाधान किए गए, जिससे लगभग 5.98 करोड़ किसानों को लाभ मिला। इसके साथ ही 47,687 ग्रामीण कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों (MAITRIs) को प्रशिक्षित किया गया, 24 इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रयोगशालाएं स्थापित की गईं, 48 सीमेन स्टेशन स्वीकृत किए गए और 28 हीफर रियरिंग सेंटर स्थापित किए गए। ये सभी प्रयास भविष्य में अधिक दूध देने वाली स्वस्थ पशु नस्लों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission) के अंतर्गत 4,084 ब्रीड मल्टीप्लिकेशन फार्म स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा 1.61 लाख मीट्रिक टन गुणवत्तापूर्ण चारा बीज का उत्पादन किया गया तथा 204 साइलेज और टोटल मिक्स्ड रेशन इकाइयों को मंजूरी दी गई। गुणवत्तापूर्ण चारा पशुओं के पोषण में सुधार करेगा, जिससे दूध उत्पादन और पशुओं की उत्पादकता दोनों बढ़ेंगी।

पशु रोगों की रोकथाम के लिए सरकार ने खुरपका-मुंहपका (Foot and Mouth Disease), ब्रूसेलोसिस, पेस्टे दे पेटिट्स रूमिनेंट्स (PPR) और क्लासिकल स्वाइन फीवर जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान जारी रखा है। साथ ही जून-जुलाई 2026 में मध्य प्रदेश में आयोजित 'पशुजन्य युद्ध अभ्यास' (Pashujanya Yudh Abhyas) के माध्यम से जूनोटिक रोगों यानी जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों से निपटने की राष्ट्रीय तैयारी को भी मजबूत किया गया। इस अभ्यास में रोग निगरानी, प्रयोगशाला क्षमता, जैव सुरक्षा, आपदा प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत 4,291 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत लगभग 2,956.79 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं पर 1,356.53 करोड़ रुपये की सब्सिडी स्वीकृत की गई है। सरकार का अनुमान है कि इससे लगभग 21,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे और करीब 91,000 किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल पोर्टल और पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के माध्यम से संचालित की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका डेयरी व्यवसाय पर निर्भर करती है। बेहतर नस्ल, आधुनिक डेयरी अवसंरचना, गुणवत्तापूर्ण चारा, रोग नियंत्रण और मूल्यवर्धित उत्पादों का विस्तार किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। पशु रोगों पर नियंत्रण से आर्थिक नुकसान कम होगा, दूध की गुणवत्ता बेहतर होगी और निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राज्यों के सहयोग से जारी रहा तो आने वाले वर्षों में भारत का डेयरी क्षेत्र अधिक तकनीक आधारित, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बन सकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश के पशुपालकों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।