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200 बेड से कम वाले सरकारी अस्पतालों में अब महिला SHG तैयार करेंगी मरीजों का भोजन

महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 4 अगस्त 2026 को जारी शासन निर्णय (GR) के माध्यम से राज्य के 200 बेड से कम क्षमता वाले सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए भोजन सेवा स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups-SHGs) के माध्यम से संचालित करने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला महाराष्ट्र महिला नीति-2024 के अनुरूप लिया गया है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर प्रदान करना है।

Vindhya Dubey04 अग. 2026, 07:04 PM IST
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200 बेड से कम वाले सरकारी अस्पतालों में अब महिला SHG तैयार करेंगी मरीजों का भोजन

नई व्यवस्था के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्य प्रदर्शन की नियमित समीक्षा होगी। खराब गुणवत्ता, भोजन वितरण में लापरवाही या अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। लगातार खराब प्रदर्शन की स्थिति में संबंधित समूह का अनुबंध समाप्त कर प्रतीक्षा सूची में शामिल अगले पात्र महिला स्वयं सहायता समूह को तत्काल कार्यादेश जारी किया जाएगा, ताकि अस्पतालों में भोजन सेवा बिना किसी बाधा के जारी रहे।


 लगातार खराब प्रदर्शन पर होगी सख्त कार्रवाई

शासन निर्णय के अनुसार, महिला स्वयं सहायता समूह पर लगाए गए दंड की राशि संबंधित माह के देयक (बिल) से काटकर वसूल की जाएगी। यदि लगातार दो महीनों में लगाया गया कुल दंड संबंधित माह के बिल की 15 प्रतिशत राशि से अधिक हो जाता है, तो इसे "लगातार खराब कार्य प्रदर्शन" (Persistent Poor Performance) माना जाएगा। ऐसी स्थिति में जिला स्तरीय समिति संबंधित महिला स्वयं सहायता समूह को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी और अपना पक्ष रखने का अवसर देगी। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो समिति अनुबंध समाप्त करने की सिफारिश करेगी। अनुबंध समाप्त होने पर प्रतीक्षा सूची में मेरिट के आधार पर अगले पात्र महिला स्वयं सहायता समूह को तुरंत कार्यादेश दिया जाएगा, जिससे मरीजों की भोजन सेवा प्रभावित न हो।


दो नई समितियों का गठन

सरकार ने इस व्यवस्था के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए दो समितियों के गठन का निर्णय लिया है-

1. जिला स्तरीय आहार सेवा चयन एवं निगरानी समिति

2. विभागीय स्तर आहार सेवा कार्यप्रदर्शन पुनरावलोकन समिति

इन समितियों की जिम्मेदारियां, संरचना और कार्यप्रणाली भी शासन निर्णय में विस्तार से तय की गई है।


जिला स्तरीय समिति की क्या होगी जिम्मेदारी?

जिला स्तरीय समिति महिला स्वयं सहायता समूहों के पैनलीकरण, आवेदन की जांच, पात्रता सत्यापन, अंकन (स्कोरिंग), चयन प्रक्रिया और कार्यादेश जारी करने का काम करेगी। इसके अलावा समिति नियमित रूप से भोजन सेवा का निरीक्षण करेगी, कार्य प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगी, अनुबंध की शर्तों के पालन की निगरानी करेगी, शिकायतों का निवारण करेगी और आवश्यक होने पर दंडात्मक कार्रवाई या अनुबंध समाप्त करने की सिफारिश भी करेगी।


विभागीय समिति करेगी त्रैमासिक समीक्षा

विभागीय स्तर की समिति पूरे विभाग के अंतर्गत आने वाली सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं में संचालित आहार सेवा की गुणवत्ता की निगरानी करेगी। समिति प्रत्येक तीन महीने में कार्य प्रदर्शन की समीक्षा करेगी और आवश्यकता पड़ने पर सुधारात्मक उपाय सुझाएगी। साथ ही भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा, पोषण मानकों, समय पर भोजन वितरण, मरीजों की संतुष्टि, वित्तीय एवं प्रशासनिक अभिलेखों की जांच तथा अनुबंध की शर्तों के पालन का मूल्यांकन करेगी। यदि आवश्यक हुआ तो यह समिति दंडात्मक कार्रवाई या अनुबंध समाप्त करने की भी सिफारिश कर सकेगी।


समितियों में कौन-कौन होंगे शामिल?

  • जिला स्तरीय समिति: समिति के अध्यक्ष जिला शल्य चिकित्सक होंगे। सदस्य सचिव के रूप में निवासी वैद्यकीय अधिकारी (बाह्य संपर्क) कार्य करेंगे। समिति में संबंधित स्वास्थ्य संस्था के वैद्यकीय अधीक्षक, महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नति अभियान (MSRLM) के जिला अभियान प्रबंधक, जिला अस्पताल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी तथा आहार विशेषज्ञ सदस्य होंगे। जरूरत पड़ने पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी अथवा अन्य विशेषज्ञ अधिकारियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया जा सकेगा।

  • विभागीय स्तर की समिति: इस समिति के अध्यक्ष उपसंचालक, आरोग्य सेवा होंगे। सदस्य सचिव के रूप में सहायक संचालक (वैद्यकीय) कार्य करेंगे। समिति में विभाग के सभी जिलों के जिला शल्य चिकित्सक, निवासी वैद्यकीय अधिकारी (बाह्य संपर्क), उपसंचालक कार्यालय के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी तथा सभी जिला आहार विशेषज्ञ सदस्य होंगे। आवश्यकता पड़ने पर विषय विशेषज्ञों एवं तकनीकी अधिकारियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकेगा।

बैठकें कब होंगी?

जिला स्तरीय समिति आवश्यकतानुसार बैठक करेगी। वहीं विभागीय स्तर की समिति प्रत्येक तीन महीने में कम से कम एक बार बैठक कर कार्यप्रदर्शन की समीक्षा करेगी।

चयन प्रक्रिया कैसे होगी?

जिला स्तर पर प्राप्त सभी आवेदनों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन, अंकन और पात्र महिला स्वयं सहायता समूहों का चयन किया जाएगा। इसके बाद चयनित समूहों को कार्यादेश जारी किया जाएगा तथा भोजन सेवा की नियमित निगरानी की जाएगी। यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


विभागीय समिति किन बिंदुओं पर करेगी समीक्षा?

विभागीय समिति जिला स्तरीय रिपोर्टों का अध्ययन करेगी और निम्न बिंदुओं का मूल्यांकन करेगी-

  • भोजन की गुणवत्ता
  • स्वच्छता
  • खाद्य सुरक्षा
  • पोषण मानकों का पालन
  • समय पर भोजन वितरण
  • मरीजों की संतुष्टि
  • वित्तीय एवं प्रशासनिक रिकॉर्ड
  • अनुबंध की शर्तों का पालन

इन सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद समिति आवश्यक सुधारात्मक सुझाव देगी तथा आवश्यकता पड़ने पर दंडात्मक कार्रवाई या अनुबंध समाप्त करने की सिफारिश करेगी।


बहुमत से होंगे निर्णय

शासन निर्णय के अनुसार दोनों समितियों के निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाएंगे। विभागीय समिति की सिफारिशें और निर्णय संबंधित जिला स्तरीय समिति के लिए बाध्यकारी होंगे तथा उनका पालन जिला स्तर पर सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार ने निर्देश दिया है कि चयन प्रक्रिया को समझाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए पूर्व प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन कार्यशालाएं आयोजित की जाएं, ताकि सभी समूह पारदर्शी तरीके से चयन प्रक्रिया में भाग ले सकें। महिला स्वयं सहायता समूहों के चयन की पूरी प्रक्रिया जिला स्तर पर जिला शल्य चिकित्सक की अध्यक्षता में संपन्न होगी। इसके बाद संबंधित उपसंचालक (परिमंडल) की मंजूरी प्राप्त कर अंतिम कार्यादेश जारी किए जाएंगे।


इस पूरी व्यवस्था पर होने वाला खर्च सार्वजनिक आरोग्य विभाग के विभिन्न बजटीय लेखाशीर्षों—221000146, 22104624, 22100315, 22100226, 22104259 तथा 22100413—के अंतर्गत "19-आहार सेवा" मद में उपलब्ध अनुदान से किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह शासन निर्णय वित्त विभाग के 17 अप्रैल 2015 के वित्तीय अधिकार नियम पुस्तिका, 1978 (भाग-1, उपभाग-2, क्रमांक-4, नियम-7) के तहत सार्वजनिक आरोग्य विभाग को प्राप्त प्रशासनिक अधिकारों का उपयोग करते हुए जारी किया गया है।


शासन निर्णय के अनुसार यह व्यवस्था राज्य के 200 से कम बिस्तरों वाले सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने, सेवा की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने तथा खराब प्रदर्शन करने वाले सेवा प्रदाताओं के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई करने के उद्देश्य से लागू की गई है।