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कल्याण-डोंबिवली में स्वाइन फ्लू की दस्तक, दो मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट; निजी अस्पताल पर सूचना नहीं देने का आरोप
महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के दो मरीज मिलने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। दोनों मरीजों का इलाज कल्याण के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। इस बीच कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) के स्वास्थ्य अधिकारियों ने गंभीर आरोप लगाया है कि संबंधित निजी अस्पताल ने इन मरीजों की जानकारी समय पर महानगरपालिका को उपलब्ध नहीं कराई। संक्रामक रोगों के मामलों में समय पर रिपोर्टिंग नहीं होने से संक्रमण की निगरानी और रोकथाम की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, इसलिए प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।

त्रों के अनुसार, स्वाइन फ्लू के दोनों मरीजों का उपचार जारी है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हालांकि मरीजों की पहचान और अन्य चिकित्सीय विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। मामले की जानकारी मिलते ही KDMC के स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अस्पताल से रिपोर्ट तलब करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी अस्पताल ने संक्रामक रोगों की अनिवार्य रिपोर्टिंग के नियमों का पालन नहीं किया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि संक्रामक रोगों के प्रत्येक पुष्ट मामले की जानकारी स्थानीय प्रशासन तक तुरंत पहुंचना बेहद आवश्यक है। इससे संक्रमित मरीज के संपर्क में आए लोगों की पहचान, आवश्यक जांच, निगरानी और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए समय पर कदम उठाए जा सकते हैं। यदि रिपोर्टिंग में देरी होती है तो संक्रमण के सामुदायिक स्तर पर फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
घटना के बाद KDMC प्रशासन ने शहर के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग जल्द ही सभी स्वास्थ्य संस्थानों को दोबारा निर्देश जारी कर सकता है कि स्वाइन फ्लू सहित किसी भी संक्रामक बीमारी के संदिग्ध या पुष्ट मामलों की सूचना तत्काल महानगरपालिका को भेजना अनिवार्य है। इसके अलावा अस्पतालों में आइसोलेशन सुविधाओं, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और दवा उपलब्धता की भी समीक्षा की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा ए (एच1एन1) वायरस से होने वाला संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या निकट संपर्क में आने से फैलता है। मानसून और मौसम में बदलाव के दौरान इसके मामलों में वृद्धि देखी जाती है। संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं, जिनमें तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, नाक बहना और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं। कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने पर यह संक्रमण निमोनिया जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण भी बन सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि बुजुर्ग, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, मधुमेह, हृदय रोग, अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में स्वाइन फ्लू का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों को फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच करानी चाहिए और चिकित्सकीय सलाह के बिना दवा लेने से बचना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क रहें। यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ या फ्लू जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में जांच कराएं। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनने, हाथों को बार-बार साबुन से धोने, छींकते या खांसते समय मुंह और नाक ढंकने तथा संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचने की सलाह दी गई है। बीमार होने पर सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचना भी संक्रमण रोकने का प्रभावी उपाय माना जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र के कई शहरों में मानसून के दौरान स्वाइन फ्लू के मामले सामने आते रहे हैं। इसी वजह से राज्य का स्वास्थ्य विभाग हर वर्ष निगरानी प्रणाली को सक्रिय रखता है और सरकारी व निजी अस्पतालों को संक्रमण की रिपोर्टिंग, जांच और उपचार संबंधी दिशा-निर्देश जारी करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, उचित उपचार और सख्त निगरानी से संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। फिलहाल कल्याण-डोंबिवली में मिले दोनों मरीजों का इलाज जारी है और KDMC पूरे मामले की जांच कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक रिपोर्ट पर सभी की नजर बनी हुई है।
