health

ICMR का बजट ₹4,000 करोड़; रिसर्च, AI और मेडटेक इनोवेशन पर सरकार का फोकस

भारत में स्वास्थ्य अनुसंधान को मजबूत करने और चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए फंडिंग बढ़ाने के साथ-साथ शोध अनुदान प्रणाली में बदलाव, अत्याधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने और मेडिकल इनोवेशन के लिए नई योजनाओं की शुरुआत की है।

Vindhya Dubey04 अग. 2026, 07:05 PM IST
खबर शेयर करें:
ICMR का बजट ₹4,000 करोड़; रिसर्च, AI और मेडटेक इनोवेशन पर सरकार का फोकस

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में निवेश को लगातार बढ़ाया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) का बजट वित्त वर्ष 2024-25 के ₹2,732.13 करोड़ से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 में ₹4,000 करोड़ कर दिया गया है। यह वृद्धि स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान क्षमता बढ़ाने, नई दवाओं और वैक्सीन के विकास, मेडिकल डिवाइस निर्माण, डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी और उन्नत उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।

ICMR फंडिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव

सरकार ने स्वास्थ्य अनुसंधान को अधिक प्रभावी और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ICMR की शोध अनुदान व्यवस्था को नए तरीके से तैयार किया है। अब शोध परियोजनाओं को उनकी जरूरत, जोखिम, विकास के स्तर और मरीजों तक पहुंचने की क्षमता के आधार पर आर्थिक सहायता दी जाएगी। नई व्यवस्था में शुरुआती शोध से लेकर बड़े स्तर के क्लिनिकल ट्रायल और अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों तक के लिए अलग-अलग स्तर पर फंडिंग उपलब्ध कराई जाएगी। ICMR ने शोधकर्ताओं के लिए कई नई श्रेणियां बनाई हैं:

  • ANVESHAN ग्रांट: छोटे और शुरुआती स्तर के अनुसंधानों को बढ़ावा देने के लिए ₹2 करोड़ तक की सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य नए विचारों और प्रारंभिक वैज्ञानिक खोजों को आगे बढ़ाना है।
  • NISCHAYAK ANVESHAN ग्रांट: ऐसे शोध जिनमें प्रारंभिक सफलता के बाद आगे विकास की संभावना हो, उन्हें ₹2 करोड़ से ₹8 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
  • First-in-the-World Challenge: ऐसी खोजों और तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए यह योजना शुरू की गई है, जिनमें वैश्विक स्तर पर पहली बार कुछ नया विकसित करने की क्षमता हो। इसके तहत चरणबद्ध तरीके से ₹8 करोड़ तक की सहायता दी जाएगी।
  • Centres for Advanced Research (CAR): उच्च स्तरीय और बड़े प्रभाव वाले अनुसंधान केंद्रों को विकसित करने के लिए ₹15 करोड़ तक का समर्थन दिया जाएगा।

मेडिकल कॉलेजों में रिसर्च क्षमता बढ़ाने की पहल

सरकार ने देश के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में शोध संस्कृति को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। इसके लिए कई रणनीतिक कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। Top-Tier Global Leadership Funding Scheme के माध्यम से देश के शीर्ष मेडिकल संस्थानों को वैश्विक स्तर के रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं ICMR और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की संयुक्त पहल के तहत मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शोध परियोजनाओं को सहायता दी जा रही है। इसमें कौशल आधारित चिकित्सा शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली के तीन केंद्रीय सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंट्राम्यूरल रिसर्च को मजबूत करने के लिए विशेष पहल शुरू की गई है।

मेडिकल टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी

भारत में मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार ने MAHA-MedTech पहल शुरू की है। अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF), ICMR और गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य देश में आधुनिक मेडिकल तकनीकों का विकास करना है। इसके तहत:

  • महंगे विदेशी मेडिकल उपकरणों पर निर्भरता कम करना
  • स्वदेशी तकनीकों का विकास करना
  • मरीजों के लिए किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना

जैसे लक्ष्यों पर काम किया जाएगा। ICMR ने देश में चिकित्सा क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लगभग 100 प्राथमिकता वाले मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक तकनीकों की पहचान की है। इन तकनीकों के विकास से कैंसर, हृदय रोग, संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद मिलने की उम्मीद है।

AI, जीन थेरेपी और रोबोटिक्स पर बढ़ा ध्यान

स्वास्थ्य अनुसंधान को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए ICMR ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, सेल थेरेपी और जीन थेरेपी जैसे क्षेत्रों में कई परियोजनाओं को समर्थन दिया है। ICMR के अनुसार फ्रंटियर टेक्नोलॉजी से जुड़ी 22 परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें:

  • कैंसर उपचार के लिए CAR-T सेल थेरेपी
  • रोबोटिक्स आधारित टारगेटेड थेरेपी
  • कार्डियक मसाज तकनीक
  • आधुनिक डेंटल उपचार तकनीक

जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा 97 स्वदेशी मेडिकल डिवाइस और डायग्नोस्टिक तकनीकों के विकास में सहायता दी गई है। 11 तकनीकों की लागत कम करने के प्रयास भी किए गए हैं। First-in-the-World Challenge के तहत 60 से अधिक नवाचार परियोजनाओं को समर्थन मिला है, जिससे भारत में नए वैज्ञानिक समाधान विकसित करने को बढ़ावा मिल रहा है।

बायोफार्मा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ₹10,000 करोड़ की योजना

सरकार ने देश के बायोफार्मास्युटिकल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए Biopharma SHAKTI योजना की घोषणा की है। इस योजना के लिए पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत:

  • बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना
  • क्लिनिकल ट्रायल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना
  • उद्योग, वैज्ञानिक संस्थानों और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना
  • घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित करना

जैसे क्षेत्रों पर काम किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह पहल भारत को वैश्विक बायोफार्मा हब बनाने में मदद करेगी और भविष्य में AI आधारित दवाओं, एडवांस्ड थेरेपी और प्रिसीजन मेडिसिन जैसी तकनीकों को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

स्वास्थ्य अनुसंधान में बढ़ता निवेश भारत को केवल इलाज उपलब्ध कराने वाले देश से आगे बढ़ाकर नई चिकित्सा खोजों और तकनीकों के निर्माणकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ICMR की बढ़ी हुई फंडिंग, मेडिकल टेक्नोलॉजी विकास, AI आधारित समाधान और बायोफार्मा क्षेत्र में निवेश से आने वाले वर्षों में देश में नई दवाओं, वैक्सीन और उपचार तकनीकों के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाए।