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NFHS-6 में बड़ा बदलाव: एनीमिया के आंकड़े अब ICMR के 'गोल्ड स्टैंडर्ड' सर्वे से होंगे जारी

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि NFHS-6 की फैक्ट शीट में केवल प्रमुख स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से जुड़े संकेतकों को शामिल किया गया है, जबकि एनीमिया (Anaemia) के आंकड़े अब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा किए जा रहे स्वतंत्र सर्वेक्षण के आधार पर जारी किए जाएंगे। इस सर्वेक्षण में हीमोग्लोबिन की जांच के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड मानी जाने वाली इंट्रावेनस (Intravenous) परीक्षण पद्धति का उपयोग किया जा रहा है।

Vindhya Dubey04 अग. 2026, 07:07 PM IST
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NFHS-6 में बड़ा बदलाव: एनीमिया के आंकड़े अब ICMR के 'गोल्ड स्टैंडर्ड' सर्वे से होंगे जारी

राज्यसभा में लिखित उत्तर देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय नियमित रूप से राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) आयोजित करता है। यह सर्वेक्षण देश में स्वास्थ्य, पोषण, परिवार कल्याण, जनसंख्या, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रजनन दर, परिवार नियोजन, महिलाओं के सशक्तिकरण, बीमारियों और स्वास्थ्य सेवाओं सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की स्थिति का व्यापक आकलन करता है। NFHS-6 का राष्ट्रीय तथा राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों का फैक्ट शीट 29 मई 2026 को जारी किया गया था। हालांकि इस बार फैक्ट शीट में शामिल किए जाने वाले संकेतकों को पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सीमित रखा गया है।

तकनीकी सलाहकार समिति ने तय किए संकेतक

सरकार ने बताया कि NFHS-6 की फैक्ट शीट में शामिल किए जाने वाले संकेतकों को तकनीकी सलाहकार समिति (Technical Advisory Committee-TAC) की सिफारिशों के आधार पर अंतिम रूप दिया गया। इस समिति में कई मंत्रालयों और सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे, जिनमें पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय, नीति आयोग तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग सहित अन्य संस्थान शामिल थे। समिति ने सुझाव दिया कि सरकार की डेटा हार्मोनाइजेशन (Data Harmonisation) पहल के अनुरूप ही संकेतकों का चयन किया जाए, ताकि अलग-अलग सरकारी स्रोतों से जारी होने वाले आंकड़ों में किसी प्रकार की विसंगति या विरोधाभास न रहे।

क्या है डेटा हार्मोनाइजेशन?

डेटा हार्मोनाइजेशन का उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा एक ही विषय पर जारी किए जाने वाले आंकड़ों को एक समान मानकों के अनुरूप तैयार करना है। इससे नीति निर्माण, योजनाओं की निगरानी और शोध कार्यों में अधिक विश्वसनीय एवं एकरूप डेटा उपलब्ध हो सकेगा। सरकार का मानना है कि यदि विभिन्न स्रोतों से अलग-अलग आंकड़े सामने आते हैं, तो इससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है। इसलिए NFHS-6 की फैक्ट शीट को केवल प्रमुख और प्रमाणित संकेतकों तक सीमित रखा गया है।

एनीमिया के आंकड़े क्यों होंगे अलग?

सरकार ने बताया कि एनीमिया के आंकड़ों को लेकर व्यापक विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया गया कि भविष्य में एनीमिया की व्यापकता (Prevalence) के आंकड़े भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के स्वतंत्र सर्वेक्षण के आधार पर जारी किए जाएंगे। इस सर्वेक्षण में हीमोग्लोबिन की जांच के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड मानी जाने वाली इंट्रावेनस परीक्षण तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक पारंपरिक फील्ड-आधारित जांच विधियों की तुलना में अधिक सटीक परिणाम देती है। इस निर्णय का उद्देश्य एनीमिया के वास्तविक बोझ का अधिक वैज्ञानिक और विश्वसनीय आकलन करना है, जिससे भविष्य की पोषण एवं स्वास्थ्य नीतियों को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके।

क्यों महत्वपूर्ण है NFHS?

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण भारत में स्वास्थ्य और जनसंख्या संबंधी सबसे व्यापक सर्वेक्षणों में से एक है। इसके आंकड़ों का उपयोग केंद्र और राज्य सरकारें स्वास्थ्य योजनाओं, पोषण कार्यक्रमों, महिला एवं बाल विकास नीतियों, परिवार नियोजन कार्यक्रमों तथा सामाजिक कल्याण योजनाओं के निर्माण और मूल्यांकन में करती हैं। NFHS के आंकड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, एनीमिया मुक्त भारत, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों सहित कई प्रमुख योजनाओं के लिए आधार का काम करते हैं।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का कहना है कि NFHS-6 में किए गए बदलावों का उद्देश्य आंकड़ों की गुणवत्ता बढ़ाना, विभिन्न सरकारी स्रोतों में एकरूपता सुनिश्चित करना और नीति निर्माण के लिए अधिक विश्वसनीय डेटा उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से एनीमिया जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे पर वैज्ञानिक रूप से अधिक सटीक आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए ICMR के गोल्ड स्टैंडर्ड सर्वेक्षण को अपनाया गया है।