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728 फर्जी लोन से बैंक को करोड़ों का नुकसान, CBI कोर्ट ने सुनाई कड़ी सजा

चेन्नई की सीबीआई विशेष अदालत ने एसबीआई की चेंगम शाखा से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में दो पूर्व बैंक अधिकारियों समेत आठ दोषियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर 20 लाख से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया।

Neha Sharma05 अग. 2026, 04:50 PM IST
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728 फर्जी लोन से बैंक को करोड़ों का नुकसान, CBI कोर्ट ने सुनाई कड़ी सजा

चेन्नई: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत, चेन्नई ने एक चर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले में आठ दोषियों को दस-दस वर्ष के कठोर कारावास (रिगोरस इम्प्रिजनमेंट) की सजा सुनाई है। दोषियों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की चेंगम शाखा के दो तत्कालीन अधिकारी और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं। अदालत ने सभी दोषियों पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया है। अदालत ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक एन. गोपालकृष्णन, ग्रामीण विपणन एवं रिकवरी अधिकारी पी. बालामुरली तथा निजी आरोपी आर. वेंकटरमण, एस. रवि और डी. शंकर पर 50-50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं आर. राजन, पी. पन्नीरसेल्वम और टी. मुरुगन पर 20-20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।


क्या था पूरा मामला?

सीसाबीआई के अनुर यह मामला 23 सितंबर 2011 को भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक, रीजन-5, चेंगलपट्टू की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। जांच में आरोप सामने आया कि अक्टूबर 2007 से मई 2008 के बीच एसबीआई की चेंगम शाखा के तत्कालीन अधिकारियों ने एक निजी डेयरी इकाई के संचालक और अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर बैंक धोखाधड़ी को अंजाम दिया। जांच में पाया गया कि एम/एस कंथम्मा मिल्क चिलिंग प्लांट के साथ त्रिपक्षीय व्यवस्था के तहत 728 डेयरी ऋण स्वीकृत किए गए, जिनकी कुल राशि लगभग 2.33 करोड़ रुपये थी। आरोप है कि इन ऋणों के लिए फर्जी आवेदन, जाली दस्तावेज और कथित उधारकर्ताओं के नाम पर गलत जानकारी का इस्तेमाल किया गया। साथ ही ऋण स्वीकृति से पहले और बाद में अपनाई जाने वाली अनिवार्य बैंकिंग प्रक्रियाओं का पालन भी नहीं किया गया।


बैंक को हुआ लगभग दो करोड़ रुपये का नुकसान

सीबीआई की जांच के अनुसार इस कथित धोखाधड़ी के कारण भारतीय स्टेट बैंक को 1.97 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ। जांच पूरी होने के बाद 25 जून 2013 को दस आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। वर्ष 2016 में अदालत ने आरोप तय किए और मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान दो आरोपियों, कंथम्मा मिल्क चिलिंग प्लांट के मालिक के. पुरुषोत्तमन और एसबीआई के तत्कालीन डिप्टी मैनेजर के. रविचंद्रन का निधन हो गया, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।


अदालत ने सुनाई सजा

लंबी न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने आठ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए दोषियों पर लाखों रुपये का जुर्माना भी लगाया।


बैंकिंग व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण फैसला

विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि फर्जी दस्तावेजों, मिलीभगत और वित्तीय अनियमितताओं के माध्यम से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा। ऐसे मामलों में दोषसिद्धि बैंकिंग क्षेत्र में विश्वास बनाए रखने और भविष्य में वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।