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बच्चों के पोषण की अब होगी रियल-टाइम मॉनिटरिंग, सरकार ने मजबूत किया पोषण ट्रैकर

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि 'पोषण ट्रैकर' (Poshan Tracker) मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण स्थिति की रियल-टाइम निगरानी का प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म बन गया है। इस ऐप के जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियां, बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग, हॉट कुक्ड मील, टेक-होम राशन और अन्य सेवाओं का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा रहा है। सरकार ने डेटा की सटीकता बढ़ाने के लिए 'सपोर्टिव सुपरविजन मॉड्यूल' भी जोड़ा है। पिछले पांच वर्षों में 1.29 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में विकसित किया गया है।

Vindhya Dubey05 अग. 2026, 08:02 PM IST
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बच्चों के पोषण की अब होगी रियल-टाइम मॉनिटरिंग, सरकार ने मजबूत किया पोषण ट्रैकर
नई दिल्ली: भारत में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल तकनीक का दायरा और मजबूत किया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) ने बताया कि 'पोषण ट्रैकर' (Poshan Tracker) अब मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 (Mission Saksham Anganwadi and Poshan 2.0) के तहत पोषण सेवाओं की निगरानी, बच्चों की वृद्धि, आंगनवाड़ी गतिविधियों और लाभार्थियों तक पहुंचने वाली सेवाओं की लगभग रियल-टाइम मॉनिटरिंग का प्रमुख डिजिटल माध्यम बन चुका है।

राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने जानकारी दी कि पोषण ट्रैकर एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में कुपोषण (Stunting), दुबलापन (Wasting), कम वजन (Underweight) और अन्य पोषण संकेतकों की निगरानी की जाती है। इसके साथ ही यह मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं के प्रभाव का मूल्यांकन करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

क्या है पोषण ट्रैकर?
पोषण ट्रैकर एक राष्ट्रीय डिजिटल एप्लिकेशन है जिसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों को डिजिटल रूप से जोड़ना और लाभार्थियों से संबंधित जानकारी को एकीकृत करना है। इस प्लेटफॉर्म पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता स्मार्टफोन के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों का डेटा दर्ज करती हैं। इससे सरकार को देशभर में पोषण कार्यक्रमों की स्थिति का लगभग वास्तविक समय (Near Real-Time) में आकलन करने में मदद मिलती है।

किन सेवाओं की होती है निगरानी?
पोषण ट्रैकर के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के खुलने और संचालन, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) गतिविधियां, बच्चों की लंबाई और वजन की नियमित माप, हॉट कुक्ड मील (HCM) वितरण, टेक-होम राशन (THR) वितरण और अन्य पोषण सेवाओं की डिजिटल निगरानी की जाती है।

इससे संबंधित डेटा तुरंत उपलब्ध होने के कारण राज्य और केंद्र सरकार समय पर निर्णय ले सकती हैं और जहां जरूरत हो वहां अतिरिक्त संसाधन या विशेष हस्तक्षेप किए जा सकते हैं।

डेटा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नया फीचर
सरकार ने पोषण ट्रैकर में "सपोर्टिव सुपरविजन मॉड्यूल" नामक नया डिजिटल फीचर भी जोड़ा है। यह मॉड्यूल पर्यवेक्षक (Supervisor), बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) और जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) को वास्तविक समय में आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली की निगरानी करने में मदद करता है। इससे डेटा की सटीकता बढ़ी है और निगरानी व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनी है।

1.29 लाख से अधिक सक्षम आंगनवाड़ी
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत देशभर में 1,29,415 आंगनवाड़ी केंद्रों को "सक्षम आंगनवाड़ी" के रूप में विकसित किया गया है। इन केंद्रों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं, डिजिटल उपकरण, पोषण सेवाएं और बच्चों के समग्र विकास के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बच्चों की वृद्धि की वैज्ञानिक निगरानी
मिशन पोषण 2.0 के तहत प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र को चार महत्वपूर्ण ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इनमें शिशुओं की लंबाई मापने के लिए इन्फैन्टोमीटर, बच्चों की ऊंचाई मापने के लिए स्टैडियोमीटर, शिशुओं का वजन मापने के लिए डिजिटल शिशु वजन मशीन और मां एवं बच्चों का वजन मापने के लिए अलग डिजिटल वजन मशीन शामिल हैं।

इन उपकरणों से प्राप्त सभी आंकड़े आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सीधे पोषण ट्रैकर ऐप पर दर्ज करती हैं। इसके लिए केंद्र सरकार स्मार्टफोन और इंटरनेट रिचार्ज की सुविधा भी उपलब्ध कराती है, जबकि ग्रोथ मॉनिटरिंग उपकरणों के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लागत साझेदारी के आधार पर वित्तीय सहायता दी जाती है।

मिशन पोषण 2.0 क्या है?
मिशन पोषण 2.0 वर्ष 2021 में शुरू किया गया एक एकीकृत राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम है, जिसमें पहले से चल रही पोषण अभियान, सक्षम आंगनवाड़ी और पूरक पोषण कार्यक्रम जैसी योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, छह वर्ष तक के बच्चों और किशोरियों में कुपोषण को कम करना, बेहतर पोषण सुनिश्चित करना और स्वस्थ भारत के लक्ष्य को गति देना है।

यह योजना सतत विकास लक्ष्य (SDG-2: Zero Hunger और SDG-3: Good Health and Well-being) को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह पहल क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां बच्चों में कुपोषण, कम वजन और अवरुद्ध वृद्धि (Stunting) जैसी समस्याएं लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार देश में लाखों बच्चे अभी भी पोषण संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

ऐसे में पोषण ट्रैकर सरकार को वास्तविक समय में यह पहचानने में सक्षम बनाता है कि किन क्षेत्रों में कुपोषण अधिक है, किन बच्चों को अतिरिक्त पोषण सहायता की जरूरत है और कहां सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की आवश्यकता है। इससे योजनाओं का प्रभाव बढ़ता है, संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और लाभार्थियों तक समय पर सहायता पहुंचती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा आधारित निर्णय (Data-Driven Governance) भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों की सबसे बड़ी आवश्यकता है। पोषण ट्रैकर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो केवल आंकड़े एकत्र करने का माध्यम नहीं बल्कि देश में कुपोषण के खिलाफ वैज्ञानिक, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था तैयार करने का आधार बन रहा है।

डिजिटल निगरानी, रियल-टाइम डेटा, बेहतर सुपरविजन और सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों के विस्तार के साथ भारत कुपोषण के खिलाफ अपनी लड़ाई को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह पहल आने वाले वर्षों में बच्चों के स्वास्थ्य, मातृ पोषण और मानव संसाधन विकास पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।