health

भारत में गोद लेने की प्रक्रिया हुई पूरी तरह डिजिटल, CARA ने बढ़ाई पारदर्शिता

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने मिशन वात्सल्य पोर्टल के एडॉप्शन मॉड्यूल के माध्यम से गोद लेने की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है। देश की सभी स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों (SAAs) को CARINGS–Mission Vatsalya प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे आवेदन, बच्चे का मिलान, दस्तावेजों का सत्यापन और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एवं पारदर्शी तरीके से पूरी होगी। देशभर में 795 SAAs स्वीकृत हैं और एडॉप्शन रेगुलेशंस 2022 के तहत तय समय-सीमा में मामलों के निस्तारण की निगरानी की जा रही है।

Vindhya Dubey05 अग. 2026, 08:03 PM IST
खबर शेयर करें:
भारत में गोद लेने की प्रक्रिया हुई पूरी तरह डिजिटल, CARA ने बढ़ाई पारदर्शिता
नई दिल्ली: भारत में बच्चों को गोद लेने (Adoption) की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (Central Adoption Resource Authority-CARA) ने मिशन वात्सल्य (Mission Vatsalya) पोर्टल के अंतर्गत एडॉप्शन मॉड्यूल और एकीकृत CARINGS–Mission Vatsalya डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पूरी गोद लेने की प्रक्रिया को एंड-टू-एंड डिजिटल बना दिया है। इसका उद्देश्य अनावश्यक देरी कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और हर चरण की ऑनलाइन निगरानी सुनिश्चित करना है।

राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि देश की सभी स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों (Specialised Adoption Agencies-SAAs) को CARINGS–Mission Vatsalya प्रणाली से अनिवार्य रूप से जोड़ा गया है। अब आवेदन, बच्चे का रेफरल, मिलान (Matching), दस्तावेजों का सत्यापन और पूरी दत्तक प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है।

क्या है CARA?
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली वैधानिक संस्था है। यह भारत में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को विनियमित (Regulate) करती है और यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक गोद लेने की प्रक्रिया बच्चे के सर्वोत्तम हित (Best Interest of the Child) को ध्यान में रखकर पूरी की जाए।

CARA हेग कन्वेंशन (Hague Convention on Intercountry Adoption) के अनुरूप देश में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं का समन्वय भी करता है।

किस कानून के तहत होती है गोद लेने की प्रक्रिया?
भारत में दत्तक ग्रहण मुख्य रूप से दो कानूनों के तहत किया जाता है—
  • किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 (Juvenile Justice Act, 2015)
  • हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (HAMA)

JJ Act के तहत अनाथ, परित्यक्त और समर्पित (Surrendered) बच्चों को बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee-CWC) कानूनी रूप से गोद लेने योग्य (Legally Free for Adoption) घोषित करती है। इसके बाद ही बच्चे को दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।

क्यों लगता है गोद लेने में समय?
सरकार के अनुसार, दत्तक ग्रहण में प्रतीक्षा अवधि का सबसे बड़ा कारण गोद लेने के इच्छुक अभिभावकों (Prospective Adoptive Parents-PAPs) की संख्या का उपलब्ध बच्चों की तुलना में अधिक होना है। इसके अलावा कई अभिभावक किसी विशेष राज्य, आयु वर्ग या लिंग के बच्चे को प्राथमिकता देते हैं, जिससे प्रतीक्षा अवधि बढ़ सकती है।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानूनी रूप से गोद लेने योग्य घोषित बच्चों को संस्थानों में लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता, क्योंकि ऑनलाइन रेफरल प्रणाली के माध्यम से उनके लिए उपयुक्त परिवारों की पहचान तेजी से की जाती है।

देशभर में 795 स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियां
29 जुलाई 2026 तक मिशन वात्सल्य के तहत देशभर में 795 स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों (SAAs) को स्वीकृति दी जा चुकी है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रत्येक जिले में कम से कम एक SAA स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन एजेंसियों के संचालन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए मिशन वात्सल्य के तहत वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है।

क्या है CARINGS–Mission Vatsalya प्रणाली?
CARINGS (Child Adoption Resource Information and Guidance System) भारत का केंद्रीय डिजिटल दत्तक ग्रहण प्लेटफॉर्म है। इसे अब मिशन वात्सल्य पोर्टल के साथ एकीकृत कर दिया गया है। इसके माध्यम से आवेदन, दस्तावेज सत्यापन, बच्चे का रेफरल, मिलान, न्यायिक प्रक्रिया और पोस्ट-एडॉप्शन फॉलोअप तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होती है।

इस प्रणाली में केंद्र और राज्य सरकारें रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से सभी मामलों की निगरानी कर सकती हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और अनावश्यक देरी कम होती है।

समय-सीमा भी तय
गोद लेने की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022 के अनुसूची-14 (Schedule XIV) में प्रत्येक संबंधित संस्था और अधिकारी के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। CARA नियमित रूप से राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठकें कर यह सुनिश्चित करता है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी हों।

यह पहल क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में हजारों बच्चे ऐसे हैं जिन्हें पारिवारिक वातावरण की आवश्यकता है, जबकि बड़ी संख्या में दंपति और परिवार बच्चों को गोद लेना चाहते हैं। पहले लंबी कागजी प्रक्रिया, दस्तावेजों की देरी और अलग-अलग स्तरों पर समन्वय की कमी के कारण दत्तक ग्रहण में कई महीने या कभी-कभी वर्षों का समय लग जाता था।

पूरी प्रक्रिया के डिजिटल होने से आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकेगी, दस्तावेजों का सत्यापन तेज होगा, एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम होगी। इससे बच्चों को जल्दी परिवार मिलेगा और इच्छुक अभिभावकों का इंतजार भी कम हो सकेगा।

बच्चों के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बच्चे के लिए संस्थागत देखभाल की तुलना में पारिवारिक वातावरण अधिक सुरक्षित और बेहतर होता है। यही कारण है कि किशोर न्याय अधिनियम भी संस्थागत देखभाल के बजाय परिवार आधारित देखभाल (Family-Based Care) को प्राथमिकता देता है।

डिजिटल CARINGS–Mission Vatsalya प्रणाली इसी सोच को मजबूत करती है। यह न केवल दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाती है, बल्कि प्रत्येक बच्चे के सर्वोत्तम हित, सुरक्षा और भविष्य को केंद्र में रखकर कार्य करती है।

सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित यह सुधार भारत की दत्तक ग्रहण व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और आधुनिक बनाएगा। मिशन वात्सल्य के तहत डिजिटल निगरानी, रियल-टाइम ट्रैकिंग और सभी एजेंसियों के एकीकृत नेटवर्क से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हर कानूनी रूप से गोद लेने योग्य बच्चे को जल्द से जल्द एक सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और स्थायी परिवार मिल सके।