health

ऑनलाइन बाल यौन शोषण पर केंद्र का बड़ा एक्शन, POCSO और IT नियमों से सुरक्षा हुई मजबूत

केंद्र सरकार ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण और शोषणकारी सामग्री (OCSAE/CSEAM) पर रोक लगाने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, MeitY और गृह मंत्रालय के सहयोग से व्यापक कानूनी और तकनीकी ढांचा तैयार किया है। POCSO Act, भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और आईटी नियम 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री हटाने, डीपफेक और AI आधारित कंटेंट पर कार्रवाई तथा साइबर अपराधों की त्वरित रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है। सरकार ने 'सहयोग' पोर्टल, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, I4C, CERT-In और ISEA जागरूकता अभियान के माध्यम से बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने के प्रयास तेज किए हैं।

Vindhya Dubey05 अग. 2026, 08:06 PM IST
खबर शेयर करें:
ऑनलाइन बाल यौन शोषण पर केंद्र का बड़ा एक्शन, POCSO और IT नियमों से सुरक्षा हुई मजबूत

नई दिल्ली: डिजिटल दुनिया के तेजी से विस्तार के साथ बच्चों के सामने ऑनलाइन यौन शोषण (Online Child Sexual Abuse), साइबर बुलिंग, अश्लील सामग्री, फर्जी पहचान (Identity Theft), डीपफेक और एआई आधारित अपराध जैसी नई चुनौतियां भी तेजी से बढ़ी हैं। इन खतरों से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक कानूनी, तकनीकी और संस्थागत ढांचा तैयार किया है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और गृह मंत्रालय (MHA) ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में मिलकर ऐसी समन्वित व्यवस्था विकसित की है, जिसका उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण और डिजिटल अपराधों से सुरक्षित रखना, अवैध सामग्री पर त्वरित कार्रवाई करना तथा इंटरनेट को अधिक सुरक्षित, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाना है।

राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि सरकार की यह व्यवस्था केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि रोकथाम, निगरानी, जागरूकता, त्वरित शिकायत निवारण और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी समान रूप से केंद्रित है।

POCSO कानून देता है मजबूत कानूनी सुरक्षा
बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए वर्ष 2012 में लागू संरक्षण ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (POCSO) अधिनियम ऑनलाइन अपराधों को भी स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में रखता है इस कानून की धारा 11 और 12 के तहत किसी बच्चे को ऑनलाइन अश्लील संदेश भेजना, यौन टिप्पणी करना, बार-बार यौन उद्देश्य से संपर्क करना या अश्लील सामग्री दिखाना दंडनीय अपराध है।

धारा 13 बच्चों का अश्लील सामग्री (Child Pornography/Child Sexual Abuse Material) तैयार करने या उपयोग करने को अपराध घोषित करती है। पहली बार दोषी पाए जाने पर कम से कम पांच वर्ष की कैद और जुर्माने का प्रावधान है, जबकि दोबारा अपराध करने पर न्यूनतम सात वर्ष की सजा हो सकती है।

इसके अलावा धारा 15 बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री को अपने पास रखने, साझा करने या रिपोर्ट न करने पर भी सजा का प्रावधान करती है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) ने और मजबूत किया कानून
नई भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 ने भी ऑनलाइन अश्लील सामग्री और बच्चों से जुड़े अपराधों के खिलाफ कानूनी ढांचे को और सख्त बनाया है। धारा 294 इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री के प्रसार को अपराध मानती है, जबकि धारा 295 बच्चों को अश्लील सामग्री उपलब्ध कराने या दिखाने पर प्रतिबंध लगाती है।

आईटी एक्ट और आईटी नियमों की बड़ी भूमिका
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों की जिम्मेदारी तय करते हैं।इन नियमों के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों को बच्चों के लिए हानिकारक सामग्री हटाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

यदि किसी उपयोगकर्ता की शिकायत में किसी बच्चे से जुड़ी अश्लील सामग्री, यौन कृत्य, पूर्ण या आंशिक नग्नता या AI से बनाई गई मॉर्फ्ड अश्लील तस्वीरें शामिल हों, तो प्लेटफॉर्म को दो घंटे के भीतर ऐसी सामग्री हटानी या उसकी पहुंच रोकनी होगी।

डीपफेक और AI सामग्री पर भी सख्ती
सरकार ने आईटी नियमों में संशोधन कर डीपफेक, AI से तैयार फर्जी वीडियो और अन्य सिंथेटिक कंटेंट (Synthetic Generated Information-SGI) पर भी सख्ती बढ़ाई है। यदि सक्षम न्यायालय या सरकार का अधिकृत विभाग किसी सामग्री को अवैध घोषित करता है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म को तीन घंटे के भीतर उसे हटाना होगा। इस कदम का उद्देश्य बच्चों के खिलाफ एआई आधारित यौन शोषण, फर्जी वीडियो और डिजिटल ब्लैकमेल जैसे अपराधों पर रोक लगाना है।

'Sahyog' पोर्टल से तेज होगी कार्रवाई
सरकार ने 'सहयोग' (Sahyog) पोर्टल भी शुरू किया है, जिसके माध्यम से सरकारी एजेंसियां सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों को अवैध सामग्री हटाने के लिए तुरंत नोटिस भेज सकती हैं। यह पोर्टल विशेष रूप से Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) जैसी सामग्री के खिलाफ तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है।

साइबर अपराध की शिकायत कहां करें?
गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) नागरिकों को बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों सहित सभी प्रकार के साइबर अपराधों की ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देता है।इसके अलावा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर ऐसे मामलों की जांच और रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

स्कूलों में भी बढ़ाई जा रही जागरूकता
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल सुरक्षा एवं सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि यदि किसी छात्र के साथ साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, यौन हिंसा या अन्य गंभीर घटना होती है तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दी जाए और दोबारा ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

NCPCR की भी सक्रिय भूमिका
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) लगातार I4C और MeitY के साथ मिलकर ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों पर कार्य कर रहा है। आयोग ने 'Being Safe Online', स्कूल सुरक्षा मैनुअल और 2024 में 'स्कूल बच्चों के लिए साइबर बुलिंग रोकथाम दिशानिर्देश' जैसे कई दस्तावेज तैयार किए हैं। इनके माध्यम से बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूलों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान
सरकार की सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (ISEA) परियोजना के तहत अब तक देशभर में 6,650 से अधिक जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें 11.37 लाख से अधिक छात्र, शिक्षक, पुलिस अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और आम नागरिक शामिल हुए हैं।

इसके अलावा CERT-In समय-समय पर डीपफेक, साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देश, पोस्टर, वीडियो और एडवाइजरी जारी करता है।

यह पहल क्यों महत्वपूर्ण है?
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की बढ़ती मौजूदगी के साथ ऑनलाइन ग्रूमिंग, साइबर बुलिंग, ब्लैकमेल, अश्लील सामग्री, डीपफेक और यौन शोषण जैसे अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे अपराध बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, आत्मविश्वास और भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सख्त कानून पर्याप्त नहीं हैं। बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों में डिजिटल साक्षरता, साइबर सुरक्षा की समझ और समय पर शिकायत दर्ज कराने की जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।

सरकार द्वारा बनाया गया यह बहु-स्तरीय सुरक्षा ढांचा कानून, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर निगरानी, डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और जन-जागरूकता को एक साथ जोड़ता है। इससे न केवल ऑनलाइन बाल यौन शोषण के मामलों में तेजी से कार्रवाई संभव होगी, बल्कि भविष्य में ऐसे अपराधों की रोकथाम भी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

यह पहल बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने, इंटरनेट पर उनकी निजता और गरिमा की रक्षा करने तथा भारत को अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल समाज की दिशा में आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।