finance
रेपो रेट में लगातार चौथी बार कोई बदलाव नहीं, RBI ने 5.25% पर रखा बरकरार; 2026-27 की विकास दर का अनुमान बढ़ाया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर संतुलित और सतर्क रुख अपनाते हुए लगातार चौथी बार प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। बुधवार को आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee-MPC) की बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह घोषणा की। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति का रुख भी 'तटस्थ' (Neutral) बनाए रखा, जिससे संकेत मिलता है कि भविष्य में ब्याज दरों में कोई भी बदलाव पूरी तरह महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा।

आरबीआई के इस फैसले का सीधा असर करोड़ों बैंक ग्राहकों, उद्योग जगत और निवेशकों पर पड़ेगा। फिलहाल होम लोन, ऑटो लोन और अन्य ऋण लेने वालों की ईएमआई में कोई बदलाव नहीं होगा, क्योंकि रेपो रेट स्थिर रहने से बैंकों की उधारी लागत में तत्काल कोई परिवर्तन नहीं आएगा।
क्यों नहीं बदली गई रेपो रेट?
आरबीआई का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय मजबूत स्थिति में है, लेकिन वैश्विक स्तर पर अभी भी कई अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। अमेरिका और यूरोप की आर्थिक स्थिति, भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बदलाव जैसी चुनौतियां भविष्य में असर डाल सकती हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति का उद्देश्य आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद ही ब्याज दरों को लेकर कोई अगला निर्णय लिया जाएगा।
विकास दर का अनुमान बढ़ाया
आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि बेहतर मानसून, मजबूत ग्रामीण मांग, सेवा क्षेत्र का विस्तार, सार्वजनिक निवेश और निजी निवेश में सुधार से आर्थिक विकास को गति मिलेगी। कृषि क्षेत्र में अच्छी उत्पादन संभावनाएं, विनिर्माण गतिविधियों में सुधार और सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूती को भी विकास दर बढ़ाने के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। आरबीआई का कहना है कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
महंगाई पर राहत
आरबीआई ने महंगाई को लेकर भी राहत भरा अनुमान जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई का मानना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता, बेहतर कृषि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार से महंगाई नियंत्रित रह सकती है। हालांकि मौसम में बदलाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अभी भी जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसलिए केंद्रीय बैंक पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
बैंक ग्राहकों पर क्या होगा असर?
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से फिलहाल बैंकों के लिए आरबीआई से कर्ज लेने की लागत पहले जैसी रहेगी। इसका मतलब है कि अधिकांश बैंकों की होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन और एमएसएमई ऋण की ब्याज दरों में तत्काल बदलाव की संभावना नहीं है। जिन ग्राहकों के लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर हैं, उनकी ईएमआई फिलहाल स्थिर रहने की उम्मीद है। वहीं नए ऋण लेने वाले ग्राहकों को भी फिलहाल ब्याज दरों में किसी बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उद्योग जगत को मिला स्थिरता का संदेश
रेपो रेट को स्थिर रखने के फैसले को उद्योग जगत के लिए भी सकारात्मक माना जा रहा है। ब्याज दरों में स्थिरता से कंपनियों को निवेश और विस्तार की योजनाएं बनाने में आसानी होगी। एमएसएमई, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों को भी इससे राहत मिलेगी क्योंकि वित्तीय लागत में अचानक बढ़ोतरी का जोखिम फिलहाल टल गया है।
पॉलिमर (प्लास्टिक) नोटों पर बड़ा ऐलान
मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान आरबीआई ने देश में पॉलिमर यानी प्लास्टिक नोटों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। केंद्रीय बैंक ने बताया कि वित्त वर्ष 2027-28 तक कम मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों का परीक्षण शुरू किया जा सकता है। प्रारंभिक चरण में 10 रुपये, 20 रुपये और 50 रुपये के पॉलिमर नोट जारी किए जा सकते हैं। यदि परीक्षण सफल रहता है तो भविष्य में इनका दायरा बढ़ाया जा सकता है।
क्यों लाए जा रहे हैं प्लास्टिक नोट?
पॉलिमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं। ये पानी, नमी और गंदगी से जल्दी खराब नहीं होते तथा इनकी आयु भी कई गुना अधिक होती है। इससे बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता कम होगी और लंबे समय में लागत में कमी आएगी। इसके अलावा पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर जोड़ना आसान होता है, जिससे नकली नोटों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिल सकती है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और कई अन्य देश पहले से ही पॉलिमर मुद्रा का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं।
आगे क्या रहेगा आरबीआई का फोकस?
आरबीआई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आगे की मौद्रिक नीति पूरी तरह आर्थिक आंकड़ों पर आधारित होगी। यदि महंगाई नियंत्रित रहती है और आर्थिक विकास मजबूत बना रहता है तो ब्याज दरों में स्थिरता जारी रह सकती है। वहीं यदि वैश्विक परिस्थितियां बिगड़ती हैं या महंगाई फिर बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का मौजूदा फैसला बाजारों को स्थिरता का संदेश देता है। विकास दर बढ़ाने और महंगाई का अनुमान घटाने से यह भी संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत स्थिति में बनी हुई है।
