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जंतर-मंतर पर EPS-95 पेंशनर्स का प्रदर्शन, न्यूनतम पेंशन 7,500 रुपये और महंगाई भत्ते की मांग तेज

कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के पेंशनभोगियों ने बुधवार को राष्ट्रीय संघर्ष समिति (National Agitation Committee – NAC) के नेतृत्व में राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन किया। देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों पेंशनर्स ने न्यूनतम मासिक पेंशन बढ़ाने, महंगाई भत्ता (डीए) लागू करने, मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और लंबे समय से लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 03:01 PM IST
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जंतर-मंतर पर EPS-95 पेंशनर्स का प्रदर्शन, न्यूनतम पेंशन 7,500 रुपये और महंगाई भत्ते की मांग तेज

प्रदर्शन में शामिल पेंशनर्स का कहना था कि वर्तमान में अधिकांश EPS-95 लाभार्थियों को बेहद कम पेंशन मिल रही है, जिससे बढ़ती महंगाई के दौर में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि कई पेंशनभोगियों को प्रतिमाह एक हजार से तीन हजार रुपये तक ही पेंशन मिल रही है, जो आज की आर्थिक परिस्थितियों में पर्याप्त नहीं है।

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?

राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग न्यूनतम मासिक पेंशन 7,500 रुपये निर्धारित करने की है। इसके साथ महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) जोड़ने की मांग की गई ताकि बढ़ती महंगाई के अनुसार पेंशन में समय-समय पर वृद्धि हो सके। पेंशनर्स ने यह भी मांग की कि सभी EPS-95 पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी को आयुष्मान भारत जैसी व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा या मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि अधिकांश बुजुर्ग पेंशनभोगी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और कम पेंशन के कारण निजी अस्पतालों में इलाज कराना संभव नहीं हो पाता। इसके अलावा परिवार पेंशन, विधवा पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों को भी मजबूत करने की मांग उठाई गई।

जंतर-मंतर पर क्यों उतरे पेंशनर्स?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले लगभग एक दशक से अपनी मांगों को लेकर लगातार सरकार के समक्ष ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। राष्ट्रीय संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार ने कई बार उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया। इसी कारण देशभर के पेंशनर्स ने एक बार फिर जंतर-मंतर पर एकजुट होकर प्रदर्शन किया।

कई सांसदों ने भी दिया समर्थन

प्रदर्शन के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के कई सांसद भी मौके पर पहुंचे और पेंशनर्स की मांगों का समर्थन किया। प्रदर्शन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले, ठाणे से सांसद नरेश म्हस्के, कल्याण से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे तथा मावल से सांसद श्रीरंग बारणे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी चर्चा का विषय रही। सांसदों ने कहा कि लंबे समय से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और सरकार को उनके सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

क्या है EPS-95 योजना?

कर्मचारी पेंशन योजना (Employees' Pension Scheme – EPS-95) की शुरुआत 1995 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत की गई थी। इस योजना का उद्देश्य संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद नियमित मासिक पेंशन उपलब्ध कराना है। इस योजना में कर्मचारी और नियोक्ता के अंशदान का एक हिस्सा पेंशन फंड में जमा किया जाता है। सेवानिवृत्ति के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार लाभार्थियों को मासिक पेंशन मिलती है। हालांकि बड़ी संख्या में पेंशनभोगियों का कहना है कि वर्तमान पेंशन राशि आज की जीवन-यापन लागत के मुकाबले बेहद कम है।

पेंशनर्स की नाराजगी की वजह

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में महंगाई, दवाइयों, इलाज, बिजली, खाद्यान्न और दैनिक जरूरतों का खर्च लगातार बढ़ा है, लेकिन EPS-95 पेंशन में उसी अनुपात में कोई वृद्धि नहीं हुई। उनका कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य खर्च सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है और कम पेंशन के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय संघर्ष समिति का कहना है कि यदि सरकार न्यूनतम पेंशन बढ़ाने, महंगाई भत्ता देने और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने जैसे फैसले लेती है, तो लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी।

सरकार से जल्द निर्णय की मांग

प्रदर्शन के अंत में समिति ने केंद्र सरकार से मांग की कि EPS-95 पेंशनर्स की लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। समिति ने कहा कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो देशभर में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। देश के विभिन्न राज्यों से आए पेंशनर्स ने एक स्वर में कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास में योगदान दिया है, इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सम्मानजनक पेंशन और बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिलनी चाहिए। 


क्या बार-बार प्रदर्शन ही बनता जा रहा है आखिरी विकल्प?

पिछले कुछ वर्षों में किसानों, छात्रों, कर्मचारियों और अब EPS-95 पेंशनर्स सहित विभिन्न वर्ग अपनी मांगों को लेकर लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं। किसानों ने MSP और कृषि नीतियों, छात्रों ने भर्ती और पेपर लीक, कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) तथा अब पेंशनर्स न्यूनतम पेंशन, महंगाई भत्ता और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन तेज किए हैं। EPS-95 पेंशनर्स का कहना है कि वे पिछले लगभग दस वर्षों से ज्ञापन और बैठकों के जरिए अपनी मांगें उठाते रहे, लेकिन समाधान नहीं मिलने के कारण उन्हें बार-बार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का अधिकार है, लेकिन लगातार बढ़ते आंदोलनों से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या शिकायतों के समाधान और संवाद की मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त प्रभावी है। उनका मानना है कि समयबद्ध निर्णय और नियमित संवाद से ऐसे बार-बार होने वाले प्रदर्शनों की आवश्यकता कम हो सकती है।