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दूध उत्पादन में यूपी नंबर-1, अब कॉन्क्लेव-2026 से डेयरी सेक्टर को मिलेगी नई दिशा
उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास विभाग अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर वर्ष 2026 में 'कॉन्क्लेव-2026' आयोजित करेगा। देश के कुल लगभग 248 मिलियन मीट्रिक टन दूध उत्पादन में 38.8 मिलियन मीट्रिक टन योगदान के साथ उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। इस आयोजन का उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, किसानों की आय, महिला सशक्तिकरण और आधुनिक डेयरी अवसंरचना को बढ़ावा देना है।

लखनऊ: देश के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक राज्य के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर चुके उत्तर प्रदेश में अब डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर वर्ष 2026 में राज्यभर में विशेष कार्यक्रमों और 'कॉन्क्लेव-2026' का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य केवल स्वर्ण जयंती मनाना नहीं, बल्कि प्रदेश के डेयरी क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, मूल्य संवर्धन, सहकारी मॉडल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए भविष्य की रणनीति तैयार करना है।
दुग्ध आयुक्त बलदेव सिंह ने विभागीय अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी जिलों को कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वर्ण जयंती वर्ष को डेयरी क्षेत्र में नवाचार, निवेश और किसानों की भागीदारी बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के अनुसार वर्ष 2024-25 में देश का कुल दूध उत्पादन लगभग 248 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 38.8 मिलियन मीट्रिक टन है, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 16 प्रतिशत है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश लगातार देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की सफलता के पीछे बड़ी पशुधन आबादी, ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी का व्यापक प्रसार, दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार और दूध की बढ़ती मांग प्रमुख कारण हैं। राज्य में लाखों छोटे और सीमांत किसान खेती के साथ-साथ डेयरी व्यवसाय से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। यही मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) का मानना है कि डेयरी केवल कृषि का पूरक व्यवसाय नहीं बल्कि ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ है। बोर्ड लगातार संगठित दुग्ध संग्रह, गुणवत्ता नियंत्रण, कोल्ड चेन और डिजिटल डेयरी प्रबंधन को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उत्तर प्रदेश इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाता है तो राज्य न केवल उत्पादन बल्कि दुग्ध प्रसंस्करण और निर्यात के क्षेत्र में भी अग्रणी बन सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई अवसरों पर कहा है,
"डेयरी क्षेत्र भारत के करोड़ों छोटे किसानों और महिलाओं की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।"
वहीं केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने हाल के कार्यक्रमों में कहा है कि,
"भारत का लक्ष्य केवल अधिक दूध उत्पादन नहीं, बल्कि गुणवत्ता, वैल्यू एडिशन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी मजबूत करना है।"
उत्तर प्रदेश सरकार भी डेयरी क्षेत्र में डिजिटल भुगतान, पशु स्वास्थ्य सेवाएं, कृत्रिम गर्भाधान, पशु टीकाकरण, दुग्ध संग्रह केंद्रों के विस्तार और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो इससे ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
कॉन्क्लेव-2026 के दौरान डेयरी विशेषज्ञों, सहकारी संस्थाओं, निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स, पशुपालकों और नीति निर्माताओं के बीच संवाद की संभावना है। इसमें आधुनिक डेयरी तकनीक, पशु पोषण, नस्ल सुधार, जलवायु परिवर्तन का डेयरी क्षेत्र पर प्रभाव, दूध की गुणवत्ता, निर्यात क्षमता और मूल्य संवर्धित उत्पादों पर विशेष चर्चा हो सकती है। इससे उत्तर प्रदेश के डेयरी सेक्टर के लिए अगले दशक की विकास रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा, पशु चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता, दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता, कोल्ड स्टोरेज, बाजार तक पहुंच और किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि इन चुनौतियों का समाधान किया जाता है, तो उत्तर प्रदेश वैश्विक डेयरी उद्योग में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
दूध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश के सामने उत्पादकता बढ़ाने, पशुधन की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक डेयरी अवसंरचना विकसित करने जैसी चुनौतियां हैं। ऐसे में कॉन्क्लेव-2026 केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि राज्य के डेयरी क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डेयरी क्षेत्र सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा और रोजगार से जुड़ा हुआ है। यदि उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात पर भी समान ध्यान दिया जाए तो उत्तर प्रदेश न केवल देश में बल्कि वैश्विक डेयरी बाजार में भी अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर सकता है।
