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अंबाला में दूषित पानी से पीलिया का कहर? 12 साल की बच्ची की मौत के बाद NHRC सख्त, हरियाणा सरकार से मांगी रिपोर्ट

हरियाणा के अंबाला जिले के शाहजादपुर क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण पीलिया फैलने और एक 12 वर्षीय बच्ची की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 03:03 PM IST
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अंबाला में दूषित पानी से पीलिया का कहर? 12 साल की बच्ची की मौत के बाद NHRC सख्त, हरियाणा सरकार से मांगी रिपोर्ट

NHRC ने कहा है कि मीडिया रिपोर्ट में सामने आए तथ्य यदि सही पाए जाते हैं तो यह लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला है। आयोग ने राज्य सरकार से प्रभावित बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।

शाहजादपुर में पीलिया से बच्चों के प्रभावित होने की खबर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अंबाला जिले के शाहजादपुर क्षेत्र में कई बच्चे पीलिया से पीड़ित पाए गए हैं। स्थानीय निवासियों ने आशंका जताई है कि क्षेत्र में सप्लाई किया जा रहा पेयजल दूषित है, जिसके कारण संक्रमण फैल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में सार्वजनिक नल के माध्यम से मिलने वाले पानी की गुणवत्ता खराब है। इसी पानी के सेवन के बाद कई लोगों, खासकर बच्चों में पीलिया के लक्षण दिखाई दिए।

12 वर्षीय बच्ची की इलाज के दौरान मौत

रिपोर्ट के मुताबिक, एक 12 वर्षीय बच्ची को पीलिया की शिकायत के बाद पहले स्थानीय अस्पताल में उपचार दिया गया। लेकिन उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) रेफर किया। PGIMER में इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में चिंता बढ़ गई और लोगों ने पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए।

NHRC ने हरियाणा सरकार से मांगा जवाब

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हरियाणा के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से इन जानकारियों की मांग की गई है:

  • पीलिया से प्रभावित बच्चों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति।
  • अस्पतालों में इलाज करा रहे बच्चों की स्थिति।
  • प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई कार्रवाई।
  • पेयजल की गुणवत्ता जांच के परिणाम।
  • दूषित पानी की समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम।
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बनाई गई कार्ययोजना।

NHRC ने क्यों माना गंभीर मानवाधिकार मामला?

NHRC के अनुसार, नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। दूषित पानी के कारण बीमारी फैलना और किसी व्यक्ति की मौत होना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आयोग ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासन की जवाबदेही तय करना जरूरी है ताकि प्रभावित लोगों को समय पर इलाज मिले और बीमारी के प्रसार को रोका जा सके।

दूषित पानी से फैल सकती हैं गंभीर बीमारियां

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित पानी में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया कई जलजनित बीमारियों का कारण बन सकते हैं। हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई संक्रमण के कारण पीलिया हो सकता है। इन संक्रमणों में शुरुआती लक्षणों में शामिल हो सकते हैं: आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, बुखार, कमजोरी और थकान, पेट दर्द, भूख कम लगना, उल्टी और मतली बच्चों में संक्रमण का असर अधिक गंभीर हो सकता है, खासकर जब समय पर इलाज न मिले।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

इस मामले में अब हरियाणा सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्र में बीमारी के कारणों का पता लगाना और संक्रमण को रोकना है। इसके लिए पेयजल स्रोतों की जांच, पानी के सैंपल की लैब टेस्टिंग, प्रभावित परिवारों की स्वास्थ्य जांच और लोगों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना जरूरी कदम माने जा रहे हैं।

NHRC की कार्रवाई के बाद बढ़ी निगरानी

NHRC के नोटिस के बाद हरियाणा सरकार को निर्धारित समय सीमा के भीतर आयोग को जवाब देना होगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई या निर्देश जारी किए जा सकते हैं। यह मामला एक बार फिर सुरक्षित पेयजल व्यवस्था, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और जलजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर प्रशासनिक तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करता है।