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'काल' ड्रोन से बढ़ेगी भारत की ताकत, 8 घंटे हवा में रहकर करेगा दुश्मन का सफाया

भारत ने स्वदेशी लॉन्ग-रेंज अटैक ड्रोन 'काल' विकसित किया है, जो 1,000 किलोमीटर दूर तक सटीक हमला कर सकता है। यह ड्रोन 7–8 घंटे तक हवा में रह सकता है, 50 किलोग्राम पेलोड ले जाने में सक्षम है और हाई-टेक कैमरा, एंटी-जैमिंग तथा एडवांस नेविगेशन सिस्टम से लैस है। इसे भारतीय सेना की भविष्य की रणनीतिक ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

Neha Sharma06 अग. 2026, 04:26 PM IST
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'काल' ड्रोन से बढ़ेगी भारत की ताकत, 8 घंटे हवा में रहकर करेगा दुश्मन का सफाया
नई दिल्ली:भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार आधुनिक बना रहा है। इसी दिशा में अब देश को जल्द ही एक अत्याधुनिक स्वदेशी लॉन्ग-रेंज वन-वे अटैक ड्रोन (Loitering Munition) मिलने जा रहा है, जिसका नाम 'काल' (KAAL) रखा गया है। यह ड्रोन लगभग 1,000 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ड्रोन भारतीय सेना की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है।

'काल' ड्रोन को भारतीय रक्षा स्टार्टअप ID Defence द्वारा विकसित किया गया है। इसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जहां कम लागत में अधिक प्रभावी और सटीक हमले की आवश्यकता होती है। यह ड्रोन दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम से बचते हुए रणनीतिक ठिकानों, हथियार डिपो, कमांड सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हमला कर सकता है।

1,000 किलोमीटर तक मारक क्षमता
इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 1,000 किलोमीटर की ऑपरेशनल रेंज है। भारत के पश्चिमी सीमावर्ती इलाकों, विशेष रूप से राजस्थान से उड़ान भरने पर यह अफगानिस्तान तक के क्षेत्रों में मौजूद लक्ष्यों तक पहुंचने की क्षमता रखता है। हालांकि इसका वास्तविक उपयोग पूरी तरह सैन्य रणनीति और मिशन की आवश्यकता पर निर्भर करेगा।

8 घंटे तक हवा में रहेगा
'काल' ड्रोन लगातार 7 से 8 घंटे तक हवा में उड़ान भर सकता है। इसकी अधिकतम गति लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है, जबकि यह करीब 5,000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम होगा। लंबे समय तक हवा में बने रहने की वजह से यह लक्ष्य की निगरानी करने और सही समय पर हमला करने में मदद करेगा।

50 किलो तक विस्फोटक ले जाने की क्षमता
यह ड्रोन लगभग 50 किलोग्राम तक का पेलोड या विस्फोटक ले जाने में सक्षम होगा। यह क्षमता इसे बंकर, सैन्य वाहन, हथियार भंडार और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने के लिए प्रभावी बनाती है।

अत्याधुनिक तकनीक से लैस
  • हाई-रेजोल्यूशन इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरा
  • थर्मल इमेजिंग कैमरा
  • मल्टी-बैंड GPS/GNSS नेविगेशन
  • एन्क्रिप्टेड डेटा लिंक
  • एंटी-जैमिंग तकनीक
  • ऑटोनॉमस मिशन प्लानिंग सिस्टम
इन तकनीकों की मदद से ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) की स्थिति में भी अपना मिशन पूरा करने में सक्षम होगा।

आधुनिक युद्ध में बढ़ेगा महत्व
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने यह साबित किया है कि कम लागत वाले ड्रोन आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में 'काल' जैसे स्वदेशी ड्रोन भारत को कम खर्च में अधिक प्रभावी सैन्य विकल्प उपलब्ध कराएंगे। इससे सेना को मानव जीवन का जोखिम कम रखते हुए लंबी दूरी तक सटीक कार्रवाई करने की क्षमता मिलेगी।

निर्यात की भी तैयारी
कंपनी के अनुसार, इस ड्रोन को लेकर कई मित्र देशों के साथ शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है। हालांकि इसके निर्यात के लिए भारत सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी। यदि मंजूरी मिलती है, तो 'काल' भारत के रक्षा निर्यात को भी नई गति दे सकता है।

विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे लॉन्ग-रेंज अटैक ड्रोन भारतीय सेना को भविष्य के युद्धों में रणनीतिक बढ़त देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

'काल' ड्रोन केवल एक नया हथियार नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। लंबी दूरी, उच्च सटीकता, कम लागत और अत्याधुनिक तकनीक के साथ यह ड्रोन भारतीय सेना की मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।