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ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी तैयारी: 3.5 लाख करोड़ से बनेगा रणनीतिक ईंधन भंडार
केंद्र सरकार 3.5 लाख करोड़ रुपये की लागत से रणनीतिक ईंधन भंडार बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए LPG और प्राकृतिक गैस पर विशेष उपकर लगाया जा सकता है, जिससे भविष्य में ईंधन संकट के दौरान देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
Neha Sharma06 अग. 2026, 04:26 PM IST

नई दिल्ली: देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़े रणनीतिक ईंधन भंडार (Strategic Fuel Reserve) की योजना पर काम कर रही है। इस परियोजना पर लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य भविष्य में किसी अंतरराष्ट्रीय संकट, युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश के पास पर्याप्त ईंधन उपलब्ध रखना है, ताकि आम लोगों और आवश्यक सेवाओं पर इसका असर कम से कम पड़े।
सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा आवश्यकताएँ तेजी से बढ़ेंगी। ऐसे में केवल आयात पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसी वजह से कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी के बड़े भंडारण केंद्र विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
हालांकि, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए धन जुटाना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (PNG) की खपत पर विशेष उपकर (Cess) लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो घरेलू गैस सिलेंडर और पाइप्ड गैस की कीमतों में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। सरकार का तर्क है कि इस अतिरिक्त राशि का उपयोग पूरी तरह ईंधन भंडारण अवसंरचना के निर्माण और रखरखाव में किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, रणनीतिक ईंधन भंडार किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इससे वैश्विक बाजार में अचानक तेल और गैस की कीमतें बढ़ने या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश के पास वैकल्पिक व्यवस्था बनी रहती है। इससे परिवहन, बिजली उत्पादन, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति प्रभावित नहीं होती।
भारत फिलहाल अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई संकट उत्पन्न होता है, तो इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। रणनीतिक भंडार बनने के बाद सरकार आपातकालीन स्थिति में इन भंडारों का उपयोग कर बाजार में आपूर्ति बनाए रख सकेगी और कीमतों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
हालांकि, प्रस्तावित उपकर को लेकर उपभोक्ताओं और उद्योग जगत की प्रतिक्रियाएँ भी महत्वपूर्ण होंगी। एक ओर यह योजना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, वहीं दूसरी ओर इससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है। सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
