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CAG का बड़ा खुलासा: यूपी में ₹36 हजार करोड़ से ज्यादा राजस्व बकाया, करोड़ों के खर्च में मिली गड़बड़ी

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वित्त वर्ष 2022-23 की ऑडिट रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में वित्तीय प्रबंधन, बजट नियंत्रण, आईटी सुरक्षा, राजस्व वसूली, स्वास्थ्य विभाग और पर्यटन योजनाओं से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में बिना बजटीय प्रावधान के खर्च, नियमों के विरुद्ध पुनर्विनियोजन, राजस्व नुकसान और योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी जैसी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 06:33 PM IST
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CAG का बड़ा खुलासा: यूपी में ₹36 हजार करोड़ से ज्यादा राजस्व बकाया, करोड़ों के खर्च में मिली गड़बड़ी

IFMS में बिना बजट प्रावधान के ₹219 करोड़ से अधिक खर्च

CAG की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) में वित्तीय नियंत्रण से जुड़ी कमियां सामने आईं। ऑडिट में पाया गया कि बिना पर्याप्त बजटीय प्रावधान और सक्षम स्वीकृति के कुल ₹219.57 करोड़ का व्यय किया गया। इसके अलावा नई सेवाओं पर खर्च रोकने के निर्देशों के बावजूद बड़ी राशि का पुनर्विनियोजन किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक नई सेवाओं के लिए ₹5,120.88 करोड़ और राज्य पोषित योजनाओं में ₹10,186.62 करोड़ का पुनर्विनियोजन नियमों के अनुरूप नहीं था। CAG ने कहा कि बजट प्रक्रिया में पर्याप्त निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था की कमी के कारण ऐसी वित्तीय अनियमितताएं हुईं।

IFMS की आईटी व्यवस्था और सुरक्षा में कमियां

रिपोर्ट में IFMS के तकनीकी संचालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। CAG के अनुसार वर्ष 2014-15 में IFMS लागू होने के बाद से आईटी संचालन समिति का पुनर्गठन नहीं किया गया और न ही कोई व्यापक आईटी नीति तैयार की गई। ऑडिट में यह भी पाया गया कि कई ऐसे कर्मचारियों की यूजर आईडी सक्रिय थीं, जो या तो स्थानांतरित हो चुके थे या सेवानिवृत्त हो गए थे। इससे सिस्टम में अनधिकृत पहुंच और डेटा सुरक्षा को लेकर जोखिम बना रहा। इसके अलावा केंद्र सरकार से मिलने वाली ₹20.06 करोड़ की सहायता भी समय पर काम पूरा नहीं होने के कारण जारी नहीं हो सकी।

स्टाम्प शुल्क और राजस्व वसूली में भारी कमी

CAG रिपोर्ट में राज्य के राजस्व संग्रह से जुड़ी कमियों को भी उजागर किया गया है। संपत्ति दस्तावेजों में सही विवरण दर्ज नहीं होने के कारण स्टाम्प शुल्क में नुकसान हुआ। ऑडिट के दौरान पाया गया कि संपत्तियों की सड़क चौड़ाई, व्यावसायिक उपयोग और वास्तविक क्षेत्रफल जैसी जानकारियां सही दर्ज नहीं की गईं, जिससे सरकार को लगभग ₹6.83 करोड़ के राजस्व की क्षति हुई। रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2023 तक उत्तर प्रदेश सरकार का कुल राजस्व बकाया ₹36,241.90 करोड़ था। इसमें अकेले स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग का बकाया ₹15,293.15 करोड़ शामिल था।

सरकारी डॉक्टरों को नियमों के खिलाफ एनपीए भुगतान

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामले में CAG ने सरकारी डॉक्टरों को दिए गए गैर-प्रैक्टिस भत्ते (NPA) में भी अनियमितताएं पाई हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 से 2024 के बीच 571 सरकारी डॉक्टरों को निर्धारित सीमा से अधिक वेतन और एनपीए का भुगतान किया गया। नियमों के अनुसार मूल वेतन और एनपीए की अधिकतम सीमा ₹2.37 लाख तय थी, लेकिन इससे अधिक भुगतान किया गया। इससे सरकार को लगभग ₹16.93 लाख का नुकसान हुआ। इसके अलावा 1,660 मामलों में डॉक्टरों को निर्धारित 20 प्रतिशत की जगह 21 प्रतिशत की दर से एनपीए भुगतान किया गया।

पर्यटन योजनाओं में देरी और परिसंपत्तियों का उपयोग न होना

CAG ने उत्तर प्रदेश में केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत चल रही परियोजनाओं की स्थिति पर भी आपत्ति जताई है। रिपोर्ट में कहा गया कि कई परियोजनाएं पूरी होने के बाद भी उन्हें समय पर उपयोग में नहीं लाया गया। कुछ परियोजनाओं को 23 महीने तक की देरी के बाद शुरू किया गया। वहीं ₹59.53 करोड़ की परिसंपत्तियां भौतिक सत्यापन के 13 से 14 महीने बाद भी उपयोग में नहीं लाई गईं।

पर्यटन सर्किट निर्माण में नियमों की अनदेखी

ऑडिट में पर्यटन सर्किट तैयार करने में भी खामियां पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार आध्यात्मिक सर्किट बनाते समय निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। CAG ने उदाहरण देते हुए बताया कि जेवर और बांदा के बीच लगभग 501 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद दोनों स्थानों को एक ही आध्यात्मिक सर्किट में शामिल किया गया।

केंद्र पोषित परियोजनाओं में देरी और अनियमित खर्च

रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित 12 पर्यटन परियोजनाएं तय समय सीमा से काफी देर से पूरी हुईं। इन परियोजनाओं में देरी की अवधि 6 महीने से लेकर 44 महीने तक रही। इसके अलावा परियोजनाओं की क्लोजर रिपोर्ट से जुड़े कार्यों में ₹6.68 करोड़ का खर्च भी अनियमित पाया गया।

CAG की रिपोर्ट में उठे मुख्य सवाल

CAG की ऑडिट रिपोर्ट से उत्तर प्रदेश सरकार के वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा, राजस्व संग्रह और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट ने विभागीय निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, वित्तीय नियमों के पालन और आईटी सुरक्षा सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया है।