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फर्जी डेटा देकर दवा मंजूरी लेने वालों पर अब लगेगी रोक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने सख्त किए ड्रग्स नियम

भारत की दवा नियामक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन करते हुए फर्जी या मनगढ़ंत डेटा प्रस्तुत करने वाले आवेदकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया है।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 06:33 PM IST
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फर्जी डेटा देकर दवा मंजूरी लेने वालों पर अब लगेगी रोक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने सख्त किए ड्रग्स नियम

मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन की अधिसूचना G.S.R. संख्या 756(E) के माध्यम से जारी की है। नए नियमों के तहत अब लाइसेंसिंग अथॉरिटी को यह अधिकार मिलेगा कि दवा से संबंधित आवेदन में गलत, फर्जी या fabricated data देने वाले आवेदकों को भविष्य में नए आवेदन दाखिल करने से एक निश्चित अवधि के लिए प्रतिबंधित किया जा सके। यह कदम दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने तथा दवा मंजूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिक प्रमाणों की विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अब केवल आवेदन रद्द नहीं होगा, आगे आवेदन करने पर भी रोक लगेगी

मौजूदा नियमों के तहत यदि कोई दवा निर्माता या आवेदक आवेदन प्रक्रिया में गलत जानकारी या फर्जी डेटा देता था तो उसके खिलाफ कार्रवाई सीमित थी। ऐसे मामलों में आवेदन अस्वीकार किया जा सकता था या पहले से जारी लाइसेंस को रद्द किया जा सकता था। लेकिन नए संशोधन के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। अब यदि कोई संस्था दवा निर्माण, बिक्री या मंजूरी से जुड़े किसी आवेदन में फर्जी डेटा जमा करती है तो:

  • उसका आवेदन खारिज किया जा सकता है।
  • उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
  • उसे एक निश्चित अवधि तक नए आवेदन दाखिल करने से रोका जा सकता है।

यह रोक संबंधित नियामक प्राधिकरण द्वारा लगाई जाएगी। यानी यदि मामला राज्य स्तर के लाइसेंसिंग अथॉरिटी से जुड़ा है तो राज्य स्तर पर और यदि मामला केंद्रीय प्राधिकरण से संबंधित है तो केंद्र स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।

फर्जी वैज्ञानिक डेटा से मरीजों की सुरक्षा को खतरा

दवाओं की मंजूरी प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित होती है। किसी नई दवा या उत्पाद को बाजार में आने से पहले उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता की जांच की जाती है। इसके लिए कंपनियों को कई प्रकार के वैज्ञानिक डेटा, परीक्षण रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज जमा करने होते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यदि कोई कंपनी या आवेदक गलत या फर्जी डेटा उपलब्ध कराता है तो इससे:

  • दवा की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन प्रभावित हो सकता है।
  • मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
  • नियामक प्रणाली की विश्वसनीयता कमजोर हो सकती है।
  • गलत गुणवत्ता वाली दवाएं बाजार में पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।

इसी कारण सरकार ने ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की व्यवस्था की है।

कार्रवाई से पहले कंपनियों को मिलेगा अपना पक्ष रखने का अवसर

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कार्रवाई निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत हो। नए प्रावधानों के अनुसार:

  • लाइसेंसिंग अथॉरिटी सीधे डिबार नहीं करेगी।
  • पहले संबंधित संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
  • कंपनी या आवेदक को जवाब देने का अवसर मिलेगा।
  • सभी तथ्यों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
  • निर्णय के खिलाफ अपील का अधिकार भी दिया गया है।

इससे नियामकीय कार्रवाई में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी भी संस्था के खिलाफ एकतरफा कदम नहीं उठाया जाएगा।

फार्मा सेक्टर में बढ़ेगी जवाबदेही

भारत दुनिया के बड़े दवा उत्पादक देशों में शामिल है। देश की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री घरेलू जरूरतों के साथ-साथ बड़ी मात्रा में दवाओं का निर्यात भी करती है। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता और नियामकीय मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि नए नियमों से:

  • ईमानदारी से काम करने वाली दवा कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं पर प्रभावी नियंत्रण होगा।
  • दवा मंजूरी प्रक्रिया अधिक मजबूत होगी।
  • मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

वैश्विक मानकों के अनुरूप सुधार की पहल

केंद्र सरकार लगातार दवा नियमन प्रणाली में सुधार कर रही है। नए संशोधन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली नियामकीय प्रक्रियाओं के अनुरूप बताया गया है। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें दवा कंपनियां वैज्ञानिक प्रमाणों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के आधार पर काम करें। मंत्रालय ने कहा कि यह संशोधन दवा क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने, नैतिक व्यवहार को प्रोत्साहित करने और गलत गतिविधियों में शामिल संस्थाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ड्रग रेगुलेशन में मजबूत होगी निगरानी व्यवस्था

नई व्यवस्था लागू होने के बाद ड्रग लाइसेंस और मंजूरी प्रक्रिया में नियामक संस्थाओं की भूमिका और मजबूत होगी। अब दवा कंपनियों को आवेदन करते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा प्रस्तुत सभी वैज्ञानिक आंकड़े वास्तविक, प्रमाणित और विश्वसनीय हों। फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देकर मंजूरी लेने की कोशिश करने वाली संस्थाओं के लिए यह संशोधन एक सख्त चेतावनी माना जा रहा है।

क्या बदला है नए नियमों में?

पुरानी व्यवस्था:

  • फर्जी डेटा मिलने पर आवेदन खारिज हो सकता था।
  • लाइसेंस रद्द किया जा सकता था।

नई व्यवस्था:

  • आवेदन खारिज करने और लाइसेंस रद्द करने के अलावा।
  • संबंधित संस्था को तय समय तक नए आवेदन करने से रोका जा सकेगा।
  • कारण बताओ नोटिस और अपील की प्रक्रिया अनिवार्य होगी।

केंद्र सरकार का यह कदम दवा क्षेत्र में पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फर्जी डेटा के आधार पर दवा मंजूरी लेने की कोशिशों पर रोक लगाने से नियामक व्यवस्था मजबूत होगी और देश में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।