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सरकार का बड़ा कदम: LIC Stake Sale से मिला ₹31,500 करोड़ का राजस्व

केंद्र सरकार ने LIC में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर करीब ₹31,500 करोड़ जुटाए हैं। यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े विनिवेश (Disinvestment) सौदों में से एक है। सरकार के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य संसाधन जुटाना, पूंजीगत व्यय को समर्थन देना और सार्वजनिक उपक्रमों में निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है। सरकार की बहुमत हिस्सेदारी LIC में बनी रहेगी।

Neha Sharma06 अग. 2026, 06:36 PM IST
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सरकार का बड़ा कदम: LIC Stake Sale से मिला ₹31,500 करोड़ का राजस्व
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर लगभग ₹31,500 करोड़ जुटाए हैं। यह हाल के वर्षों में सरकार द्वारा किए गए सबसे बड़े विनिवेश (Disinvestment) सौदों में से एक माना जा रहा है। सरकार ने यह हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale - OFS) और संस्थागत निवेशकों के माध्यम से बेची। इस प्रक्रिया में घरेलू और विदेशी दोनों तरह के निवेशकों ने हिस्सा लिया।

 विशेषज्ञों के अनुसार, LIC भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी होने के साथ-साथ शेयर बाजार की सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों में भी शामिल है। ऐसे में सरकार की ओर से हिस्सेदारी की बिक्री पर निवेशकों की नजर लंबे समय से बनी हुई थी। इस सौदे के सफल होने से सरकार को अपने विनिवेश कार्यक्रम को गति देने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य बाजार से पूंजी जुटाना, सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी को संतुलित करना और वित्तीय संसाधनों को मजबूत करना है।

सरकार का कहना है कि इस विनिवेश से प्राप्त राशि का उपयोग बुनियादी ढांचा (Infrastructure), सामाजिक कल्याण योजनाओं, पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) और अन्य विकास परियोजनाओं में किया जा सकता है। इससे राजकोषीय प्रबंधन को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस हिस्सेदारी बिक्री के बाद भी LIC में सरकार की बहुमत हिस्सेदारी बनी रहेगी। यानी कंपनी का नियंत्रण केंद्र सरकार के पास ही रहेगा और पॉलिसीधारकों के हितों पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि यह सौदा भारतीय पूंजी बाजार में सरकार के भरोसे और निवेशकों की रुचि को दर्शाता है। इससे आने वाले समय में अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश कार्यक्रमों को भी बढ़ावा मिल सकता है। सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक उपक्रमों में बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस, निवेशकों की भागीदारी और बाजार की गहराई बढ़ाना भी है।