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तीसरी बार सत्ता की तैयारी में भाजपा, बूथ से लेकर महिला मतदाताओं तक बनाई नई रणनीति
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में भाजपा ने 19 अगस्त से "बूथ जीतो अभियान" शुरू करने, सितंबर में "लखपति दीदी सम्मेलन" आयोजित करने, केंद्रीय नेताओं के राज्यव्यापी दौरे कराने और विकास यात्रा के माध्यम से जनता तक पहुंचने की रणनीति बनाई है। पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत कर लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चुनावी तैयारियों को तेज कर रही है।

नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी तैयारियों को निर्णायक चरण में पहुंचा दिया है। पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, महिला मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने, केंद्रीय नेताओं के राज्यव्यापी दौरे, विकास यात्रा और "लखपति दीदी सम्मेलन" जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से चुनावी माहौल तैयार करने की रणनीति बनाई है। पार्टी का लक्ष्य लगातार तीसरी बार उत्तराखंड की सत्ता में वापसी करना है।
नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष की अध्यक्षता में आयोजित उत्तराखंड कोर ग्रुप की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, सांसद, विधायक और अन्य प्रमुख नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में संगठनात्मक मजबूती, जनसंपर्क अभियान, सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
19 अगस्त से शुरू होगा 'बूथ जीतो अभियान'
बैठक में तय किया गया कि 19 अगस्त से पूरे राज्य में "बूथ जीतो अभियान" शुरू किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक मतदान केंद्र पर पार्टी संगठन को मजबूत करना, बूथ समितियों को सक्रिय करना और मतदाताओं के साथ नियमित संवाद स्थापित करना है। भाजपा का मानना है कि चुनावी जीत की सबसे मजबूत नींव बूथ स्तर पर तैयार होती है, इसलिए इस बार संगठन का सबसे अधिक फोकस बूथ प्रबंधन पर रहेगा।
सांसद, विधायक और मंत्री करेंगे क्षेत्रीय दौरे
पार्टी ने सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और पूर्व जनप्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सभी नेताओं को गांव-गांव जाकर जनता से संवाद स्थापित करने, स्थानीय समस्याओं की जानकारी लेने और सरकार की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके साथ ही प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की अलग-अलग रिपोर्ट तैयार कर संगठन को भेजी जाएगी, ताकि चुनाव से पहले कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर रणनीति बनाई जा सके।
महिला मतदाताओं पर रहेगा विशेष फोकस
भाजपा इस चुनाव में महिला मतदाताओं को अपने अभियान का प्रमुख केंद्र बनाने जा रही है। इसके लिए सितंबर महीने में "लखपति दीदी सम्मेलन" आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं तक पहुंच बनाई जाएगी और उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आर्थिक विकास से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। पार्टी का मानना है कि उत्तराखंड में महिलाओं की चुनावी भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका समर्थन किसी भी दल की चुनावी सफलता में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
विकास यात्रा और जनसंवाद कार्यक्रम
भाजपा सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए पूरे राज्य में "विकास यात्रा" भी शुरू करेगी। इस दौरान सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, धार्मिक विकास, बुनियादी ढांचे और रोजगार से जुड़े कार्यों को जनता के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। पार्टी नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे केवल उपलब्धियां गिनाने तक सीमित न रहें, बल्कि लोगों की शिकायतें भी सुनें और उनके समाधान की दिशा में कार्य करें।
विधायकों को स्थानीय नाराजगी दूर करने के निर्देश
बैठक में कई विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर विधायकों के प्रति नाराजगी और संगठनात्मक कमजोरियों पर भी चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी विधायक और जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में अधिक समय बिताएं, जनता से सीधे संवाद करें और लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने का प्रयास करें। सूत्रों के अनुसार पार्टी प्रत्येक विधानसभा सीट का अलग-अलग राजनीतिक और संगठनात्मक आकलन कर रही है, ताकि चुनाव से पहले आवश्यक सुधार किए जा सकें।
सितंबर में तेज होगा चुनावी अभियान
भाजपा की रणनीति के अनुसार सितंबर से चुनावी गतिविधियों को और तेज किया जाएगा। केंद्रीय नेताओं के उत्तराखंड दौरे, बड़ी जनसभाएं, कार्यकर्ता सम्मेलन और विशेष जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही पार्टी "हर घर तिरंगा" और तिरंगा यात्रा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से भी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने की तैयारी कर रही है।
क्या है भाजपा की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार केवल सरकार की उपलब्धियों के आधार पर चुनाव नहीं लड़ना चाहती, बल्कि मजबूत बूथ नेटवर्क, महिला मतदाताओं तक सीधी पहुंच, स्थानीय मुद्दों के समाधान, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी के सहारे चुनावी बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे छोटे लेकिन राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में बूथ प्रबंधन, स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता और मतदाताओं से लगातार संपर्क चुनावी परिणामों को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।
मुख्यमंत्री और संगठन का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल के सार्वजनिक कार्यक्रमों में कहा है कि उनकी सरकार "विकल्प रहित संकल्प" के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है और जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने को आगामी विधानसभा चुनाव की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता को चुनाव तक लगातार जनता के बीच रहकर सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को घर-घर पहुंचाना होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह रणनीति?
उत्तराखंड में कुल 70 विधानसभा सीटें हैं और भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। ऐसे में पार्टी का यह संगठनात्मक अभियान केवल चुनावी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे राज्य में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यदि बूथ स्तर पर संगठन मजबूत होता है और स्थानीय मुद्दों का समय रहते समाधान किया जाता है, तो इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रहे हैं, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
