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23 दिन में टूटा 4,200 करोड़ का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, NHAI का बड़ा एक्शन; परियोजना निदेशक हटाए गए, मरम्मत तक टोल फ्री

उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज 23 दिन बाद ही निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सड़क धंसने और निर्माण में तकनीकी खामियां सामने आने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त कार्रवाई करते हुए परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। उन्हें मुख्यालय भेज दिया गया है, जबकि बरेली के परियोजना निदेशक नवरतन को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 06:37 PM IST
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23 दिन में टूटा 4,200 करोड़ का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, NHAI का बड़ा एक्शन; परियोजना निदेशक हटाए गए, मरम्मत तक टोल फ्री

एनएचएआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक एक्सप्रेसवे की सभी तकनीकी कमियों को दूर नहीं कर दिया जाता और मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक इस मार्ग पर वाहन चालकों से कोई टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। टोल से होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक से की जाएगी।

उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आईं खामियां

लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से बनाए गए इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। परियोजना को उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण सड़क संपर्क मार्गों में गिना जा रहा था। लेकिन उद्घाटन के लगभग 20 दिनों के भीतर ही एक्सप्रेसवे के पांच अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आईं। कुछ स्थानों पर सड़क की सतह बैठ गई, जबकि कहीं दरारें और जल निकासी व्यवस्था में भी खामियां देखने को मिलीं। इन घटनाओं ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मामला सामने आने के बाद एनएचएआई की टीमों ने मौके का निरीक्षण किया और विस्तृत तकनीकी जांच कराई, जिसमें निर्माण मानकों के पालन में गंभीर लापरवाही की आशंका जताई गई।

परियोजना निदेशक बदले, जिम्मेदारी तय

जांच रिपोर्ट के आधार पर एनएचएआई ने तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को उनके पद से हटा दिया और मुख्यालय से संबद्ध कर दिया। उनकी जगह बरेली के परियोजना निदेशक नवरतन को लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे परियोजना का नया प्रभारी बनाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नए परियोजना निदेशक की प्राथमिकता एक्सप्रेसवे की सभी खामियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर कराना होगी, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

निर्माण कंपनी पर भी कड़ी कार्रवाई

एनएचएआई ने निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक के खिलाफ भी बड़ा कदम उठाया है। कंपनी को अयोग्य (डिबार) घोषित कर दिया गया है, जिसके कारण वह निर्धारित अवधि तक एनएचएआई की नई परियोजनाओं और सरकारी टेंडरों में भाग नहीं ले सकेगी। इसके अलावा एक्सप्रेसवे की मरम्मत, गुणवत्ता सुधार और टोल बंद रहने से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी कंपनी से ही कराई जाएगी। यह कदम निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तीन इंजीनियरों पर दो साल का प्रतिबंध

परियोजना से जुड़े निर्माण एजेंसी के तीन इंजीनियर—विवेक गुप्ता, सुरेंद्र कुमार और यतेंद्र कुमार—को भी दो वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। एनएचएआई के अनुसार इन अधिकारियों की भूमिका निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में थी। प्रथम दृष्टया जांच में इनके स्तर पर लापरवाही सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

पूर्व परियोजना निदेशक को चार्जशीट

एनएचएआई ने पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को भी चार्जशीट जारी की है। अधिकांश निर्माण कार्य उनके कार्यकाल में हुआ था। ऐसे में निर्माण प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण और कार्यों की निगरानी को लेकर उनकी जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मरम्मत पूरी होने तक नहीं लगेगा टोल

एनएचएआई ने यात्रियों के हित में फैसला लिया है कि एक्सप्रेसवे पर तब तक टोल वसूली नहीं होगी, जब तक सभी क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत पूरी नहीं हो जाती और सड़क पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दी जाती। इस दौरान वाहन चालक बिना किसी टोल शुल्क के एक्सप्रेसवे का उपयोग कर सकेंगे।

गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को प्रदेश की सबसे अहम सड़क परियोजनाओं में शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य दोनों प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय कम करना, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को गति देना तथा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंसने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और परियोजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी लागत से बने किसी भी एक्सप्रेसवे में शुरुआती दिनों में इस प्रकार की तकनीकी खामियां सामने आना चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच, जिम्मेदारी तय करना और दोषी एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई भविष्य की आधारभूत संरचना परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।