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बांकीपुर उपचुनाव के बाद सपा की नई रणनीति, पीडीए के जरिए ब्राह्मण समाज तक पहुंचने की कोशिश
जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए "पीडीए" अभियान को सभी वर्गों की भागीदारी का मंच बताया। उन्होंने अयोध्या से पवन पांडेय की उम्मीदवारी का संकेत भी दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा की सामाजिक और चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

लखनऊ: बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने उत्तर भारत की राजनीति में नए सामाजिक और चुनावी समीकरणों पर चर्चा तेज कर दी है। इस बीच समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को गति देते हुए अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ ब्राह्मण समाज तक राजनीतिक पहुंच बढ़ाने के संकेत दिए हैं। लखनऊ में समाजवादी आंदोलन के प्रख्यात नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाया और कहा कि समाजवादी पार्टी का "पीडीए" अभियान सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की राजनीति का प्रतीक है।
कार्यक्रम में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने ब्राह्मण समाज का केवल राजनीतिक उपयोग किया, लेकिन उन्हें सम्मान और भागीदारी नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिनसे ब्राह्मण समाज में असंतोष पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय, समान प्रतिनिधित्व और सभी वर्गों की भागीदारी में विश्वास रखती है।
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि "पीडीए" केवल पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज के सभी वर्गों को सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज के किसी वर्ग को अन्याय का सामना करना पड़ता है, तो समाजवादी पार्टी उसकी आवाज बनने का काम करेगी।
भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक फैसलों और सामाजिक संतुलन को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में कई ऐसे मुद्दे सामने आए, जिनसे ब्राह्मण समाज स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है। हालांकि भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत दिए। उन्होंने पूर्व मंत्री पवन पांडेय के नाम का सार्वजनिक रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि वे आगामी चुनाव में अयोध्या विधानसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इसे अयोध्या क्षेत्र में सपा की चुनावी रणनीति की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।
बांकीपुर उपचुनाव के परिणामों का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि हाल के चुनावी नतीजों ने यह साबित किया है कि यदि जनता बदलाव का मन बना ले तो मजबूत राजनीतिक दलों को भी चुनौती दी जा सकती है। हालांकि उन्होंने किसी एक चुनाव परिणाम को निर्णायक मानने के बजाय इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
क्या है पीडीए अभियान?
समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले "पीडीए" (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को अपने प्रमुख राजनीतिक अभियान के रूप में शुरू किया था। पार्टी का दावा है कि इसका उद्देश्य सामाजिक न्याय और सभी वंचित वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है। अब अखिलेश यादव ने इसके दायरे को व्यापक बताते हुए ब्राह्मण समाज सहित अन्य समुदायों को भी इसमें जोड़ने के संकेत दिए हैं। इसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सामाजिक गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक महत्व
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाता कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का यह संदेश केवल एक राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के लिए व्यापक सामाजिक समीकरण तैयार करने की कोशिश माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण, संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय नेतृत्व की स्वीकार्यता पर भी काफी हद तक निर्भर करता है। ऐसे में ब्राह्मण समाज को लेकर सपा की सक्रियता आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
अखिलेश यादव:
"समाजवादी पार्टी का पीडीए अभियान सामाजिक न्याय और सभी वर्गों की भागीदारी का अभियान है।"
अखिलेश यादव:
"भाजपा सरकार में समाज का कोई भी वर्ग पूरी तरह संतुष्ट नहीं है।"
ध्यान देने योग्य तथ्य
इस कार्यक्रम में भाजपा के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के राजनीतिक बयान हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा की ओर से इन पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
