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बरी होने के बाद बृजभूषण का पहला बड़ा रोड शो, समर्थकों के बीच दिखाएंगे ताकत

महिला पहलवानों से जुड़े मामले में अदालत से बरी होने के बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अयोध्या से नंदीग्राम तक "सत्यमेव जयते रैली" निकालेंगे। समर्थक इसे उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक वापसी का शक्ति प्रदर्शन मान रहे हैं, जबकि शिकायतकर्ता पहलवानों ने फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने की बात कही है। यह घटनाक्रम न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

Anshuman Mishra06 अग. 2026, 06:37 PM IST
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बरी होने के बाद बृजभूषण का पहला बड़ा रोड शो, समर्थकों के बीच दिखाएंगे ताकत



गोंडा/अयोध्या: महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े बहुचर्चित मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से राहत मिलने के बाद पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पहली बार बड़े सार्वजनिक शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में हैं। गुरुवार को वह अयोध्या से नंदीग्राम तक "सत्यमेव जयते रैली" निकालेंगे, जिसे उनके समर्थक न्यायिक राहत के बाद जनता के बीच वापसी और जनसमर्थन के प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं।


रैली की शुरुआत भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या से होगी। बृजभूषण शरण सिंह सबसे पहले हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन-पूजन करेंगे, संतों का आशीर्वाद लेंगे और उसके बाद समर्थकों के विशाल काफिले के साथ नंदीग्राम के लिए रवाना होंगे। नंदीग्राम में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए वे अदालत के फैसले, अपने राजनीतिक भविष्य और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त कर सकते हैं।


स्थानीय स्तर पर इस रैली को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। गोंडा, बहराइच, अयोध्या, बलरामपुर, बस्ती और आसपास के जिलों से हजारों समर्थकों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है।

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यह रैली ऐसे समय आयोजित हो रही है जब हाल ही में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। हालांकि यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और संबंधित पक्षों के पास उच्च अदालत में अपील का अधिकार सुरक्षित है।


अदालत से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा था कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था और अंततः सत्य की जीत हुई। उनके समर्थकों ने फैसले का स्वागत करते हुए गोंडा स्थित आवास पर फूल बरसाए, मिठाइयां बांटी और "सत्यमेव जयते" के नारे लगाए। अब उसी संदेश को जनता तक पहुंचाने के लिए इस रैली का आयोजन किया जा रहा है।


दूसरी ओर, शिकायतकर्ता महिला पहलवानों और उनके समर्थकों ने अदालत के फैसले पर निराशा व्यक्त की है। ओलंपियन विनेश फोगाट ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है और वे कानूनी विकल्पों पर विचार करते हुए फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देंगी। पहलवानों का कहना है कि न्याय की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। इस कारण यह मामला कानूनी और सार्वजनिक विमर्श दोनों स्तरों पर अभी भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।


राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह रैली केवल धार्मिक यात्रा या धन्यवाद कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में बृजभूषण शरण सिंह के राजनीतिक प्रभाव और जनाधार का प्रदर्शन भी मानी जा रही है। लंबे समय तक सांसद और प्रभावशाली नेता रहे बृजभूषण शरण सिंह का समर्थकों के बीच इस तरह सक्रिय होना आगामी राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने भविष्य में चुनाव लड़ने या किसी नई राजनीतिक भूमिका को लेकर फिलहाल कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।


क्या है पूरा मामला?

जनवरी 2023 में देश की कई महिला पहलवानों ने तत्कालीन भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए थे। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक प्रदर्शन हुआ और मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा। पुलिस जांच, आरोपपत्र और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अगस्त 2026 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि शिकायतकर्ता पक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।


यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह मामला भारतीय खेल प्रशासन, न्यायिक प्रक्रिया और राजनीति—तीनों क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। एक ओर अदालत का फैसला न्यायिक व्यवस्था में साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करता है, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता पहलवानों द्वारा फैसले को चुनौती देने की घोषणा यह बताती है कि कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इसके अलावा बृजभूषण शरण सिंह की प्रस्तावित रैली यह संकेत देती है कि अदालत से राहत मिलने के बाद वे अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं।


बृजभूषण शरण सिंह:
"मुझे शुरू से न्यायपालिका पर भरोसा था। अंततः सत्य की जीत हुई।"

विनेश फोगाट:
"हम इस फैसले से सहमत नहीं हैं और कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।"