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आयुर्वेद में डिजिटल क्रांति की तैयारी, CCRAS ने लॉन्च किए तीन बड़े प्रोजेक्ट; युवाओं और स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा

भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने नई दिल्ली में केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) की 27वीं गवर्निंग बॉडी बैठक की अध्यक्षता की।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 06:57 PM IST
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आयुर्वेद में डिजिटल क्रांति की तैयारी, CCRAS ने लॉन्च किए तीन बड़े प्रोजेक्ट; युवाओं और स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा

इस बैठक में आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने, पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने, डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने और युवा शोधकर्ताओं व स्टार्टअप्स को अवसर देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक के दौरान CCRAS की तीन प्रमुख पहलों की शुरुआत की गई, जिनका उद्देश्य आयुर्वेद को प्रमाण आधारित, आधुनिक और वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में विकसित करना है।

पारंपरिक ज्ञान को मिलेगा वैज्ञानिक आधार, CCRAS-PARAMPARA की शुरुआत

बैठक में CCRAS-PARAMPARA नामक महत्वाकांक्षी पहल का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम के तहत भारत के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं, लोक चिकित्सा पद्धतियों, जनजातीय चिकित्सा ज्ञान और पारंपरिक पशु चिकित्सा पद्धतियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाएगा। भारत के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में सदियों से कई प्राकृतिक उपचार पद्धतियां प्रचलित हैं। इनमें औषधीय पौधों, स्थानीय जड़ी-बूटियों और पारंपरिक उपचार तकनीकों का उपयोग किया जाता रहा है। हालांकि, इनका बड़ा हिस्सा अभी तक वैज्ञानिक दस्तावेजों और शोध के दायरे में नहीं आ पाया है। CCRAS-PARAMPARA के माध्यम से इन पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को एकत्रित किया जाएगा, उनका वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा और जरूरत के अनुसार शोध के माध्यम से प्रमाणित किया जाएगा। इससे भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ भविष्य में नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के विकास में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

आयुर्वेद शोध को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल रिसर्च पोर्टल लॉन्च

आयुष मंत्रालय ने CCRAS National Research Recognitions Portal भी शुरू किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के अंतर्गत तीन महत्वपूर्ण पहलें शामिल हैं:

  • CCRAS PRAKASA
  • CCRAS NAVONMESA
  • CCRAS PRABODH 3MT

इनका उद्देश्य आयुर्वेद के क्षेत्र में बेहतर शोध करने वाले विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को पहचान देना और उनके काम को प्रोत्साहित करना है। CCRAS PRAKASA के माध्यम से उत्कृष्ट शोध कार्यों को मान्यता दी जाएगी, जबकि CCRAS NAVONMESA नवाचार और नए शोध विचारों को बढ़ावा देगा। वहीं CCRAS PRABODH 3MT के जरिए शोधकर्ताओं को अपने वैज्ञानिक कार्यों को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इस पहल से आयुर्वेद में उच्च गुणवत्ता वाले शोध को बढ़ावा मिलने और युवा वैज्ञानिकों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

Ayur-dict ऐप से डिजिटल होगा आयुर्वेदिक ज्ञान

बैठक में CCRAS का पहला एंड्रॉयड एप्लिकेशन Ayur-dict भी लॉन्च किया गया। यह ऐप विभिन्न आयुर्वेदिक शब्दकोशों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराएगा। आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली कई तकनीकी शब्दावली और अवधारणाएं आम लोगों के लिए कठिन होती हैं। इस ऐप के जरिए विद्यार्थी, चिकित्सक, शोधकर्ता और आम उपयोगकर्ता आयुर्वेदिक शब्दों का अर्थ और जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम आयुर्वेदिक शिक्षा और शोध को डिजिटल युग के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देश में मजबूत होगा आयुर्वेदिक स्वास्थ्य ढांचा

बैठक के दौरान आयुर्वेद स्वास्थ्य और अनुसंधान से जुड़े कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी शुरू किए गए। केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने वर्चुअल माध्यम से CCRAS-क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (RARI), पुणे में एनिमल हाउस का उद्घाटन किया। यह सुविधा आयुर्वेदिक औषधियों और उपचार पद्धतियों पर वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करने में मदद करेगी। इसके अलावा RARI रानीखेत में स्टाफ क्वार्टर कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया गया। वहीं नागपुर स्थित RARI में 50 बिस्तरों वाले नए आयुर्वेद अस्पताल के निर्माण का भूमि पूजन किया गया। इस अस्पताल के शुरू होने के बाद आयुर्वेदिक उपचार, प्रशिक्षण और अनुसंधान की सुविधाओं को विस्तार मिलने की संभावना है।

AI और नई तकनीकों से बदलेगा आयुर्वेद अनुसंधान

केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुर्वेद का भविष्य केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नवाचार की बड़ी भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल डेटा और आधुनिक शोध तकनीकों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक अनुसंधान को और प्रभावी बना सकता है। AI की मदद से मरीजों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण, उपचार के व्यक्तिगत मॉडल तैयार करने और नई शोध संभावनाओं को तलाशने में मदद मिल सकती है। उन्होंने CCRAS को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने, ट्रांसलेशनल रिसर्च को मजबूत करने और आयुर्वेद के वैज्ञानिक मानकीकरण पर काम करने का आह्वान किया।

प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचे आयुर्वेद: युवाओं और स्टार्टअप्स को जोड़ने पर जोर

प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवा शोधकर्ताओं और उद्यमियों को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके शोध और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी। इसके लिए उन्होंने कई नए सुझाव दिए:

  • युवा शोध फंड की स्थापना
  • आयुर्वेद स्टार्टअप एक्सेलेरेटर कार्यक्रम
  • वैश्विक आयुर्वेद प्रतियोगिता
  • उद्योग और शोध संस्थानों के बीच साझेदारी

इन पहलों से आयुर्वेद आधारित उत्पादों, तकनीकों और सेवाओं के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य समाधान बनाने का लक्ष्य

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि मंत्रालय का लक्ष्य ऐसा शोध आधारित वातावरण तैयार करना है, जहां आधुनिक तकनीक, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और वैज्ञानिक गुणवत्ता के माध्यम से आयुर्वेद को मजबूत बनाया जा सके। CCRAS के महानिदेशक प्रो. वैद्य रबीनारायण आचार्य ने कहा कि संस्था पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और डिजिटल नवाचार के साथ जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नई पहलों से शोधकर्ताओं को बेहतर संसाधन मिलेंगे, पारंपरिक ज्ञान सुरक्षित होगा और आयुर्वेद को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।


CCRAS की 27वीं गवर्निंग बॉडी बैठक में लिए गए फैसले आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध, तकनीक और नवाचार के नए दौर की शुरुआत माने जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य आयुर्वेद को केवल पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के रूप में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित आधुनिक और वैश्विक स्वास्थ्य समाधान के रूप में विकसित करना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, युवा शोधकर्ताओं की भागीदारी और स्टार्टअप सहयोग के जरिए भारत आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।