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आम जनता की जेब पर फिर पड़ेगा 'सुरक्षा का बोझ'? रसोई गैस और CNG महंगी करने की तैयारी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित ईंधन संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार 3.9 लाख करोड़ रुपये की लागत से 10-वर्षीय रणनीतिक ईंधन भंडार (Strategic Fuel Reserve) बनाने की योजना बना रही है। वर्तमान में भारत के पास 10 दिनों से भी कम का आपातकालीन ईंधन स्टॉक है। इस योजना के तहत पहली बार कच्चे तेल के अलावा घरेलू रसोई गैस (LPG) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी सुरक्षित आपातकालीन भंडार तैयार किया जाएगा। इस रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर की फंडिंग के लिए सरकार एलपीजी पर ₹1.29/किग्रा (प्रति 14.2 किग्रा सिलेंडर ₹18 तक की संभावित बढ़ोतरी) और प्राकृतिक गैस पर ₹1.43/SCM विशेष उपकर (Cess) लगाने पर विचार कर रही है, जिससे सालाना लगभग 12,500 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। हालांकि, कच्चे तेल के भंडार का पूरा खर्च केंद्र सरकार अपने बजट से ही उठाएगी। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि प्रस्तावित उपकर बेहद सीमित है और इससे प्राप्त पूरा राजस्व देश को आपातकालीन स्थितियों में ईंधन की किल्लत और आर्थिक झटकों से बचाएगा। यह प्रस्ताव फिलहाल समीक्षा के चरण में है और इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम मुहर लगना बाकी है।

Khushi06 अग. 2026, 06:57 PM IST
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आम जनता की जेब पर फिर पड़ेगा 'सुरक्षा का बोझ'? रसोई गैस और CNG महंगी करने की तैयारी

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला कारागार से पॉक्सो आरोपी के दीवार लांघकर फरार होने की घटना ने जेलों के भौतिक बुनियादी ढांचे और सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस मामले में डीआईजी जेल की जांच रिपोर्ट के बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।राज्य की जेलों को आधुनिक और हाई-टेक बनाने के दावों के बीच एक निर्माणाधीन दीवार के सहारे कैदी का भाग निकलना यह दर्शाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियां सुरक्षा व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी हैं। जब तक सुरक्षा में तकनीक और पुख्ता ढांचागत सुधार शामिल नहीं होंगे, तब तक केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई से ऐसी घटनाओं को रोका जाना कठिन होगा।

31 जुलाई को हुई इस घटना में पॉक्सो कानून के तहत बंद कैदी हरिशंकर विपिन जेल परिसर में निर्माणाधीन भवन क्षेत्र का फायदा उठाकर नई दीवार फांदने में कामयाब रहा। जांच अधिकारी डीआईजी जेल शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि निर्माणाधीन क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे और निगरानी के बुनियादी मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा था। इस इंफ्रास्ट्रक्चरल खामी और अंधबिंदुओं (Blind Spots) के कारण ही कैदी को भागने का मौका मिला।


घटना के बाद शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई और पुलिस टीमें सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं। हालांकि, घटना के समय कैमरों की सही लोकेशन और निर्माणाधीन इलाके में तकनीक की गैर-मौजूदगी ने सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। घटना के तुरंत बाद महानिदेशक (कारागार) पी.सी. मीना ने जेलर अरुण कुमार, दो हेड जेल वार्डर और दो जेल वार्डरों को निलंबित कर दिया था।वरिष्ठ जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय के अनुसार: बंदी ड्यूटी पर तैनात जेल वार्डरों की देखरेख में था और परिसर में बन रही नई दीवार का सहारा लेकर भागने में सफल रहा।

सुरक्षा विशेषज्ञों और कारागार विभाग के अधिकारियों के अनुसार: निर्माणाधीन जेल परिसरों में अक्सर सुरक्षा संबंधी बुनियादी खामियां रह जाती हैं। ऐसे संवेदनशील इलाकों में मोशन सेंसर, पीटीजेड सीसीटीवी कैमरे और अतिरिक्त बैरिकेडिंग अनिवार्य होनी चाहिए ताकि इंसानी चूक होने पर भी तकनीक के जरिए तुरंत अलर्ट जारी हो सके।