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फर्जी यूनिवर्सिटी और भ्रामक EdTech प्लेटफॉर्म पर UGC की सख्ती, 32 संस्थान घोषित हो चुके हैं नकली
ऑनलाइन शिक्षा और एडटेक प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के बीच छात्रों को फर्जी डिग्री और अवैध पाठ्यक्रमों से बचाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने सख्त कदम उठाए हैं। UGC ने ऐसे एडटेक कंपनियों और उच्च शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो बिना अनुमति फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए ऑनलाइन और ओपन डिस्टेंस लर्निंग (ODL) कार्यक्रमों में डिग्री या डिप्लोमा उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि कुछ एडटेक कंपनियां अखबारों, सोशल मीडिया और टेलीविजन पर ऐसे विज्ञापन दे रही हैं, जिनमें वे UGC से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ मिलकर ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड में डिग्री कार्यक्रम चलाने का दावा कर रही हैं। UGC ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की फ्रेंचाइजी व्यवस्था नियमों के अनुसार मान्य नहीं है। ऐसे किसी भी कार्यक्रम या उससे मिलने वाली डिग्री को UGC की मान्यता प्राप्त नहीं होगी।
छात्रों को दाखिले से पहले जांच करने की सलाह
UGC ने छात्रों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन या डिस्टेंस कोर्स में दाखिला लेने से पहले संबंधित कार्यक्रम की मान्यता और संस्थान की पात्रता की जांच जरूर करें। इसके लिए छात्रों को UGC के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (DEB) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी देखने की सलाह दी गई है। UGC ने कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले एडटेक प्लेटफॉर्म और उच्च शिक्षा संस्थानों के खिलाफ लागू कानूनों, नियमों और विनियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत मिलने पर UGC करता है जांच
UGC के अनुसार, जब भी किसी ऐसे संस्थान के खिलाफ शिकायत मिलती है जो बिना अधिकार डिग्री कार्यक्रम चला रहा है, तो आयोग संबंधित संस्था को नोटिस जारी करता है।
संस्था से जवाब और स्पष्टीकरण मांगा जाता है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उसका नाम UGC की फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल कर दिया जाता है।
UGC द्वारा फरवरी 2026 में जारी नवीनतम सूची के अनुसार देश में 32 संस्थानों को फर्जी विश्वविद्यालय घोषित किया गया है।
फर्जी विश्वविद्यालयों पर नजर रखने के लिए बनाई गई AMPC
फर्जी विश्वविद्यालयों और गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों पर नियंत्रण के लिए UGC ने 30 मई 1996 को एंटी-मालप्रैक्टिस सेल (AMPC) की स्थापना की थी। यह सेल ऐसे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करता है जो UGC अधिनियम 1956 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से पाठ्यक्रम संचालित करते हैं या डिग्री प्रदान करते हैं।
UGC ने उठाए कई कदम
छात्रों को जागरूक करने और फर्जी संस्थानों पर रोक लगाने के लिए UGC लगातार कई कदम उठा रहा है। UGC की ओर से उठाए गए प्रमुख कदम:
- अवैध डिग्री देने वाले संस्थानों को कारण बताओ नोटिस और चेतावनी पत्र जारी किए जाते हैं।
- राज्यवार फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची UGC की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाती है।
- सोशल मीडिया और वेबसाइट के माध्यम से छात्रों, अभिभावकों और आम जनता को जागरूक किया जाता है।
- छात्रों को दाखिले से पहले संस्थानों की मान्यता जांचने की सलाह दी जाती है।
- राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से फर्जी संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर FIR दर्ज कराने का अनुरोध किया जाता है।
सरकार ने कहा- छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
राज्यसभा में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार और UGC का उद्देश्य छात्रों को अवैध संस्थानों और अमान्य डिग्री से बचाना है। शिक्षा क्षेत्र में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के तेजी से विस्तार के बीच UGC ने साफ किया है कि केवल वही ऑनलाइन और डिस्टेंस शिक्षा कार्यक्रम मान्य होंगे, जिन्हें आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति प्राप्त है।
