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सरकारी स्कूलों में बदलाव ला रही ‘विद्यांजलि’ पहल, एक साल में 1.27 लाख स्कूल और 32 हजार से ज्यादा स्वयंसेवक जुड़े

देश के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की ‘विद्यांजलि’ पहल को लगातार विस्तार मिल रहा है। इस योजना के तहत समुदाय, स्वयंसेवकों, पूर्व छात्रों, गैर सरकारी संगठनों और कॉरपोरेट संस्थाओं को स्कूलों से जोड़ा जा रहा है, ताकि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 08:22 PM IST
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सरकारी स्कूलों में बदलाव ला रही ‘विद्यांजलि’ पहल, एक साल में 1.27 लाख स्कूल और 32 हजार से ज्यादा स्वयंसेवक जुड़े

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक वर्ष में विद्यांजलि पोर्टल पर 1,27,884 नए स्कूल, 32,581 स्वयंसेवक और 1,126 CSR संगठनों, NGOs और संस्थानों का पंजीकरण हुआ है।

शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी।

NEP 2020 के लक्ष्य से जुड़ी है विद्यांजलि

विद्यांजलि पहल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत समुदाय आधारित शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। NEP 2020 में स्कूलों में स्थानीय समुदाय, अभिभावकों और पूर्व छात्रों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत स्वयंसेवक छात्रों को पढ़ाई में सहायता, साक्षरता अभियान, अतिरिक्त शिक्षण सहयोग, करियर मार्गदर्शन और मेंटरिंग जैसी सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। विद्यांजलि पोर्टल इसी सहयोग को एक व्यवस्थित मंच प्रदान करता है, जहां स्कूल अपनी जरूरतें दर्ज करते हैं और स्वयंसेवक व संस्थाएं उन्हें पूरा करने में मदद करती हैं।

कई राज्यों के स्कूलों में दिखा असर

विद्यांजलि के माध्यम से देश के कई हिस्सों में सरकारी स्कूलों को तकनीकी और आधारभूत सुविधाओं का सहयोग मिला है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में AI और रोबोटिक्स इनोवेशन लैब स्थापित की गई हैं। इससे छात्रों को नई तकनीकों को समझने और प्रयोग करने का अवसर मिल रहा है। राजस्थान के धौलपुर जिले में डिजिटल क्लासरूम तैयार किए गए और शिक्षकों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। मिजोरम के मामित जिले में स्कूलों के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में सरकारी स्कूलों को डेस्कटॉप कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए, जिससे डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिला। बिहार के बेगूसराय में BaLA पेंटिंग और म्यूरल आर्ट के माध्यम से स्कूलों के वातावरण को बच्चों के अनुकूल बनाया गया।

CSR और NGO की भागीदारी के लिए विशेष मॉडल

विद्यांजलि पोर्टल पर CSR संस्थाओं को जोड़ने के लिए दो प्रमुख मॉडल बनाए गए हैं। पहला है CSR Bulk Engagement Model, जिसके तहत कंपनियां कई स्कूलों की जरूरतों को एक साथ पूरा कर सकती हैं। दूसरा है Adopt-a-School Model, जिसमें कोई संस्था किसी एक स्कूल को लंबे समय तक सहयोग प्रदान कर सकती है। NGO को NITI आयोग के NGO DARPAN यूनिक आईडी के माध्यम से जोड़ा जाता है, जबकि CSR संस्थाओं का सत्यापन PAN, GST रजिस्ट्रेशन और उद्योग पंजीकरण जैसे दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है।

डिजिटल पोर्टल से हो रही निगरानी

सरकार ने विद्यांजलि की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया है। पोर्टल के माध्यम से स्वयंसेवकों की भागीदारी, संस्थाओं द्वारा दिए गए सहयोग, स्कूलों में किए गए कार्यों और तैयार की गई सुविधाओं की निगरानी की जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि स्कूलों तक पहुंचने वाला सहयोग सही तरीके से उपयोग हो और जरूरत के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

आकांक्षी जिलों पर विशेष फोकस

सरकार अब विद्यांजलि के तहत विशेष रूप से आकांक्षी और शैक्षणिक रूप से पिछड़े जिलों में काम बढ़ा रही है। स्कूल पोर्टल पर अपनी जरूरतें अपलोड कर सकते हैं, जिसके आधार पर स्वयंसेवक, पूर्व छात्र, CSR संस्थाएं और अन्य संगठन सहायता उपलब्ध कराते हैं। धौलपुर राजस्थान और मामित मिजोरम जैसे जिलों में CSR सहयोग से डिजिटल क्लासरूम, STEM और AI लैब तथा स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के कार्य किए गए हैं।

PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण से होगी सीखने की क्षमता की समीक्षा

शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि छात्रों की सीखने की क्षमता का आकलन करने के लिए PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 आयोजित किया गया। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र PARAKH, NCERT द्वारा कराया गया, जिसमें छात्रों की सीखने की उपलब्धियों का मूल्यांकन किया गया। सर्वेक्षण में तीन शैक्षणिक स्तरों को शामिल किया गया-

  • फाउंडेशनल स्टेज: बाल वाटिका से कक्षा-2 तक
  • प्रारंभिक चरण: कक्षा-3 से कक्षा-5 तक
  • मध्य चरण: कक्षा-6 से कक्षा-8 तक

कक्षा-3, 6 और 9 के छात्रों का मूल्यांकन कर राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर की रिपोर्ट तैयार की गई है।

शिक्षा में जनभागीदारी को बढ़ावा देने की पहल

सरकार का कहना है कि विद्यांजलि केवल संसाधन उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह स्कूलों और समाज के बीच साझेदारी को मजबूत करने का प्रयास है। इस पहल के जरिए सरकारी स्कूलों में तकनीकी शिक्षा, डिजिटल सुविधाएं, बेहतर सीखने का माहौल और छात्रों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में सरकार इस मॉडल को और विस्तार देने की योजना पर काम कर रही है।