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2(f) और 12B स्टेटस के लिए शुरू होगा एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल, NEP 2020 के तहत पारदर्शी व्यवस्था पर जोर

देश के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए मान्यता, स्वीकृति और नियामकीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने डिजिटल सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाया है। UGC ने विभिन्न मान्यताओं और दर्जों के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित किए हैं और अब 2(f) तथा 12B स्टेटस के लिए एकीकृत ऑनलाइन प्रणाली तैयार की गई है।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 08:23 PM IST
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2(f) और 12B स्टेटस के लिए शुरू होगा एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल, NEP 2020 के तहत पारदर्शी व्यवस्था पर जोर


शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि UGC उच्च शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के लिए लगातार नए ऑनलाइन सिस्टम विकसित कर रहा है।

उच्च शिक्षा से जुड़ी प्रक्रियाएं होंगी डिजिटल

UGC ने उच्च शिक्षा संस्थानों की अलग-अलग जरूरतों के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं। इनमें कॉलेजों को स्वायत्त दर्जा देने, डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा देने और ऑनलाइन तथा ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) कार्यक्रमों की निगरानी के लिए पोर्टल शामिल हैं। डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (DEB) पोर्टल के माध्यम से देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में संचालित ऑनलाइन और ODL पाठ्यक्रमों की मान्यता और निगरानी की जाती है। अब हितधारकों से मिले सुझावों के आधार पर UGC ने 2(f) और 12B दर्जा प्रदान करने के लिए एक नया एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है।

2(f) और 12B दर्जे का महत्व

UGC अधिनियम के तहत 2(f) दर्जा किसी विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षा संस्थान को UGC की मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची में शामिल करता है। वहीं 12B दर्जा प्राप्त संस्थान UGC से अनुदान और वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए पात्र हो सकते हैं। नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने से संस्थानों को आवेदन प्रक्रिया में सुविधा मिलेगी और मान्यता देने की प्रक्रिया को तेज व व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

NEP 2020 के अनुरूप बदलेगा उच्च शिक्षा नियमन

सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विजन के तहत उच्च शिक्षा के नियमन को तकनीक आधारित बनाने की योजना बनाई है। इसी दिशा में सरकार ने ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पेश किया है। इस विधेयक में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए सिंगल विंडो इंटरैक्टिव सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव है। यह व्यवस्था सार्वजनिक स्व-प्रकटीकरण (Public Self Disclosure) के आधार पर काम करेगी, जिससे संस्थानों को अपनी जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध करानी होगी।

कम होगी प्रक्रिया की जटिलता, बढ़ेगी जवाबदेही

सरकार के अनुसार, तकनीक आधारित सिंगल विंडो सिस्टम से उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए प्रक्रियाएं आसान होंगी और अलग-अलग अनुमतियों के लिए बार-बार आवेदन करने की जरूरत कम होगी। नई व्यवस्था के प्रमुख उद्देश्य हैं-

  • मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाना
  • निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना
  • अनावश्यक देरी को कम करना
  • संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करना
  • नियामकीय प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना

विधेयक फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति के पास

‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ को फिलहाल संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति को जांच और विचार के लिए भेजा गया है। सरकार का मानना है कि यह विधेयक लागू होने के बाद उच्च शिक्षा क्षेत्र में नियमन की व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।

उच्च शिक्षा में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर जोर

UGC की नई पहल का उद्देश्य देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए मान्यता और नियामकीय प्रक्रियाओं को आसान बनाना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संस्थानों को बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिलेगी।