education

IIT कानपुर, IIT रोपड़, IISc बेंगलुरु और IIT मद्रास में स्थापित AI केंद्रों पर 1490 करोड़ रुपये का निवेश

भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने और देश की स्थानीय जरूरतों के अनुसार AI समाधान विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने चार प्रमुख सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Centre of Excellence) स्थापित किए हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्मार्ट शहरों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में AI तकनीक का प्रभावी उपयोग बढ़ाना है।

Vindhya Dubey06 अग. 2026, 08:24 PM IST
खबर शेयर करें:
IIT कानपुर, IIT रोपड़, IISc बेंगलुरु और IIT मद्रास में स्थापित AI केंद्रों पर 1490 करोड़ रुपये का निवेश


केंद्र सरकार ने “Make AI in India and Make AI work for India” के विजन के तहत इन AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत की है। शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से शोध संस्थानों, उद्योगों और सरकारी संगठनों को एक साथ जोड़कर भारत की समस्याओं के लिए AI आधारित समाधान तैयार किए जा रहे हैं।

बजट 2023-24 में हुई थी तीन AI सेंटर की घोषणा

केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2023-24 में तीन प्रमुख क्षेत्रों के लिए AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की घोषणा की थी। इन तीन केंद्रों के लिए कुल 990 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इनकी जिम्मेदारी देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों को दी गई है-

  • कृषि क्षेत्र के लिए AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस — IIT रोपड़
  • सतत शहरों (Sustainable Cities) के लिए AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस — IIT कानपुर
  • स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस — IISc बेंगलुरु

इन संस्थानों में AI आधारित मॉडल, नई तकनीक और शोध परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र के लिए IIT मद्रास में अलग AI सेंटर

AI तकनीक को शिक्षा क्षेत्र में लागू करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में शिक्षा के लिए एक अलग AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की घोषणा की। इस केंद्र के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसे IIT मद्रास में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में AI के उपयोग को बढ़ावा देना, भारतीय भाषाओं में डिजिटल शिक्षा को मजबूत करना और छात्रों व शिक्षकों के लिए तकनीकी समाधान विकसित करना है।

AI केंद्रों को अब तक जारी हुए 276 करोड़ रुपये से अधिक

सरकार के अनुसार, AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस परियोजना के तहत संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पायलट चरण में वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान संस्थानों के समूहों को 27 करोड़ रुपये जारी किए गए। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 में अब तक-

  • IIT कानपुर को 74.39 करोड़ रुपये
  • IIT रोपड़ को 62.64 करोड़ रुपये
  • IISc बेंगलुरु को 69.07 करोड़ रुपये
  • IIT मद्रास को 43 करोड़ रुपये

जारी किए जा चुके हैं।

शिक्षा क्षेत्र में AI से भारतीय भाषाओं को मिलेगा बढ़ावा

AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एजुकेशन ने शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण मशीन लर्निंग मॉडल विकसित किए हैं। इनमें शामिल हैं-

  • Automatic Speech Recognition (ASR)
  • Optical Character Recognition (OCR)
  • Machine Translation (MT)
  • Text-to-Speech (TTS)

इन तकनीकों का उपयोग भारतीय भाषाओं में डिजिटल शिक्षा को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है। इससे क्षेत्रीय भाषाओं में ऑनलाइन सामग्री तैयार करने, छात्रों की सीखने की क्षमता बढ़ाने और शिक्षा तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

कृषि क्षेत्र में फसल और रोग पहचानने वाले AI मॉडल

कृषि क्षेत्र के AI सेंटर ने किसानों के लिए उपयोगी तकनीक विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। इस केंद्र द्वारा ऐसे AI मॉडल तैयार किए गए हैं जो-

  • फसलों की पहचान
  • कीटों की पहचान
  • पौधों में बीमारी का पता लगाने

में सहायता कर सकते हैं। AI आधारित कृषि समाधान किसानों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने और उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

स्मार्ट शहरों के लिए AI से होगी बेहतर योजना

सतत शहरों के लिए बनाए गए AI सेंटर ने शहरी समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक विकसित की है। इसमें प्रमुख रूप से-

  • वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान
  • शहरी बाढ़ की भविष्यवाणी

जैसे AI मॉडल शामिल हैं। इन तकनीकों के जरिए शहरों में आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और बेहतर शहरी योजना बनाने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में AI से बदल सकती है चिकित्सा व्यवस्था

स्वास्थ्य क्षेत्र के AI सेंटर का उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी और सटीक बनाना है। AI तकनीक के जरिए रोगों की पहचान, स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण और बेहतर उपचार योजना तैयार करने में मदद मिल सकती है। हालांकि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के विकसित किए गए विशिष्ट मॉडल की जानकारी सीमित रूप से साझा की है, लेकिन इस क्षेत्र में AI आधारित शोध और नवाचार पर लगातार काम किया जा रहा है।

AI केंद्रों की निगरानी के लिए बनाई गई विशेष व्यवस्था

सरकार ने बताया कि इन AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है। इसके लिए कई स्तरों पर निगरानी व्यवस्था बनाई गई है-

  • एपेक्स कमेटी

इसमें उद्योग जगत के विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो परियोजनाओं की दिशा और प्रगति की समीक्षा करते हैं।

  • प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग एंड रिव्यू कमेटी (PMRC)

यह समिति अलग-अलग परियोजनाओं की प्रगति और लक्ष्यों की निगरानी करती है।

  • सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (CPMU)

यह इकाई बाहरी विशेषज्ञों के माध्यम से तकनीकी विकास और वित्तीय उपयोग की समीक्षा कराती है।

भारत में AI आधारित भविष्य की तैयारी

सरकार का कहना है कि AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्देश्य केवल तकनीकी शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए AI का उपयोग करना है। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में AI आधारित समाधान विकसित करके भारत को डिजिटल और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ये AI केंद्र भारत में नवाचार, रोजगार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।