railway

कतार से क्लिक तक: भारतीय रेलवे की नई आरक्षण प्रणाली से बदल जाएगा टिकट बुकिंग का अनुभव

भारतीय रेलवे ने अपनी अगली पीढ़ी की क्लाउड आधारित यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS) का चरणबद्ध संचालन शुरू कर दिया है। नई प्रणाली प्रति मिनट 1.5 लाख से अधिक टिकट बुक करने और 40 लाख से अधिक पूछताछ संभालने में सक्षम होगी। AI, मशीन लर्निंग और क्लाउड तकनीक से लैस यह प्लेटफॉर्म तेज, सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय टिकट बुकिंग अनुभव प्रदान करेगा। इससे तत्काल टिकट बुकिंग, वेटिंग लिस्ट प्रबंधन, बहुभाषी सेवाओं और डिजिटल रेलवे सेवाओं को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

Anshuman Mishra07 अग. 2026, 05:07 PM IST
खबर शेयर करें:
कतार से क्लिक तक: भारतीय रेलवे की नई आरक्षण प्रणाली से बदल जाएगा टिकट बुकिंग का अनुभव

भारत: भारतीय रेलवे देश के करोड़ों यात्रियों को हर दिन एक स्थान से दूसरे स्थान तक जोड़ने वाली जीवनरेखा है। पिछले चार दशकों में रेलवे की यात्री आरक्षण प्रणाली (Passenger Reservation System-PRS) ने लंबा सफर तय किया है। वर्ष 1986 में मैनुअल टिकट बुकिंग व्यवस्था की जगह शुरू हुई यह प्रणाली अब क्लाउड आधारित अगली पीढ़ी के डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदल रही है। रेलवे का दावा है कि नई प्रणाली पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय होगी, जिससे विशेषकर तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। 

भारतीय रेलवे ने अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से नई पीढ़ी की पीआरएस प्रणाली को लागू करना शुरू कर दिया है। यह केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि रेलवे के डिजिटल परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण चरण है। नई प्रणाली का उद्देश्य तेजी से बढ़ती डिजिटल बुकिंग, यात्रियों की बढ़ती संख्या और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आरक्षण व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाना है।  

रेलवे आरक्षण प्रणाली क्या है?
यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) भारतीय रेलवे का केंद्रीय कंप्यूटरीकृत नेटवर्क है, जिसके माध्यम से आरक्षित टिकटों की बुकिंग, टिकट रद्द करना, सीट आवंटन, प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट), आरएसी, आरक्षण चार्ट तैयार करना और पीएनआर संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। यह प्रणाली रेलवे काउंटर, आईआरसीटीसी की वेबसाइट, मोबाइल ऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों को एकीकृत करती है, जिससे देश के किसी भी हिस्से से किसी भी ट्रेन का आरक्षित टिकट बुक किया जा सकता है। 

चार दशक का सफर
1986 में पीआरएस की शुरुआत के साथ रेलवे ने मैनुअल रजिस्टर आधारित टिकट व्यवस्था को कंप्यूटरीकृत प्रणाली में बदल दिया। 1990 के दशक में इसे विभिन्न रेलवे जोनों से जोड़कर राष्ट्रीय नेटवर्क बनाया गया। वर्ष 2002 में इंटरनेट के माध्यम से टिकट बुकिंग शुरू हुई, जबकि 2014 में अगली पीढ़ी की ई-टिकटिंग प्रणाली लागू की गई। 2025 में रेलवन (RailOne) ऐप लॉन्च हुआ और अब 2026 में क्लाउड आधारित नई पीआरएस प्रणाली लागू की जा रही है। 

डिजिटल बुकिंग में तेजी
भारतीय रेलवे के अनुसार जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के माध्यम से लगभग 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए। इनमें से लगभग 57.90 करोड़ टिकट यानी करीब 89 प्रतिशत ऑनलाइन बुक हुए। यह दर्शाता है कि भारतीय यात्री तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म अपना रहे हैं और रेलवे की ऑनलाइन सेवाओं पर भरोसा बढ़ा है। वर्तमान में यह प्रणाली प्रतिदिन 20.5 लाख से अधिक यात्रियों को सेवाएं देती है तथा लगभग 73 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस माध्यमों से होते हैं। 

नई पीआरएस में क्या बदलेगा?
रेलवे के अनुसार वर्तमान प्रणाली जहां प्रति मिनट लगभग 32 हजार टिकट बुक कर सकती है, वहीं नई क्लाउड आधारित प्रणाली प्रति मिनट 1.5 लाख से अधिक टिकट बुक करने में सक्षम होगी। इसी तरह पूछताछ (इन्क्वायरी) की क्षमता भी 4 लाख प्रति मिनट से बढ़कर 40 लाख प्रति मिनट से अधिक हो जाएगी। नई प्रणाली में बहुभाषी इंटरफेस, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव, अधिक विश्वसनीय सर्वर और भविष्य की मांग के अनुसार क्षमता बढ़ाने की सुविधा होगी। 

आईआरसीटीसी की वेबसाइट और मोबाइल अनुभव भी बदलेगा
रेलवे नई पीआरएस को आईआरसीटीसी की पुनः डिज़ाइन की गई वेबसाइट और रेलवन ऐप के साथ एकीकृत कर रहा है। नए प्लेटफॉर्म में कम चरणों में टिकट बुकिंग, सभी श्रेणियों में सीट उपलब्धता की बेहतर जानकारी और सरल इंटरफेस मिलेगा। रेलवन ऐप पहले ही करोड़ों डाउनलोड प्राप्त कर चुका है और इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वेटिंग टिकट कन्फर्मेशन प्रेडिक्शन जैसी सुविधा भी उपलब्ध है, जिसकी सटीकता पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। 

सीआरआईएस की भूमिका
रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) भारतीय रेलवे का प्रमुख तकनीकी संगठन है, जिसकी स्थापना 1986 में हुई थी। यही संस्था पीआरएस, राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (NTES), यूटीएस, रेलमदद, रेलवन और रेलवे की अनेक डिजिटल सेवाओं का विकास और संचालन करती है। आज भारतीय रेलवे के डिजिटल परिवर्तन में सीआरआईएस की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल
नई पीआरएस केवल सर्वर अपग्रेड नहीं है बल्कि इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), बिग डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ब्लॉकचेन तथा ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से ट्रेन संचालन, ऊर्जा प्रबंधन, रखरखाव, वेटिंग टिकट की संभावना का अनुमान और परिचालन संबंधी निर्णय अधिक प्रभावी ढंग से लिए जा सकेंगे। 

यात्रियों को क्या लाभ मिलेगा?
नई प्रणाली लागू होने के बाद तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान वेबसाइट और ऐप के क्रैश होने की संभावना कम होगी। अधिक यात्रियों को एक साथ टिकट बुक करने की सुविधा मिलेगी। टिकट बुकिंग और पीएनआर पूछताछ पहले से कहीं अधिक तेज होगी। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान भारी ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा। बहुभाषी इंटरफेस के कारण विभिन्न राज्यों के यात्रियों को सुविधा मिलेगी। क्लाउड आधारित संरचना के कारण सेवा अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय होगी। एआई आधारित वेटिंग टिकट अनुमान यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद करेगा। 

यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और प्रतिदिन करोड़ों लोग रेलवे सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिक केंद्रित बनाया जा रहा है। रेलवे की नई आरक्षण प्रणाली इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग की लगातार बढ़ती मांग, तत्काल टिकट के समय सर्वर पर बढ़ते दबाव और भविष्य में यात्री संख्या में संभावित वृद्धि को देखते हुए यह आधुनिकीकरण आवश्यक माना जा रहा है। इससे रेलवे की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, यात्रियों का समय बचेगा और डिजिटल सेवाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा। 

रेल मंत्रालय और रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) के अनुसार अगली पीढ़ी की यह क्लाउड आधारित पीआरएस भारतीय रेलवे को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रणाली अपने निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य करती है तो भारतीय रेलवे की डिजिटल सेवाएं दुनिया की सबसे उन्नत सार्वजनिक ऑनलाइन टिकटिंग प्रणालियों में और अधिक मजबूत स्थान हासिल कर सकती हैं।