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फर्जी डेटा देने वाली दवा कंपनियों पर केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई; नए औषधि नियम लागू, गलत दस्तावेज देने वालों के भविष्य के आवेदन भी होंगे प्रतिबंधित

देश की औषधि नियामक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में महत्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित किए हैं। अब यदि कोई दवा निर्माता, आयातक या अन्य आवेदक लाइसेंस अथवा मंजूरी के लिए फर्जी, मनगढ़ंत या भ्रामक वैज्ञानिक आंकड़े एवं दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो उसका आवेदन केवल खारिज ही नहीं होगा, बल्कि उसे निर्धारित अवधि तक नए आवेदन करने से भी प्रतिबंधित किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से दवा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

Priyanka Gaikwad07 अग. 2026, 05:10 PM IST
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फर्जी डेटा देने वाली दवा कंपनियों पर केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई; नए औषधि नियम लागू, गलत दस्तावेज देने वालों के भविष्य के आवेदन भी होंगे प्रतिबंधित
नई दिल्ली  (New Delhi) : देश में दवा निर्माण और उनकी गुणवत्ता को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 (Drugs Rules, 1945) में संशोधन अधिसूचित करते हुए ऐसे आवेदकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया है, जो लाइसेंस या अन्य नियामकीय मंजूरी प्राप्त करने के लिए फर्जी, मनगढ़ंत अथवा भ्रामक वैज्ञानिक आंकड़े और दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं। यह संशोधन औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम भारत की औषधि विनियामक प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप अधिक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या हैं नए नियम? 
नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी कंपनी, संस्था या आवेदक द्वारा दवा के लाइसेंस, निर्माण, आयात या अन्य नियामकीय अनुमति के लिए आवेदन करते समय फर्जी दस्तावेज, गलत वैज्ञानिक डेटा या मनगढ़ंत जानकारी प्रस्तुत की जाती है, तो संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकरण को उसके खिलाफ अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार होगा। अब केवल आवेदन अस्वीकार करना या मौजूदा लाइसेंस रद्द करना ही पर्याप्त नहीं होगा। यदि आवेदक जानबूझकर गलत जानकारी देता है, तो उसे एक निर्धारित अवधि तक राज्य या केंद्र के संबंधित नियामक प्राधिकरण के समक्ष कोई नया आवेदन दाखिल करने की अनुमति भी नहीं मिलेगी।

पहले क्या व्यवस्था थी? 
अब तक यदि किसी आवेदन में गलत या फर्जी जानकारी पाई जाती थी, तो नियामक संस्था संबंधित आवेदन को खारिज कर सकती थी या पहले से जारी लाइसेंस को रद्द कर सकती थी। हालांकि, संबंधित संस्था दोबारा नया आवेदन देकर प्रक्रिया शुरू कर सकती थी। संशोधित नियमों के बाद ऐसे आवेदकों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाया जाएगा, जिससे वे निश्चित अवधि तक किसी भी नए लाइसेंस या अनुमति के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। इससे नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अधिक प्रभावी अंकुश लगेगा।

बिना सुनवाई नहीं होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संस्था के खिलाफ सीधे कार्रवाई नहीं की जाएगी। पहले संबंधित संस्था को 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी किया जाएगा, जिसमें उससे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यदि जांच के दौरान आरोप सही पाए जाते हैं, तभी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रभावित संस्था को नियमानुसार अपील करने का अधिकार भी दिया गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप रहे।

क्यों जरूरी था यह संशोधन?
मंत्रालय के अनुसार, किसी भी दवा की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता का आकलन पूरी तरह वैज्ञानिक परीक्षणों और प्रमाणित आंकड़ों पर आधारित होता है। यदि कोई संस्था गलत या मनगढ़ंत डेटा प्रस्तुत करती है, तो उसके आधार पर दवा की मंजूरी मिलने से मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। फर्जी डेटा न केवल नियामकीय प्रक्रिया की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर जोखिम बन सकता है। इसी कारण ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता महसूस की गई।

ईमानदार कंपनियों को मिलेगा लाभ
सरकार का कहना है कि यह संशोधन उन दवा कंपनियों और निर्माताओं के हित में भी है, जो सभी नियमों का पालन करते हुए गुणवत्ता मानकों के अनुरूप दवाओं का निर्माण करते हैं। सख्त नियम लागू होने से गलत तरीके अपनाने वाली संस्थाओं पर अंकुश लगेगा और नियमों का पालन करने वाली कंपनियों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का वातावरण मिलेगा।

वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत होगा नियामक ढांचा
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह संशोधन भारत की औषधि नियामक प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार लगातार दवा क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने, नैतिक मानकों को प्रोत्साहित करने और अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सुधार लागू कर रही है। नए नियमों से दवा उद्योग में जवाबदेही बढ़ेगी, नियामकीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी और मरीजों तक सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी दवाएं पहुंचाने के सरकार के उद्देश्य को और मजबूती मिलेगी।