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'इंडिया-एआई मिशन' और 'सेमीकॉन 2.0' को मिली रफ्तार; स्वदेशी एआई मॉडल, कंप्यूट क्षमता और चिप निर्माण से तकनीकी आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ी छलांग

केंद्र सरकार ने 'इंडिया-एआई मिशन' और 'सेमीकॉन 2.0' जैसी दो महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। स्वदेशी एआई मॉडल, उच्च क्षमता वाली कंप्यूट सुविधा, अनुसंधान, स्टार्टअप, चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर निर्माण को व्यापक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन पहलों से विदेशी तकनीक पर भारत की निर्भरता कम होगी और देश तकनीकी क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनेगा। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

Priyanka Gaikwad07 अग. 2026, 05:13 PM IST
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'इंडिया-एआई मिशन' और 'सेमीकॉन 2.0' को मिली रफ्तार; स्वदेशी एआई मॉडल, कंप्यूट क्षमता और चिप निर्माण से तकनीकी आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ी छलांग
भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 'इंडिया-एआई मिशन' और 'सेमीकॉन 2.0' जैसी दो महत्वपूर्ण योजनाओं को गति दी है। इन योजनाओं के माध्यम से स्वदेशी एआई मॉडल, उच्च क्षमता वाली कंप्यूट सुविधा, अनुसंधान, स्टार्टअप, चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर निर्माण को व्यापक बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री के "तकनीक सबके लिए" के विजन के अनुरूप भारत की एआई रणनीति तैयार की गई है। इसका उद्देश्य भारतीय जरूरतों के अनुरूप एआई आधारित समाधान विकसित करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना, उद्योगों को मजबूती देना तथा आम नागरिकों तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ पहुंचाना है।

'इंडिया-एआई मिशन' के लिए 10,371.92 करोड़ रुपये का प्रावधान: 7 मार्च 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'इंडिया-एआई मिशन' को मंजूरी दी। इस मिशन के लिए अगले पांच वर्षों में 10,371.92 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य विश्वस्तरीय एआई इकोसिस्टम विकसित करना, अनुसंधान को गति देना तथा शासन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई के उपयोग को बढ़ावा देना है।

20 स्वदेशी फाउंडेशन एआई मॉडल का चयन:  30 जनवरी 2025 को सरकार ने स्वदेशी फाउंडेशन एआई मॉडल विकसित करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। प्राप्त 506 प्रस्तावों में से 20 प्रस्तावों का चयन किया गया। इनमें 12 लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल (LMM) और 8 स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (SLM) शामिल हैं। इन सभी मॉडलों के बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) संबंधित भारतीय कंपनियों के पास ही रहेंगे।

एआई के लिए उच्च क्षमता वाली कंप्यूट सुविधा:  देश के शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को अत्याधुनिक कंप्यूट क्षमता उपलब्ध कराने के लिए चार चरणों में 15 कंप्यूट सेवा प्रदाताओं का चयन किया गया है। अब तक 237 परियोजनाओं को सब्सिडी आधारित कंप्यूट सुविधा प्रदान की गई है तथा 93.18 लाख GPU घंटे आवंटित किए जा चुके हैं। इसके अलावा दिल्ली के शास्त्री पार्क स्थित एनआईसी डेटा सेंटर में लगभग 1.1 एक्साफ्लॉप्स क्षमता वाली हाई-परफॉर्मेंस एआई कंप्यूट प्रणाली विकसित की जा रही है।

सार्वजनिक सेवाओं में एआई का उपयोग:  एआई आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 11 राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन और नवाचार प्रतियोगिताओं का आयोजन किया है। इनके माध्यम से 62 एआई प्रोटोटाइप विकसित किए गए हैं, जिनमें से 20 एआई आधारित समाधान विभिन्न सार्वजनिक संस्थानों में सफलतापूर्वक लागू किए जा चुके हैं।

58 एआई उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी :  देशभर में एआई अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए 58 एआई उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी गई है। इनमें से 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 22 केंद्र कार्यरत हो चुके हैं। ये केंद्र अनुसंधान, प्रशिक्षण, उद्योग सहयोग और नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

सुरक्षित और भरोसेमंद एआई पर विशेष जोर :  सरकार ने पूर्वाग्रह-मुक्त (Bias-free) एआई, मशीन अनलर्निंग, गोपनीयता संरक्षण, एल्गोरिदम ऑडिटिंग और एआई की पारदर्शिता बढ़ाने से जुड़े 13 अनुसंधान परियोजनाओं का चयन किया है। सुरक्षित और जिम्मेदार एआई के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राष्ट्रीय साइबर-फिजिकल सिस्टम्स मिशन: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग 3,660 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स मिशन (NM-ICPS) संचालित कर रहा है। इसके तहत देशभर के विभिन्न आईआईटी और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (TIH) स्थापित किए गए हैं, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और फिनटेक जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अनुसंधान किया जा रहा है।

सेमीकंडक्टर निर्माण को ऐतिहासिक बढ़ावा: जनवरी 2022 में शुरू किए गए 'सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम' के तहत सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब, चिप पैकेजिंग और भारतीय डिजाइन वाली चिप्स को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अब तक 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 12 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से तीन परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।

'सेमीकॉन 2.0' के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट:  15 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'सेमीकॉन 2.0' को मंजूरी दी। इस योजना के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसके तहत भारतीय डिजाइन वाली चिप्स, अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग, औद्योगिक गैस, उपकरण तथा संपूर्ण सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के स्वदेशी विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा भारत ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के दौरान अमेरिका और अन्य साझेदार देशों के साथ 'पैक्स सिलिका' गठबंधन में भागीदारी की है। इसका उद्देश्य वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाना है।

एआई क्षेत्र में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर:  स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रिपोर्ट (नवंबर 2025) के अनुसार एआई प्रतिस्पर्धात्मकता के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है। वहीं GitHub पर एआई परियोजनाओं में भारत दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है। हालांकि वर्तमान में भारत की एआई कंप्यूट क्षमता वैश्विक GPU आपूर्ति पर निर्भर है, लेकिन स्वदेशी एआई कंप्यूट प्रणाली और सेमीकंडक्टर निर्माण के विकास से आने वाले समय में विदेशी तकनीक पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।