government
डीपफेक पर केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई; AI-जनित कंटेंट पर लेबल अनिवार्य, गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा घटाकर सिर्फ 3 घंटे
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक के बढ़ते उपयोग और इसके साथ तेजी से बढ़ रहे डीपफेक के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। अब AI से तैयार किए गए फोटो, वीडियो, ऑडियो और टेक्स्ट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही सरकार या न्यायालय के आदेश मिलने के बाद गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर मात्र 3 घंटे कर दी गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य मध्यस्थों की जवाबदेही भी पहले से कहीं अधिक बढ़ा दी गई है।
Priyanka Gaikwad07 अग. 2026, 05:14 PM IST
नई दिल्ली (New Delhi): देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) तकनीक का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही डीपफेक वीडियो, फर्जी ऑडियो, एडिट की गई तस्वीरें और भ्रामक टेक्स्ट के जरिए लोगों को गुमराह करने, आर्थिक धोखाधड़ी करने, प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और सामाजिक अशांति फैलाने जैसी घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में व्यापक संशोधन कर नियामक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाया है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा 10 फरवरी 2026 को लागू किए गए संशोधित नियमों का उद्देश्य डीपफेक और अन्य AI-जनित सामग्री के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसकी जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
AI-जनित सामग्री की पहचान अनिवार्य : नए नियमों के तहत AI की सहायता से तैयार किए गए किसी भी फोटो, वीडियो, ऑडियो या लिखित सामग्री पर स्पष्ट रूप से यह दर्शाना अनिवार्य होगा कि वह कृत्रिम रूप से तैयार की गई है। इसके अलावा ऐसी सामग्री में ट्रेस किए जा सकने वाले मेटाडेटा (Metadata) का उपयोग भी आवश्यक होगा, जिससे उसकी पहचान की जा सके। सरकार का मानना है कि इससे आम नागरिक वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच आसानी से अंतर कर सकेंगे तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की घटनाओं में कमी आएगी।
गैरकानूनी सामग्री हटाने के लिए केवल 3 घंटे : पहले सरकार या न्यायालय के आदेश मिलने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक या गैरकानूनी सामग्री हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। संशोधित नियमों के अनुसार अब यह समय घटाकर मात्र 3 घंटे कर दिया गया है। इसके अलावा संवेदनशील मामलों जैसे बिना सहमति साझा की गई अंतरंग तस्वीरें, बाल यौन शोषण सामग्री, प्रतिरूपण (Impersonation), पहचान छिपाने वाले कंटेंट और अन्य गंभीर श्रेणी की शिकायतों पर भी पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से कार्रवाई करना अनिवार्य कर दिया गया है।
किन प्रकार की सामग्री पर रहेगा प्रतिबंध
संशोधित नियमों के तहत निम्नलिखित प्रकार की सामग्री प्रतिबंधित मानी जाएगी—
संशोधित नियमों के तहत निम्नलिखित प्रकार की सामग्री प्रतिबंधित मानी जाएगी—
- AI के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति का फर्जी रूप धारण करना।
- डीपफेक वीडियो, ऑडियो या तस्वीरें तैयार कर उनका प्रसार करना।
- झूठी, भ्रामक या अफवाह फैलाने वाली जानकारी प्रकाशित करना।
- अश्लील, पोर्नोग्राफिक अथवा निजता का उल्लंघन करने वाली सामग्री।
- बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री।
- राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली सामग्री।
- किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली फर्जी या भ्रामक सामग्री।
सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ी जिम्मेदारी :देश में 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं वाले सोशल मीडिया मध्यस्थों को अब अतिरिक्त दायित्वों का पालन करना होगा। इनमें AI-जनित और गैरकानूनी सामग्री की पहचान के लिए स्वचालित तकनीकी उपकरणों का उपयोग, संदिग्ध सामग्री पर त्वरित कार्रवाई, भारत में शिकायत निवारण अधिकारी एवं अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति, मासिक अनुपालन रिपोर्ट जारी करना, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करना तथा उपयोगकर्ताओं को नियमों के उल्लंघन के परिणामों की जानकारी देना शामिल है।
शिकायत निवारण व्यवस्था हुई मजबूत: प्रत्येक मध्यस्थ के लिए शिकायत अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य होगा। यदि उपयोगकर्ता की शिकायत का समाधान निर्धारित समय में नहीं किया जाता है, तो वह ग्रिवेंस अपीलेट कमेटी (GAC) के समक्ष ऑनलाइन अपील कर सकता है। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर डीपफेक, साइबर धोखाधड़ी, सोशल मीडिया दुरुपयोग और अन्य साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। नागरिकों की सहायता के लिए 1930 साइबर हेल्पलाइन भी उपलब्ध है।
कानूनी कार्रवाई का प्रावधान: डीपफेक या AI के माध्यम से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के विभिन्न प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इनमें पहचान की चोरी, प्रतिरूपण, ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार करना, झूठी एवं भ्रामक सूचना फैलाना, अश्लील सामग्री का प्रसारण तथा संगठित साइबर अपराध जैसे मामलों में अभियोजन चलाया जा सकेगा।
नियमों का पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाई: यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या मध्यस्थ सूचना प्रौद्योगिकी नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाला 'सेफ हार्बर' संरक्षण समाप्त हो जाएगा। इसके बाद ऐसे प्लेटफॉर्म के खिलाफ प्रचलित कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई और अभियोजन चलाया जा सकेगा।
भारत में डीपफेक पहचान तकनीक पर जोर: इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत सुरक्षित और जिम्मेदार AI विकास को बढ़ावा देने के लिए देशभर में 13 अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें IIT जोधपुर, IIT मद्रास और IIT खड़गपुर सहित कई प्रमुख संस्थान डीपफेक पहचान तकनीक विकसित कर रहे हैं। इन परियोजनाओं में मल्टी-एजेंट डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम, रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन और ऑडियो-वीडियो फर्जीवाड़ा पहचान प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर कार्य किया जा रहा है।
जागरूकता अभियान भी जारी: केंद्र सरकार नागरिकों को साइबर सुरक्षा और डीपफेक के खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए हर वर्ष साइबर सुरक्षा जागरूकता माह, सुरक्षित इंटरनेट दिवस, साइबर जागरूकता दिवस तथा अन्य जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती है। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) समय-समय पर एडवाइजरी, सुरक्षा दिशानिर्देश, इन्फोग्राफिक्स और जागरूकता सामग्री भी जारी करता है।
सरकार का उद्देश्य : केंद्र सरकार का कहना है कि इन संशोधित नियमों का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित, जिम्मेदार और पारदर्शी उपयोग को बढ़ावा देना, नागरिकों की निजता की रक्षा करना, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विश्वास बनाए रखना है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से डीपफेक और AI आधारित साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और देश में सुरक्षित एवं जवाबदेह डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण होगा।
