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आस्था से विकास तक: बस्ती के शिव मंदिर को मिलेगा नया स्वरूप, पर्यटन परियोजना को मिली वित्तीय मजबूती
उत्तर प्रदेश सरकार ने बस्ती जिले के ग्राम पंचायत भुवनी चानापार स्थित शिव मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 10.51 लाख रुपये की दूसरी वित्तीय किस्त जारी करने की मंजूरी दी है। यह परियोजना पहले से स्वीकृत 16.71 लाख रुपये की योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मंदिर परिसर को धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करना, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देना है। सरकार ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सोशल ऑडिट, समयबद्ध क्रियान्वयन और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई सख्त शर्तें भी निर्धारित की हैं। यह पहल उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मजबूत करने तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने बस्ती जिले के भुवनी चानापार ग्राम पंचायत स्थित प्राचीन शिव मंदिर को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पर्यटन विभाग द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार जिला योजना के अंतर्गत संचालित इस परियोजना के लिए 10.51 लाख रुपये की दूसरी किस्त जारी करने की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे पहले मार्च 2025 में इस परियोजना के लिए 16.71 लाख रुपये (जीएसटी सहित) की कुल प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई थी, जिसमें प्रथम किस्त के रूप में 3 लाख रुपये जारी किए गए थे। अब शेष कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए दूसरी किस्त जारी की गई है, जबकि जीएसटी एवं लेबर सेस का भुगतान वास्तविक व्यय के आधार पर नियमानुसार किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को सौंपी है। शासनादेश के अनुसार यह परियोजना केवल मंदिर परिसर के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्थानीय पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करना है। हालांकि शासनादेश में प्रस्तावित निर्माण कार्यों जैसे प्रवेश द्वार, पार्किंग, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय या सौंदर्यीकरण का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन सुविधाओं का उल्लेख आधिकारिक दस्तावेज में उपलब्ध नहीं है।
शासनादेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जारी की गई धनराशि का उपयोग केवल स्वीकृत परियोजना पर ही किया जाएगा। किसी अन्य कार्य में इस राशि का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों और स्वीकृत आगणन के अनुरूप होगा तथा इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था की होगी। परियोजना की निगरानी पर्यटन विभाग के महानिदेशक स्तर पर की जाएगी और समय-समय पर प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।
सरकार ने परियोजना में वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। वास्तविक भुगतान के आधार पर जीएसटी का भुगतान किया जाएगा और संबंधित प्रमाणपत्र शासन को उपलब्ध कराना होगा। लेबर सेस जमा किए जाने का प्रमाण भी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilization Certificate), निर्माण कार्य की गुणवत्ता संबंधी प्रमाण, फोटोग्राफ तथा अन्य अभिलेख निर्धारित प्रारूप में शासन और महालेखाकार को उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही सोशल ऑडिट के प्रावधानों का पालन भी अनिवार्य किया गया है।
शासनादेश में यह भी निर्देश दिया गया है कि परियोजना के अंतर्गत यदि सोलर लाइट अथवा सौर ऊर्जा आधारित उपकरण लगाए जाते हैं तो उनकी खरीद उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA) के माध्यम से की जाएगी। इससे ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने समयबद्ध कार्य पूरा करने पर विशेष जोर दिया है। परियोजना पूर्ण होने के एक माह के भीतर क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यदि संबंधित अधिकारी या कार्यदायी संस्था समय पर क्लोजर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराती है तो इसे गंभीर अनियमितता माना जाएगा और संबंधित परियोजना प्रबंधक, अपर परियोजना प्रबंधक तथा ठेकेदार के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराने तक की कार्रवाई की जा सकती है। यह प्रावधान सरकारी परियोजनाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन उत्तर प्रदेश की पर्यटन नीति का एक महत्वपूर्ण आधार है। राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या, काशी, चित्रकूट, नैमिषारण्य, विंध्य क्षेत्र और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास पर लगातार निवेश कर रही है। इसी क्रम में जिला स्तर के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को भी पर्यटन मानचित्र पर लाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि स्थानीय स्तर पर भी पर्यटन गतिविधियों का विस्तार हो सके। भुवनी चानापार स्थित शिव मंदिर के विकास को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह पृष्ठभूमि उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की सार्वजनिक नीति पर आधारित सामान्य संदर्भ है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं के विकास से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है, स्थानीय व्यापार को गति मिलती है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। मंदिरों के आसपास होटल, भोजनालय, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को भी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है। साथ ही क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक आधार मिलता है। यह सामान्य विश्लेषण धार्मिक पर्यटन के आर्थिक प्रभावों पर आधारित है।
हालांकि उपलब्ध शासनादेश में मुख्यमंत्री, पर्यटन मंत्री, पर्यटन विभाग के महानिदेशक या किसी अन्य जनप्रतिनिधि का कोई आधिकारिक बयान अथवा उद्धरण शामिल नहीं है। इसी प्रकार मंदिर के इतिहास, प्रतिवर्ष आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या या प्रस्तावित निर्माण कार्यों का विस्तृत तकनीकी विवरण भी इस दस्तावेज में उपलब्ध नहीं है। फिलहाल आधिकारिक रूप से यह पुष्टि की गई है कि परियोजना की दूसरी किस्त के रूप में 10.51 लाख रुपये जारी करने की स्वीकृति प्रदान की गई है तथा निर्माण कार्य निर्धारित वित्तीय, तकनीकी और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा किया जाएगा।
