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डिजिटल अरेस्ट मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई; एक्सिस बैंक के डिप्टी मैनेजर समेत पुलवामा के फर्म मालिक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

दिल्ली के एक वरिष्ठ नागरिक से 1.6 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा स्थित एक निजी फर्म के मालिक और एक्सिस बैंक के एक डिप्टी मैनेजर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच में इस साइबर ठगी के पीछे दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय संगठित गिरोह की भूमिका सामने आई है।

Priyanka Gaikwad07 अग. 2026, 05:15 PM IST
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डिजिटल अरेस्ट मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई; एक्सिस बैंक के डिप्टी मैनेजर समेत पुलवामा के फर्म मालिक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
नई दिल्ली (New Delhi) : डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में बढ़ रहे साइबर अपराधों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए दिल्ली के एक वरिष्ठ नागरिक से 1.6 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा स्थित एक निजी फर्म के मालिक और एक्सिस बैंक के एक डिप्टी मैनेजर के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला देश में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट घोटालों की गंभीरता को उजागर करता है, जिसमें अपराधी सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को मानसिक रूप से डराकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे हैं।

जांच के अनुसार, आरोपियों ने खुद को पुलिस, CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED), न्यायपालिका और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया। वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को यह विश्वास दिलाया गया कि वह एक गंभीर आपराधिक मामले में फंस चुका है और उसकी गिरफ्तारी तय है। उसे कई घंटों तक तथाकथित "डिजिटल अरेस्ट" में रखा गया तथा गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.6 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। यह मामला सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच दिल्ली पुलिस से CBI को सौंपी गई। जनवरी 2026 में CBI ने नियमित मामला दर्ज कर व्यापक जांच शुरू की। जांच के दौरान एजेंसी ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजेक्शन, वित्तीय रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। इसी दौरान पुलवामा स्थित एक निजी फर्म के बैंक खाते की पहचान हुई, जिसमें ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा जमा कराया गया था। इसके बाद फर्म के मालिक को गिरफ्तार किया गया।

CBI की जांच में यह भी सामने आया कि एक्सिस बैंक के तत्कालीन डिप्टी मैनेजर ने बैंकिंग नियमों की अनदेखी करते हुए संदिग्ध खातों के संचालन और अवैध धनराशि के हस्तांतरण को आसान बनाया। जांच एजेंसी के अनुसार, बैंक अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग कर आरोपियों की मदद की और इसके बदले ठगी की रकम का हिस्सा भी प्राप्त किया। इसी आधार पर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस पूरे साइबर फ्रॉड के पीछे दक्षिण-पूर्व एशिया में संचालित एक अंतरराष्ट्रीय संगठित साइबर अपराध गिरोह सक्रिय है। यह गिरोह भारत में मौजूद बैंक खातों, फर्जी कंपनियों, म्यूल अकाउंट्स और स्थानीय सहयोगियों के माध्यम से ठगी की रकम को विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर उसका स्रोत छिपाने का प्रयास करता था। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।

CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, चोरी की संपत्ति प्राप्त करने, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगाए हैं। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग कर प्रतिरूपण एवं साइबर धोखाधड़ी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग से जुड़े प्रावधान भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं। CBI ने स्पष्ट किया है कि बैंकिंग प्रणाली, दूरसंचार सेवाओं या किसी भी वित्तीय संस्था का दुरुपयोग कर साइबर अपराधियों की सहायता करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी ने कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ केवल अपराधियों ही नहीं, बल्कि उन्हें सहयोग देने वाले लोगों पर भी समान रूप से कार्रवाई की जाएगी।

एजेंसी ने नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील करते हुए कहा कि "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई कानूनी व्यवस्था भारतीय कानून में मौजूद नहीं है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस, CBI, ED, आयकर विभाग, अदालत या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के माध्यम से डराता है, धन जमा कराने का दबाव बनाता है या गिरफ्तारी की धमकी देता है, तो ऐसे दावों पर विश्वास न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या वीडियो कॉल की तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर संबंधित स्थानीय पुलिस को सूचित करें। CBI का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी, बैंकिंग विवरण, OTP या धनराशि साझा न करें तथा संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं, ताकि साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।