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राम मंदिर में 2743 नित्य दर्शन पास अमान्य, साधु-संत और स्थानीय श्रद्धालु परेशान

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद बदली गई नित्य दर्शन पास व्यवस्था अभी तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। इसके चलते लंबे समय से प्रतिदिन रामलला के दर्शन करने वाले साधु-संतों और अयोध्या के स्थानीय श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

Vindhya Dubey07 अग. 2026, 05:18 PM IST
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राम मंदिर में 2743 नित्य दर्शन पास अमान्य, साधु-संत और स्थानीय श्रद्धालु परेशान

जानकारी के अनुसार, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक समीक्षा शुरू की गई थी। इसी क्रम में मंदिर में नियमित दर्शन के लिए जारी किए गए 2743 नित्य दर्शन पास को अस्थायी रूप से निष्प्रभावी कर दिया गया था। अब मंदिर प्रशासन की ओर से इन पासों की वैधता और उपयोगिता की समीक्षा की जा रही है। समीक्षा प्रक्रिया के दौरान जिन नित्य दर्शन पासों की अवधि पूरी हो चुकी है या जो निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं, उन्हें निरस्त किया जा रहा है। हालांकि, पुराने पासों की समीक्षा और निरस्तीकरण की प्रक्रिया के बीच नए नित्य दर्शन पास जारी नहीं किए जा रहे हैं। यही कारण है कि नियमित रूप से रामलला के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ गई है।

नियमित दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के सामने बढ़ी समस्या

अयोध्या में बड़ी संख्या में ऐसे साधु-संत और स्थानीय श्रद्धालु हैं, जो वर्षों से प्रतिदिन भगवान राम के दर्शन करते आ रहे हैं। इनके लिए नित्य दर्शन पास की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इसके माध्यम से उन्हें नियमित दर्शन में सुविधा मिलती थी। पास व्यवस्था प्रभावित होने के बाद अब इन श्रद्धालुओं को सामान्य दर्शन व्यवस्था के तहत मंदिर पहुंचना पड़ रहा है। इससे उन्हें लंबी कतारों और अतिरिक्त प्रतीक्षा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि नित्य दर्शन पास केवल सुविधा का माध्यम नहीं था, बल्कि अयोध्या के लोगों और साधु-संतों की नियमित धार्मिक दिनचर्या का हिस्सा था। पास समाप्त होने के बाद उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि नई व्यवस्था कब तक लागू होगी और उन्हें दोबारा नित्य दर्शन की सुविधा कब मिलेगी।

चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद शुरू हुई जांच

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी अनियमितता सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और पास प्रणाली की समीक्षा शुरू की थी। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि मंदिर परिसर में प्रवेश व्यवस्था अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और नियंत्रित हो। इसी के तहत पुराने नित्य दर्शन पासों की जांच की जा रही है। प्रशासन यह देख रहा है कि जारी किए गए पास निर्धारित नियमों के अनुसार हैं या नहीं और किन लोगों को नियमित दर्शन की सुविधा जारी रखी जानी चाहिए।

पुराने पासों की वैधता हो रही समाप्त

मंदिर प्रशासन की समीक्षा में जिन श्रद्धालुओं के पास की वैधता समाप्त हो चुकी है, उन्हें निरस्त किया जा रहा है। हालांकि, नए पास जारी करने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।  इसके कारण कई श्रद्धालु असमंजस की स्थिति में हैं। उन्हें यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि नए नित्य दर्शन पास के लिए आवेदन प्रक्रिया कब शुरू होगी और इसके लिए क्या नए नियम लागू किए जाएंगे।

साधु-संतों ने जताई चिंता

अयोध्या के कई साधु-संतों और स्थानीय लोगों ने नित्य दर्शन पास व्यवस्था जल्द बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि रामलला के नियमित दर्शन करने वालों के लिए अलग व्यवस्था होना आवश्यक है, ताकि वे बिना परेशानी के प्रतिदिन दर्शन कर सकें। श्रद्धालुओं का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही वर्षों से नियमित दर्शन करने वाले स्थानीय भक्तों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

मंदिर प्रशासन कर रहा व्यवस्था सुधारने का प्रयास

माना जा रहा है कि मंदिर प्रशासन सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था तैयार कर रहा है। नई प्रक्रिया में पहचान सत्यापन, पात्रता और सुरक्षा जांच जैसे बिंदुओं को अधिक मजबूत किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक मंदिर प्रशासन की ओर से नए नित्य दर्शन पास जारी करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।

श्रद्धालुओं को नई व्यवस्था का इंतजार

राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्त रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। ऐसे में नियमित दर्शन करने वाले स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए नित्य दर्शन पास व्यवस्था का सुचारु होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल 2743 नित्य दर्शन पास की समीक्षा और निरस्तीकरण प्रक्रिया जारी है। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि जल्द ही नई व्यवस्था लागू होगी और नियमित दर्शन की सुविधा दोबारा उपलब्ध कराई जाएगी।