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Gen-Z पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, युवाओं से संवाद की अपील

मुंबई में I.I.M.U.N. के कार्यक्रम में RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने Gen-Z को अधिक ईमानदार और देश के प्रति जागरूक पीढ़ी बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं और शिकायतों को समय पर सुनकर संवाद स्थापित किया जाए तो कई आंदोलन और विरोध टाले जा सकते हैं। आरक्षण पर उन्होंने कहा कि सामाजिक असमानता खत्म होने तक इसकी आवश्यकता बनी रहेगी और यह सामाजिक न्याय का माध्यम है।

Neha Sharma07 अग. 2026, 05:23 PM IST
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Gen-Z पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, युवाओं से संवाद की अपील
मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नई पीढ़ी यानी जेन-जी (Gen-Z) को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पीढ़ी पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक ईमानदार और देश के प्रति जागरूक है। उन्होंने कहा कि युवाओं की शिकायतों और समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। यदि समय रहते संवाद स्थापित किया जाए, तो कई आंदोलन और विरोध-प्रदर्शन टाले जा सकते हैं।

मुंबई में आयोजित आई.आई.एम.यू.एन. (India's International Movement to Unite Nations) के 15वें वर्षगांठ कार्यक्रम में युवाओं के साथ संवाद के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि आज के युवा अपनी बात खुलकर रखते हैं और व्यवस्था से बेहतर जवाबदेही की अपेक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि जब संवाद के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तब लोग आंदोलन का रास्ता अपनाते हैं। इसलिए समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि युवाओं की बात समय पर सुनी जाए।

हाल ही में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य मुद्दों को लेकर युवाओं द्वारा किए गए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पहले से उचित बातचीत होती, तो ऐसे हालात पैदा नहीं होते। उन्होंने युवाओं को देश विरोधी बताने की सोच को भी गलत बताया और कहा कि नई पीढ़ी देश के विकास में योगदान देना चाहती है।

आरक्षण पर क्या कहा?
कार्यक्रम में आरक्षण व्यवस्था पर पूछे गए सवाल के जवाब में मोहन भागवत ने कहा कि जब तक समाज में असमानता और भेदभाव मौजूद हैं, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण सामाजिक न्याय का माध्यम है, न कि स्थायी व्यवस्था।

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम हो चुके हैं, उन्हें आगे बढ़कर उन वंचित लोगों के लिए अवसर छोड़ने की भावना विकसित करनी चाहिए जिन्हें अभी भी इसकी आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षण समाप्त करने या सीमित करने का कोई सीधा समर्थन या विरोध उन्होंने व्यक्त नहीं किया।

डॉ. भागवत ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर का दृष्टिकोण सामाजिक न्याय, समान अवसर और सामाजिक सद्भाव पर आधारित था। समाज को उसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि हर वर्ग को सम्मान और बराबरी का अवसर मिल सके।