महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले 200 से कम बिस्तरों वाले सरकारी अस्पतालों में मरीजों को आहार (डाइट) सेवा उपलब्ध कराने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के चयन संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। सरकार द्वारा जारी शुद्धिपत्र में चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और सभी पात्र महिला बचत समूहों के लिए समान अवसर प्रदान करने वाला बनाने पर जोर दिया गया है। नए संशोधन के तहत अब Community Investment Fund (CIF) का केवल उपयोग ही नहीं, बल्कि उसकी समय पर पुनर्भुगतान (Repayment) का अनुभव भी मूल्यांकन का महत्वपूर्ण आधार होगा। इसके साथ ही संबंधित अस्पताल के परिसर या उसके आसपास कार्यरत महिला बचत समूहों को प्राथमिकता देने की अनिवार्य शर्त भी समाप्त कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से राज्यभर के महिला स्वयं सहायता समूहों को समान अवसर मिलेगा, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण आहार सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले 200 से कम बिस्तरों वाले सरकारी अस्पतालों में मरीजों को आहार (डाइट) सेवा उपलब्ध कराने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups–SHG) के चयन संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। 6 अगस्त 2026 को जारी शुद्धिपत्र के माध्यम से सरकार ने पहले जारी शासन निर्णय में बदलाव करते हुए चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और प्रतिस्पर्धी बनाने का निर्णय लिया है। यह संशोधन राज्यभर के उन महिला बचत समूहों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो सरकारी अस्पतालों में आहार सेवा संचालित करने की इच्छुक हैं।
सरकारी दस्तावेज के अनुसार, इससे पहले जारी शासन निर्णय में महिला बचत समूहों के चयन के लिए आर्थिक क्षमता, अनुभव और अन्य पात्रता संबंधी मानदंड निर्धारित किए गए थे। स्वास्थ्य विभाग को प्राप्त सुझावों और संबंधित अधिकारियों के प्रस्तावों के आधार पर इन मानदंडों की समीक्षा की गई, जिसके बाद सरकार ने उनमें आवश्यक संशोधन करने का निर्णय लिया। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयन प्रक्रिया केवल औपचारिक पात्रता तक सीमित न रहे, बल्कि उन समूहों को प्राथमिकता मिले जो वित्तीय अनुशासन, बेहतर प्रबंधन और सेवा संचालन की क्षमता रखते हों।
संशोधित नियमों के अनुसार अब Community Investment Fund (CIF) के उपयोग का अनुभव ही पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि महिला स्वयं सहायता समूहों को यह भी प्रदर्शित करना होगा कि उन्होंने प्राप्त निधि का सफलतापूर्वक पुनर्भुगतान (Repayment) किया है। सरकार का मानना है कि इससे वित्तीय रूप से जिम्मेदार और सक्षम समूहों की पहचान करना आसान होगा तथा अस्पतालों में आहार सेवा का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। यह बदलाव चयन प्रक्रिया को अधिक गुणवत्ता आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरकार ने चयन प्रक्रिया में एक और बड़ा बदलाव करते हुए उस शर्त को भी समाप्त कर दिया है, जिसके तहत संबंधित सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था या उसके आसपास कार्यरत महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जाती थी। अब यह शर्त हटाए जाने के बाद राज्य के किसी भी पात्र महिला बचत समूह को समान अवसर मिलेगा। इससे अधिक संख्या में महिला समूह सरकारी अस्पतालों में आहार सेवा उपलब्ध कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे और उनका चयन केवल निर्धारित पात्रता, अनुभव एवं गुणवत्ता के आधार पर किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से महिला स्वयं सहायता समूहों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं आय के नए अवसर भी विकसित होंगे। साथ ही अस्पतालों में मरीजों को समय पर पौष्टिक, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी अधिक मजबूत होगी। महिला सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शुद्धिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संशोधित आदेश महाराष्ट्र सरकार की स्वीकृति के बाद तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इस आदेश पर राज्य सरकार के अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर किए गए हैं तथा इसे राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया गया है। इसके अनुपालन के लिए स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला शल्य चिकित्सकों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों तथा संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।