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ड्रग्स मामलों की सुनवाई होगी तेज: पुणे में एनडीपीएस (NDPS) कोर्ट की स्थापना को मिली मंजूरी l

महाराष्ट्र सरकार ने मादक पदार्थों (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज मामलों की त्वरित और प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए पुणे में एक विशेष न्यायालय (स्पेशल कोर्ट) स्थापित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह फैसला पुणे में एनडीपीएस मामलों की लगातार बढ़ती संख्या, लंबित प्रकरणों के बढ़ते बोझ और मुंबई उच्च न्यायालय की सिफारिश को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार ने इस अदालत के संचालन के लिए न्यायाधीश सहित आठ पदों को मंजूरी देने के साथ-साथ लगभग ₹1.26 करोड़ के खर्च की भी स्वीकृति प्रदान की है। सरकार का मानना है कि इस विशेष अदालत के शुरू होने से मादक पदार्थों से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा होगा, न्यायिक व्यवस्था पर दबाव कम होगा और कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

Kashish Rai07 अग. 2026, 05:23 PM IST
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ड्रग्स मामलों की  सुनवाई होगी तेज: पुणे में एनडीपीएस (NDPS) कोर्ट की स्थापना को मिली मंजूरी l

राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। विधि एवं न्याय विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय के अनुसार पुणे में गुंगीकारक मादक द्रव्य एवं मादक पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act) के अंतर्गत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जिसके कारण सामान्य न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी बढ़ा है। इसी कारण मुंबई उच्च न्यायालय ने पुणे में अलग से विशेष अदालत स्थापित करने की अनुशंसा की थी, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है।


विशेष अदालत की स्थापना से अब एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों से अलग होगी। इससे मामलों की नियमित और प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई हो सकेगी तथा फैसले आने में लगने वाला समय भी कम होगा। सरकार का मानना है कि इससे मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी और दोषियों को समय पर सजा दिलाने में सहायता मिलेगी। साथ ही, न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम होने से न्यायिक प्रणाली अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी।


नई विशेष अदालत के सुचारु संचालन के लिए सरकार ने एक जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के पद सहित कुल आठ पदों को मंजूरी दी है। इसके अलावा एक लघुलेखक (स्टेनोग्राफर), एक सहायक अधीक्षक, एक वरिष्ठ लिपिक, दो कनिष्ठ लिपिक तथा बाह्य एजेंसी के माध्यम से दो शिपाइयों की नियुक्ति की जाएगी। इन पदों की व्यवस्था पहले से स्वीकृत न्यायिक पदों के ढांचे के अंतर्गत की जाएगी, जिससे नई अदालत को आवश्यक प्रशासनिक और न्यायिक सहयोग मिल सके।


सरकार ने इस विशेष न्यायालय की स्थापना और संचालन के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान भी किए हैं। शासन निर्णय के अनुसार अदालत के संचालन हेतु कुल ₹1,26,35,444 की राशि स्वीकृत की गई है। इसमें ₹1,04,84,444 का आवर्ती व्यय तथा ₹21,51,000 का अनावर्ती व्यय शामिल है। यह राशि न्यायालय के प्रशासन, कर्मचारियों के वेतन, कार्यालयीन व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक खर्चों पर व्यय की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस राशि का प्रावधान न्याय विभाग के निर्धारित बजट मद से किया जाएगा। शासन निर्णय में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाह्य एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किए जाने वाले कर्मचारियों की सेवाएं वित्त विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ली जाएंगी। फिलहाल स्वीकृत अस्थायी पद 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार इन पदों और विशेष न्यायालय की अवधि बढ़ाने के लिए अलग से प्रशासनिक मंजूरी ली जाएगी।


राज्य सरकार का मानना है कि विशेष न्यायालय की स्थापना केवल न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मादक पदार्थों के अवैध व्यापार के खिलाफ चल रही कार्रवाई को भी गति देगा। विशेष अदालत के माध्यम से मामलों का शीघ्र निपटारा होने से अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अधिक प्रभावी होगी, जबकि पुलिस और जांच एजेंसियों के कार्यों को भी न्यायिक स्तर पर तेजी मिलेगी। इससे समाज में नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद जताई गई है। यह शासन निर्णय वित्त विभाग की सहमति तथा राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद जारी किया गया है।